सीएम सिटी के लोगों के लिए अच्छी खबर है। अब शहर में रिक्शा नहीं, ई-रिक्शा
चलेगा। जल्द ही शहर में साइकिल रिक्शा बंद हो जाएगा। शहर में कोई भी
साइकिल रिक्शा चालक जल्द ही एक भी सवारी को साइकिल रिक्शा से नहीं ढोएगा।
शहर में हर ओर ई- रिक्शा ही चलेगा। इससे शहर में रहने वाले करीब 3 लाख 45
हजार लोगों को फायदा होगा। शहरवासियों को अपने गंतव्य की ओर जाने में किसी
भी प्रकार की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।
खास बात यह रहेगी कि
ई-रिक्शा चालक ऑटो संचालकों से भी कम दाम पर शहरवासियों को उनके मनपसंद
स्थान पर लेकर जाएंगे।
ऐसे में साइकिल रिक्शा को बंद कर पूरे शहर में
ई-रिक्शा चलाने वाला करनाल जिला प्रदेश का पहला जिला बन जाएगा। इस दिशा में
कदम बढ़ाते हुए जिला प्रशासन ने 50 ई-रिक्शा मंगा लिए है। इतना ही नहीं इन
रिक्शा को चलाने वालों की सूची भी जिला प्रशासन ने तैयार कर ली है।
इस समय
करनाल शहर में करीब 3 हजार साइकिल रिक्शा चल रही हैं। इन सभी को जिला
प्रशासन बंद कर ई-रिक्शा चलाने की योजना को अमलीजामा पहनाने की पूरी
तैयारियां कर चुका है। खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर शनिवार सुबह 10 बजे
इन साइकिल रिक्शा वालों को ई-रिक्शा की चाबी सौंपेंगे। 50 ई-रिक्शा की
कामयाबी के बाद नई रिक्शा खरीदी जाएंगी।
60 लाख का प्रोजेक्ट, देने होंगे महज 10 फीसदी
साइकिल
रिक्शा चलाकों के लिए मंगाई गई ई-रिक्शा की कीमत 84 हजार रुपये की है। यह
50 रिक्शा डिस्ट्रिक इनोवेशन फंड के तहत मंगाई गई है। जिला प्रशासन ने इसके
लिए सरकार के पास मंजूरी भेजी थी। शेड व 84 हजार रुपये की प्रति रिक्शा के
हिसाब से 50 रिक्शा व अन्य खर्च मिलाकर यह प्रोजेक्ट 60 लाख रुपये बनता
है। इसका हर रिक्शा चालक को 10 प्रतिशत देना होगा वह भी किस्तों में। इसके
लिए जिला प्रशासन ने इन ई-रिक्शा का डीआरआई स्कीम के तहत लोन करा दिया है।
इसकी किश्त करीब 300 रुपये प्रति माह बनेगी। बस यही इन ई-रिक्शा वालों को
देने होंगे। जिन रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा की चाबी दी जाएगी उनका सेलेक्शन
विभाग ने पूरी प्रक्रिया के बाद किया है। इसके लिए बाकायदा विज्ञापन
निकलवाये गए थे। इसके बाद जिन्होंने आवेदन किया उन्हीं को आवंटित किए
जाएंगी।
6 घंटे में होगी चार्ज, 4 सवारियों के साथ चलेगा
यह
ई-रिक्शा 6 घंटे में चार्ज होगी। इसके बाद 90 किलोमीटर तक का सफर तय करने
के बाद यह डिस्चार्ज हो जाएगी। इस ई-रिक्शा की खास बात यह है कि केवल चार
सवारियां ही इस रिक्शा बैठ सकेंगी। चाह कर भी एक भी अधिक सवारी को ई-रिक्शा
में नहीं बिठाया जा सकेगा। यदि कोई चालक ऐसा करेगा तो ई-रिक्शा बंद हो
जाएगा। चूंकि इसमें ऑटो कट लगा है। बाकायदा इन ई-रिक्शा को 1000 किलोमीटर
चालकर देखने के बाद मंगाया गया है।
यह होगा शहरवासियों को फायदा
ई-रिक्शा
चलने से ऑटो चालकों की मनमानी बंद हो जाएगी। दरअसल ऑटो चालक जब तक ऑटो
पूरी तरह से भर नहीं जाते, चलने का नाम नहीं लेते। एक-एक ऑटो वाला 10-12
सवारियां तक ऑटो में बिठा लेते हैं। यात्रियों को समय पर पहुंचने के लिए
