माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी) में क्रेडिट आधारित व्यवस्था की गई है। एक सत्र में विद्यार्थी को एक क्रेडिट के लिए हर सप्ताह चार घंटे और सभी जरूरी क्रेडिट पूरे करने के लिए पूरे सत्र में 1200 घंटे की लर्निंग जरूरी है। विद्यार्थी विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेकर भी क्रेडिट स्कोर पूरा कर सकते हैं। यह जानकारी एनईपी के विशेषज्ञों ने दी। जो बुधवार को एनईपी के संदर्भ में कैपेसिटी बिल्डिंग एंड मेंटरिंग विषय पर हुई कार्यशाला में पहुंचे थे।
पंडित चिरंजीलाल शर्मा राजकीय महाविद्यालय के सभागार में उच्चतर शिक्षा विभाग और हरियाणा स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल की ओर से हुई कार्यशाला में करनाल के अलावा पानीपत और कैथल के कॉलेज प्राचार्यों ने शिरकत की। उन्हें विशेषज्ञों ने एनईपी के विस्तार और क्रियान्वयन संबंधित जरूरी जानकारी दी। मुख्य अतिथि काउंसिल के चेयरमैन प्रोफेसर कैलाश चंद्र शर्मा ने कहा कि बदलते परिवेश में शिक्षा क्षेत्र में भी नवाचार जरूरी है। एनईपी कौशल विकास पर विशेष जोर देती है ताकि आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार किया जा सके। इस अवसर पर उप प्राचार्य जरनैल सिंह, कॉलेज कमेटी के संयोजक डॉ. विकास शर्मा, डॉ. मंजुला चौधरी, अनीता दुआ और नवीन बत्तरा मौजूद रहे।
भविष्य की जरूरत के हिसाब से ग्रेजुएट्स करने हैं तैयार
पहले तकनीकी सत्र में निदेशक डॉ. मंजुला चौधरी ने नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क में यूजी, पीजी और पीएचडी स्तर के लिए किए गए प्रावधानों पर चर्चा की। दूसरे तकनीक सत्र में प्रोफेसर अनीता दुआ ने समग्र व बहुविषय शिक्षा और पाठ्यक्रम व क्रेडिट फ्रेमवर्क पर चर्चा करते हुए कहा कि हमें भविष्य की जरूरत के हिसाब से ग्रेजुएट्स तैयार करने हैं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 इस मकसद को पूरा करने में सक्षम है।
जरूरत हुई तो एनईपी से पाठ्यक्रमों में होगा संशोधन
उच्चतर शिक्षा विभाग की सहायक निदेशक डॉ. दीपिका ने फीडबैक सत्र का संचालन किया। कई प्रतिभागियों ने एनईपी के संबंध में जरूरी सवाल पूछे तो कई एनईपी संयोजकों ने उपयोगी सुझाव भी दिए। प्रोफेसर कैलाश चंद्र शर्मा ने कहा कि सभी के सुझाव पर अमल किया जाएगा। अगर जरूरत हुई तो विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रम में भी संशोधन किया जाएगा।