सरकारी स्कूलों में मिड डे मील के लिए राशन सप्लाई में भारी गोलमाल है। स्कूलों तक राशन पहुंचाने वाले हैफेड कर्मी व ठेकेदार रास्ते में ही बोरियों से राशन निकाल रहे हैं और स्कूलों में मिड डे मील के इंचार्ज नियुक्त हुए अध्यापकों का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। स्कूलों की लापरवाही से जिले में मिड डे मील के राशन वितरण में करोड़ों रुपये के गोलमाल की आशंका है।
स्कूलों में निर्धारित मात्रा से कम राशन वितरित करने का एक मामला बुधवार को राजकीय ब्वॉय स्कूल रेलवे रोड पर देखने को मिला है। अमर उजाला की टीम ने स्कूल अध्यापकों की मदद से मामले की जांच पड़ताल के बाद इस मामले का पर्दाफाश किया है। बुधवार को दिन में करीब 11:30 बजे हैफेड से राशन की एक खेप राजकीय ब्वॉय स्कूल रेलवे रोड पहुंची। मिड डे मील इंचार्ज की मौजूदगी में ठेकेदार ने छह बोरी चावल और तीन बोरी गेहूं गाड़ी से उतरवाकर स्कूल स्टोर में रखवा दिया। इसी दौरान अमर उजाला की टीम ने मौके पर पहुंचकर उस राशन को तुलवाने की बात कही। लेकिन स्कूल व हैफेड कर्मियों के पास राशन तोलने के लिए कोई संसाधन उपलब्ध नहीं मिला।
इस पर चावल की दो बोरियों को बाइक से पास की एक आटा चक्की पर ले जाया गया। तोल के दौरान एक बोरी से 43 किलो व दूसरी बोरी से 45 किलो राशन मिला। दोनों बोरियों के तोल में एक क्विंटल चावलों में से 12 किलो चावल कम मिलने से अध्यापकों भी हड़कंप मच गया है। वहीं ठेकेदार व हैफेड कर्मचारी स्कूल से राशन की रिसीविंग लिए बिना ही मौके से फरार हो गए। जब इस मामले में टीम ने मिड डे मील इंचार्ज से बात की तो उसने स्कूल में नाप तोल के संसाधन उपलब्ध न होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया है। मिड डे मील के राशन वितरण में धांधली का यह मामला किसी एक स्कूल का नहीं है। यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए तो राशन वितरण में हो रहे करोड़ों के गोलमाल को रोका जा सकता है।
मिडिल स्कूलों में हर रोज 80 क्विंटल राशन की हो रही खपत
जिले के प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में करीब 55 हजार विद्यार्थी रजिस्टर्ड हैं। मिड डे मील योजना के तहत बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए दोपहर के भोजन में 145 ग्राम राशन वितरित किया जाता है। इससे जिले के 55 हजार विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन 80 क्विंटल राशन की खपत होती है। एक माह में जिले के सभी स्कूलों में करीब 2400 क्विंटल राशन सप्लाई होता है। यदि एक क्विंटल राशन के वितरण में 10 किलो का गोलमाल हो तो प्रति माह करीब 240 क्विंटल राशन हैफेड कर्मचारी व वितरण एजेंसियां निगल रही हैं। यदि चावल की कम से कम 30 रुपये प्रति किलो कीमत भी आंकी जाए तो राशन वितरण में प्रति माह जिले से ही सवा सात लाख का राशन हैफेड से स्कूलों के बीच के रास्ते में गायब हो रहा है।
स्कूलों में नापा तोल की सुविधाएं नहीं, ठेकेदार लगा रहे चूना
स्कूलों में राशन के नापतोल के लिए कांटे की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में हर तीसरे माह आने वाले राशन में ठेकेदार लाखों का हेरफेर कर रहे हैं, लेकिन स्कूल मिड डे मील इंचार्ज व स्कूल के मुखिया पर इसका कोई असर नहीं है। ठेकेदार भी अपने साथ कांटा लेकर नहीं आते और राशन की खेप में साजिश के तहत आधी अधूरी बोरियां उतारकर चले जाते हैं। राशन वितरण में गड़बड़ी का यह पहला मामला नहीं है। पहले भी कई बार इस तरह की मामले सामने आए हैं, लेकिन विभाग द्वारा अभी तक इस विषय पर गंभीरता से कोई कदम नहीं उठाए हैं।
मिड डे मील की मात्रा पर भी सवाल
जब स्कूलों में मिड डे मील का राशन ही पूरा नहीं पहुंच रहा है तो फिर विद्यार्थियों को राशन पूरा मिल भी रहा है या नहीं यह एक बड़ा सवाल है। ज्यादातर स्कूलों में समय से पहले राशन समाप्त होने पर अन्य स्कूलों से राशन उधार लेने के मामले भी सामने आए हैं। हालांकि उधार का राशन वापस लौटाना होता है, लेकिन वितरण में गड़बड़ी होने से स्कूलों में आने वाले कम राशन की आपूर्ति कैसे होती है, इसका किसी अधिकारी के पास कोई जवाब नहीं है।
वर्जन
स्कूल में मिड डे मील के लिए अध्यापक की ड्यूटी लगाई है। जिसे राशन की रिसीविंग से लेकर विद्यार्थियों को भोजन परोसने तक की जिम्मेवारी दी गई है। यदि राशन की तुलाई में गड़बड़ी होने पर अध्यापक की लापरवाही हुई है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी तथा राशन वितरण एजेंसी के प्रबंधन को भी इसकी शिकायत की जाएगी।
- नरेंद्र विर्क, प्रिंसिपल राजकीय ब्वॉय स्कूल रेलवे रोड करनाल।
वर्जन
राशन की रिसीविंग और बच्चों को मिड डे मील वितरित करने की जिम्मेवारी स्कूल हेड और राशन इंचार्ज की होती है। अभी तक ऐसा कोई भी मामला हमारे संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसी गड़बड़ी हुई तो अध्यापकों की लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी तथा राशन वितरण एजेंसी से भी इस मामले में बात की जाएगी।
- सरोज बाला गुर, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी करनाल।