धक्कामुक्की के साथ इन ऑटो में सफर करना पड़ता है। ई-रिक्शा शुरू होने के
साथ ऐसा बंद हो जाएगा। चूंकि ई-रिक्शा केवल चार सीटर है। प्रदेश के दूसरे
जिलों के लिए यह प्रोजेक्ट एक उदाहरण के रूप में पेश होगा। बसों की किल्लत
झेल रहे शहरवासियों को 10-15 किलोमीटर तक के सफर के लिए बसों की प्रतीक्षा
से भी निजात मिलेगी।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा बढ़ेगी
इन
ई-रिक्शा के चलने से महिला व बाल सवारियों को सबसे अधिक फायदा होगा। दरअसल
जिन व्यक्तियों को यह ई-रिक्शा दी जाएंगी उनके बाकायदा आई कार्ड बनेंगे।
इतना ही नहीं हर ई-रिक्शा चालक की ड्रेस होगी। ऐसे में बेझिझक कोई भी महिला
यात्री व बाल यात्री इनमें सफर कर सकेगा। जब तक इन ई-रिक्शा का लोन पूरा
नहीं होगा तब तक इन्हें रात के समय निर्धारित की गई ई-रिक्शा चार्जिंग
केंद्र में खड़ा करना अनिवार्य होगा।
कर्ण स्टेडियम के बैक गेट के
पास पंडित दीनदयाल उपाध्याय रिक्शा चालक कल्याण समिति, करनाल में ई-रिक्शा
चार्जिंग केंद्र बनाया गया है। यहीं परश इन ई-रिक्शा को खड़े करने की
पर्याप्त व्यवस्था के साथ चार्जिंग प्वाइंट भी हैं। यहीं पर ई-रिक्शा चार्ज
होंगी। इसकी चार्जिंग पर जो भी खर्च होगा वह खुद यह 50 ऑटो रिक्शा चालक
मिलकर वहन करेंगी। इतना ही नहीं इस केंद्र की सुरक्षा का जिम्मा भी इन्हें
ई-रिक्शा चालकों का होगा?
खुशी इतनी की दिनभर नहीं चलाई रिक्शा
जिन
रिक्शा चालकों को यह ई-रिक्शा मिलने हैं। उनके नामों की सूची बना ली गई
है। इन रिक्शा चालकों को शुक्रवार सुबह जैसे ही पता चला कि ई-रिक्शा आ गई
हैं तो किसी ने भी दिनभर अपनी साइकिल रिक्शा नहीं चलाई। राजेंद्र,
दर्शनलाल, अशोक, अश्वनी, राकेश, विनोद कुमार, विनोद चंदेल, राजपाल,
महेंद्रपाल, जगदीश, मसजून सहानी, राजेश जयसवाल, रामपाल शुक्ला, ईश्वर सिंह
इत्यादि ने बताया कि पहले वह हर माह 300 से 600 रुपये किराये की रिक्शा के
लिए देते थे। कमाई हर दिन 250 रुपये तक हो जाती थी। लेकिन अब केवल 300
रुपये देकर अपनी गाड़ी भी हो जाएगी और सवारियां ढोने से भी बचेंगे। ई
रिक्शा पहले आओ पहल पाओ की तर्ज पर आवंटित की गई है।
शराब और बीड़ी सिगरेट भी नहीं पी सकेंगे
इन
ई-रिक्शा चालकों के लिए यह भी हिदायतें हैं कि यह किसी भी सवारी के साथ
झगड़ा नहीं करेंगे। साथ ही शराब, बीड़ी, सिगरेट नहीं पीएंगे। यदि ऐसा करते
हुए ई-रिक्शा में पाएगे तो ई-रिक्शा वापस भी ली जा सकती है, साथ ही अन्य
कार्रवाई भी तय हैं। जिला प्रशासन ने बाकायदा इनकी लिस्ट तैयार करके इनको
ट्रैफिक नियम भी बताए हैं, ताकि हादसों से भी बचा जा सके।
कोट
सीएम
सिटी में व्यक्ति-व्यक्ति का बोझ ढोये यह बड़ा अजीब सा लगाता था। इसलिए
जिला प्रशासन ने डिस्ट्रिक इनोवेशन फंड के तहत 50 ई-रिक्शा का प्रपोजल रखा
गया था। इसे मंजूरी मिल गई है। शनिवार को खुद मुख्यमंत्री ई-रिक्शा की चाबी
इनके मालिकों को देंगे। यह ई-रिक्शा चार्ज होने के बाद 90 किलोमीटर चलेगी।
84 हजार रुपये की कीमत की इस ई-रिक्शा में चार यात्री सफर कर सकेंगे।
ई-रिक्शा लेने वालों से कोई भी नकद राशि नहीं ली गई है।
सतीश कुमार, सीटीएम, करनाल।