माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में चार दिनों से एमआरआई मशीन बंद है। इससे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मशीन में आई तकनीकी खराबी को ठीक करने के लिए आवश्यक पार्ट जर्मनी से मंगवाया गया है जिसके आने का इंतजार किया जा रहा है। तब तक अस्पताल में एमआरआई की सुविधा पूरी तरह ठप हो गई है।
मेडिकल कॉलेज में एमआरआई मशीन बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को हो रही है जिन्हें दिमाग, रीढ़ की हड्डी और अन्य गंभीर बीमारियों की जांच के लिए एमआरआई की जरूरत होती है। रोजाना कई मरीज जांच के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं लेकिन मशीन खराब होने के कारण उन्हें बिना जांच कराए ही लौटना पड़ रहा है।
निजी सेंटरों में जाने के लिए मजबूर
कई मरीजों को डॉक्टरों द्वारा एमआरआई जांच करवाने की सलाह दी गई है लेकिन अस्पताल में सुविधा बंद होने के कारण उन्हें मजबूरी में निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों की ओर रुख करना पड़ रहा है। निजी सेंटरों में एमआरआई जांच काफी महंगी होती है जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। अस्पताल में इलाज के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भी मशीन बंद होने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीज चार दिनों से लगातार अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं और मशीन ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं।
विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतीक ने बताया कि एमआरआई मशीन में तकनीकी खराबी आने के कारण यह सेवा प्रभावित हुई है। मशीन को ठीक करने के लिए जरूरी पार्ट जर्मनी से मंगवाया गया है जिसके आने के बाद मशीन को जल्द ठीक कर दिया जाएगा। रोजाना मेडिकल कॉलेज में 5-6 एमआरआई की जाती हैं।
इमरजेंसी में खर्च करने पड़ रहे 7 हजार रुपये
इमरजेंसी में मरीजों को एमआरआई कराने के लिए निजी अस्पतालों या निजी सेंटरों की ओर रुख करना पड़ रहा है। कुंजपुरा निवासी रमेश ने बताया कि उनकी पत्नी के पिछले कई दिनों से सिर में दर्द है। डॉक्टरों ने जल्द एमआरआई कराने के लिए कहा था। जिस पर उन्हें एक निजी सेंटर पर ले गए। वहां 7 हजार रुपये में एमआरआई हुई है। यदि मेडिकल कॉलेज में सुविधा होती तो हमारे यह रुपये बच सकते थे।