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स्पोर्ट्स फंड के लाखों रुपये वसूले, पर विद्यार्थी खेलों में नहीं ले सके भाग

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गगन तलवार
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करनाल। बच्चों को हर सुविधा देने और बेहतर भविष्य बनाने का दावा करते हुए निजी स्कूल अभिभावकों से मोटी फीस वसूलते हैं। लेकिन विभिन्न मदों में वसूली गई फीस का पैसा खर्च नहीं होता। इसका खुलासा शिक्षा विभाग की ओर से चल रही खेल प्रतियोगिता में हुआ है, जहां स्कूलों की ओर से स्पोर्ट्स फंड जमा न कराए जाने पर सैकड़ों विद्यार्थी खेलों में हिस्सा लेने से वंचित रह गए हैं।
नियम के अनुसार खेल सुविधा के नाम पर फीस में अभिभावकों से स्पोर्ट्स फंड के रूप में वसूला पैसा निजी स्कूलों को शिक्षा विभाग के पास जमा कराना होता है। लेकिन जिले के 302 स्कूलों ने यह पैसा जमा नहीं कराया। यानी साल भर की फीस में जिले के करीब एक लाख से ज्यादा विद्यार्थियों से वसूले गए स्पोर्ट्स फंड के करोड़ों रुपये वे डकार गए हैं। सीबीएसई और हरियाणा बोर्ड के मिलाकर जिले में 364 निजी स्कूल हैं, जहां कक्षा पहली से 12वीं तक डेढ़ लाख विद्यार्थी पढ़ते हैं।
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शिक्षा विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार विभिन्न खंडों से केवल 62 स्कूलों ने ही स्पोर्ट्स फंड का पैसा जमा कराया है। जबकि सभी स्कूलों को प्रति विद्यार्थी के हिसाब से यह फंड जमा कराना होता है। स्कूलों की इस मनमानी का नुकसान बच्चों को हुआ है, क्योंकि वे पूरा पैसा स्कूल को देेने के बाद भी स्कूली गेम्स में वंचित रह गए। इन खेलों में हिस्सा लेने के लिए विद्यार्थी वर्ष भर मेहनत करते हैं, ताकि बेहतर प्रदर्शन करते हुए वे खेल में अपना भविष्य बना सकें लेकिन उनकी यह आस पूरी नहीं हो सकी।
लापरवाही : एक माह पहले सूचना, फिर भी नहीं जमा कराया फंड
शिक्षा विभाग की एईओ संगीता ने बताया कि विभाग की ओर से करीब एक माह पहले पत्र जारी करते हुए स्कूलों को स्पोर्ट्स फंड जमा कराने के लिए कहा गया था, लेकिन जिला स्तर के खेल खत्म होने को हैं, अब तक स्कूलों ने पैसा जमा नहीं कराया। विभाग की ओर से 3 नवंबर को खेलों का शेड्यूल जारी किया गया था। 8 नवंबर से खंड स्तर पर खेल शुरू हुए थे। लेकिन इस समय तक भी कई स्कूलों का पैसा नहीं आया तो ऐसे स्कूलों के बच्चों को वापस भेज दिया गया। वहीं निजी स्कूलों का आरोप है कि उन्हें समय पर सूचना नहीं मिली थी, इसलिए पैसा नहीं दिया।
बहाने : कोरोना में फीस न मिलना, प्रबंधन कमेटी बाहर की होना बताया कारण
स्पोर्ट्स फंड न आने की स्थिति में जब खेल प्रभारियों की ओर से खंड स्तरीय प्रतियोगिता में ही स्कूली बच्चों को वापस भेजा गया तो कुछ बच्चों और अभिभावकों ने अपने स्कूल संचालकों से अधिकारियों की बात कराई। खेल इंचार्ज धर्मपाल ने बताया कि इस दौरान कई स्कूल संचालकों ने कोरोना में फीस न आने का बहाना बनाया तो कुछ ने कह दिया कि उनकी प्रबंधन कमेटी दिल्ली या अन्य महानगरों में है, इसलिए अभी पैसा नहीं दे सकते।
इतना जमा होता है फंड-
- कक्षा एक से आठवीं तक 15 रुपये प्रति विद्यार्थी।
- 9वीं और 10वीं का 30 रुपये प्रति विद्यार्थी।
- 11वीं और 12वीं कक्षा में कला संकाय में 60, वाणिज्य में 72 और विज्ञान संकाय में 90 रुपये प्रति विद्यार्थी।
( स्कूलों को इस नियम के अनुसार शिक्षा विभाग को फंड जमा कराना होता है और इतना ही स्कूल द्वारा विद्यार्थी से लेने का नियम है)
नोटिस करेंगे जारी : डीईईओ
जिन स्कूलों ने स्पोर्ट्स फंड जमा नहीं कराया है, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। ऐसा करना गलत है, क्योंकि स्कूलों की लापरवाही के कारण विद्यार्थियों को नुकसान हो रहा है।
- रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी (डीईईओ)
फर्जीवाड़े के खिलाफ सौंपेंगे ज्ञापन : अभिभावक संघ
स्कूलों की ओर से हर जगह मनमानी की जाती है। दाखिला और किताबें खरीदने के समय भी। अब स्पोर्ट्स फंड के नाम पर भी फर्जीवाड़ा सामने आया है, इसे लेकर उपायुक्त और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे।
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- नवीन अग्रवाल, महासचिव, अभिभावक एकता संघ
समय पर नहीं मिली सूचना : सहोदय
शिक्षा विभाग की ओर से समय पर खेलों की सूचना नहीं दी गई। खेल में अगर एक बच्चा हिस्सा ले रहा हो और हर बच्चे का फंड विभाग द्वारा वसूले जाने का नियम भी गलत है। स्कूलों ने अभिभावकों से वार्षिक चार्ज ही लिया है, दो साल से स्पोर्ट्स फंड नहीं वसूला गया।
- राजन लांबा, अध्यक्ष, सहोदय स्कूल कांप्लेक्स
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