फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

करनाल: कृषि यंत्र इंडस्ट्री पर गिरी 'बिजली' घटी मांग व बढ़े उपकरणों के दाम, डेढ़ गुना महंगे हुए कृषि उपकरण

Wed, 04 May 2022 01:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो देव शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, करनाल (हरियाणा)

सार

कृषि उपकरण 65 फीसदी तक डिमांड कम हुई और डेढ़ गुना महंगे हुए। मंडी गोबिंदगढ़ में तीन दिन के पावर कट से कच्चे माल की कीमतें भी बढ़ी हैं।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हरियाणा के करनाल जिले की 1500 करोड़ रुपये के वार्षिक टर्नओवर वाली कृषि यंत्र निर्माण इंडस्ट्री बिजली कटौती और रॉ मैटेरियल की मार से बेहाल है। पंजाब स्थित मंडी गोबिंदगढ़ की लोहा मंडी में तीन दिवसीय पावर कट से पूरे प्रदेश में ही कच्चा लोहा महंगा हो गया है। करनाल में भी औद्योगिक क्षेत्र में पूरी रात घोषित तो दिन में अघोषित बिजली कटौती ने उद्यमियों की नींद उड़ा दी है। तैयार कृषि उपकरण करीब डेढ़ गुना महंगे हो गए हैं, जिसका परिणाम ये है कि मई में जहां हर साल तैयार मॉल की शार्टेज हो जाती थी, वहां इस बार डिमांड में 60 से 65 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। 

विज्ञापन


गेहूं कटाई के साथ ही किसान धान बुआई की तैयारी शुरू कर देते हैं। यही कारण है कि अप्रैल में ही कृषि यंत्रों की मांग बढ़ने लगती है, जो मई और जून में पीक पर होती है। इस दौरान करनाल की कृषि यंत्र इंडस्ट्री को डिमांड पूरा करने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, यानी माल की शार्टेज हो जाती है, लेकिन इस बार परिस्थितियां विपरीत दिख रही हैं। इसका मुख्य कारण उद्योगों में अत्यधिक बिजली कट माना जा रहा है। कृषि यंत्र उद्योग पर पावर कट की दोहरी मार पड़ रही है। पहली तो स्थानीय स्तर पर रात्रि कालीन कटौती और दूसरी मंडी गोबिंदगढ़ में सप्ताह में तीन दिवसीय पावर कट। 

इसके अलावा कृषि यंत्र उपकरणों का देशभर में एकमात्र खरीदार किसान ही है, वो चाहे छोटा हो या बड़ा। इस बार मौसम की मार से गेहूं का उत्पादन कम हुआ है। ऐसे में किसानों को लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है। इसका सीधा प्रभाव कृषि यंत्र उपकरणों की खरीदारी पर भी पड़ा है। बेहद आवश्यकता पर ही कृषि यंत्र उपकरणों की खरीदारी हो रही है, शेष किसानों ने इसे आगे के लिए टाल दिया है। किसानों की ओर डिमांड कम होने के कारण डिस्ट्रीब्यूटर भी डिमांड नहीं भेज रहे हैं।
विज्ञापन


करनाल एग्रीकल्चर इंप्लीमेंट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (कायमा) के महासचिव भावुक मेहता बताते हैं कि करनाल एग्रीकल्चर इंप्लीमेंट्स इंडस्ट्री में अधिकांश रॉ मैटेरियल यानी इंगट (कच्चा लोहा) गोबिंदगढ़ मंडी से ही आता है। बिजली संकट के चलते मंडी गोबिंदगढ़ की लोहा मंडी में शुक्रवार, शनिवार और रविवार को तीन दिन पूर्ण रूप से पावर कट कर दिया गया है, जिससे तीन दिन के लिए मंडी बंद हो जाने से उत्पादन प्रभावित हो गया है। इससे इंगट की शार्टेज के कारण महंगाई हो गई है। इन दिनों इंगट 59000 रुपये प्रति टन तक पहुंच गया है, जो जनवरी के महीने में 45000 रुपये प्रति टन मिलता था। डीजल भी काफी महंगा है। यही कारण है कि फिनिश प्रोडक्ट (तैयार कृषि यंत्र) की कीमत डेढ़ गुना हो गई है। 
 

करनाल जिले में कृषि यंत्र उपकरण बनाने वाली करीब 100 से अधिक इकाइयां हैं। लगभग 1500 करोड़ रुपये का इंडस्ट्री का वार्षिक टर्नओवर है। पावर कट व महंगाई के कारण बिक्री सिर्फ 35 से 40 प्रतिशत ही रह गई है। करीब 60 से 65 प्रतिशत बिक्री में गिरावट आई है। अप्रैल से जून तक का ही पीक टाइम होता है, लेकिन इस बार विपरीत परिस्थितियों के कारण इंडस्ट्री बेहाल है। डिमांड न होने के कारण उत्पादन भी प्रभावित हो गया है। किसान पहले से ही परेशान हैं, दूसरी ओर से पावर कट और डीजल की महंगाई से कृषि यंत्र उद्योग बेहाल है। सरकार को शीघ्र इसका समाधान निकालना चाहिए। -रविंद्र ढल, प्रधान करनाल एग्रीकल्चर इंप्लीमेंट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें