फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Karnal News: ठंड में धूप नहीं निकलने से 20 फीसदी बढ़े अवसाद के मरीज

Fri, 26 Dec 2025 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

करनाल। ठंड केवल खांसी, जुकाम, बुखार ही नहीं बढ़ा रही बल्कि लोगों के हैप्पी हार्मोन को भी प्रभावित कर रही है। ठंड और कोहरा बढ़ रहा है और धूप नहीं निकल रही जिससे लोगों में डोपामाइन और सेरोटोनिन हार्मोन असंतुलित हो रहा है। नतीजतन, अवसाद से जूझ रहे लोग फिर मनोरोग ओपीडी में आने लगे हैं जिससे ओपीडी में पहले से 40 से 50 मरीज रोजाना अवसाद और चिंता के आ रहे थे कि अब 20 प्रतिशत इजाफा और हो गया है।
जिला नागरिक अस्पताल की मनोरोग ओपीडी में एक सप्ताह से बढ़े कोहरे और ठंड के कारण अवसाद और चिंता के पुराने मरीजों की संख्या करीब 20 प्रतिशत बढ़ी है जबकि महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है। नागरिक अस्पताल से मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य कौशिक का कहना है कि ओपीडी में पहुंच रहे कई मरीज पहले इलाज के बाद सामान्य हो चुके थे, लेकिन ठंड बढ़ते ही उनके लक्षण दोबारा उभर आए हैं।
विज्ञापन

कम धूप से घट रहा सेरोटॉनिन
डॉ. सौभाग्य का कहना है कि सर्दियों में दिन छोटे होते हैं और धूप कम मिलती है। सूरज की रोशनी सेरोटोनिन उत्पादन को बढ़ाती है। वहीं, कम धूप से सेरोटोनिन गिरता है, जिससे मूड खराब होता है। दूसरा, डोपामाइन प्रेरणा और खुशी से जुड़ा है। सूरज की रोशनी डोपामाइन को भी प्रभावित करती है। कम रोशनी में इसका स्तर भी गिर सकता है, जिससे ऊर्जा और मोटिवेशन कम हो जाती है।

महिलाओं में घरेलू जिम्मेदारियों का भी असर
डॉ. सौभाग्य कौशिक ने बताया कि दिमाग में सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे हार्मोन मूड को संतुलित रखने का काम करते हैं। पहले से अवसाद झेल चुके मरीजों में इसका असर ज्यादा दिखता है। खासकर महिलाओं में हार्मोनल बदलाव, घरेलू जिम्मेदारियां सर्दियों में मानसिक परेशानी को और बढ़ा देते हैं। महिलाओं में हार्माेन घटने के कारण उदासी, चिड़चिड़ापन, तनाव और निराशा बढ़ रही है। डॉ. सौभाग्य का कहना है कि समय पर इलाज न मिलने पर गंभीर मानसिक बीमारी का रूप ले सकता है। यदि उदासी दो हफ्ते से ज्यादा बनी रहे, नींद और भूख लगातार प्रभावित हों या नकारात्मक विचार बढ़ने लगें, तो इसे सामान्य सर्दी का असर मानकर नजरअंदाज न करें।
विज्ञापन




नींद और भूख पर भी असर
नागरिक अस्पताल से क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट संतोष के मुताबिक, काउंसलिंग के लिए आने वाले अधिकांश मरीजों में समान लक्षण पाए जा रहे हैं। लगातार उदासी, नींद न आना या बार-बार टूटना, भूख कम लगना, अकेलापन और बेवजह घबराहट सर्दी के मौसम में बढ़ रहे सामान्य लक्षण है। समय पर काउंसलिंग न हो तो यह स्थिति गंभीर अवसाद में बदल सकती है। उनका कहना है कि हर साल सर्दियों में मानसिक रोग ओपीडी में मरीज बढ़ते हैं, लेकिन इस बार पुराने मरीजों की दोबारा वापसी चिंता का विषय है।


बचाव के उपाय-
वार्मअप जरूरी ताकि शरीर को गर्माहट मिले।
योग, प्राणायाम और हल्की कसरत करें।
नींद और भोजन का नियमित समय रखें।
लक्षण बढ़ें तो काउंसलिंग में देरी न करें।
दवाएं डॉक्टर की सलाह के बिना बंद न करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें