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लिंगानुपात में पिछड़ रही कर्णनगरी, पिछले साल से दो अंक कम

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राकेश चौहान
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करनाल। कर्ण नगरी लिंगानुपात में पिछड़ती जा रही है। पिछले 10 महीने में जिले का लिंगानुपात 899 पर पहुंचा है। जो पिछले वर्ष की तुलना में दो अंक पीछे है। 2020 में अक्तूबर महीने तक जिले का लिंगानुपात 901 था। फिलहाल इस वर्ष के दो महीने शेष हैं। यदि यही हालात रहे तो लिंगानुपात में करनाल जिला अन्य जिले से बहुत ज्यादा पिछड़ जाएगा।
2020 में भी करनाल जिला प्रदेश में 18वें स्थान पर था। जनवरी से अक्तूबर तक जिले में 22507 बच्चे पैदा हुए हैं। इनमें 10655 बेटियां और 11852 बेटे शामिल हैं। जिस तरह करनाल जिला लिंगानुपात में पिछड़ता जा रहा है। ऐसे में आशंका है कि या तो जिले में कहीं भ्रूण जांच का खेल चल रहा है या गर्भवती महिलाएं अन्य जिले या प्रदेश में जाकर भ्रूण जांच करा रही हैं। संवाद
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इस वर्ष तीन पीएनडीटी के मामले आए
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सूचना मिलने पर वह भ्रूण जांच करने वालों पर छापा मारकर कार्रवाई करते हैं। 2020 में दो पीएनडीटी और दो मामले एमटीपी एक्ट के तहत दर्ज किए गए। इस वर्ष तीन मामले पीएनडीटी के तहत दर्ज कराए गए हैं।
दलाल तो नहीं हैं सक्रिय
जिले में कहीं न कहीं दलाल सक्रिय हैं। यही कारण है कि करनाल जिला पिछले दो साल से लिंगानुपात में पिछड़ता जा रहा है, क्योंकि जिले में पहले कई मामले सामने आ चुके हैं जो गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे भ्रूण की जांच करते थे। इस जांच के लिए वह 20 से 30 हजार रुपये लेते थे। कार में भी भ्रूण जांच करने वालों को स्वास्थ्य विभाग ने पकड़ा है। कई बार विभाग ने उत्तर प्रदेश में भी छापा मारकर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।
करनाल में लिंगानुपात के अब तक के हालात
वर्ष - लिंगानुपात
2010 - 834
2011 - 849
2012 - 847
2013 - 880
2014 - 886
2015 - 897
2016 - 909
2017 - 922
2018 - 934
2019 - 908
2020 - 907
जागरूकता की जरूरत
स्वास्थ्य विभाग को गर्भवती महिला के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्यों सास, ससुर, पति को भी जागरूक करना होगा। उन्हें समझाना होगा बेटा और बेटी को एक सामान समझें, क्योंकि जब महिला सहित उसके परिवार के सदस्य बेटियों के प्रति जागरूक होंगे तो यह भ्रूण जांच का खेल अपने आप बंद हो जाएगा, क्योंकि कई केस में सामने आया है कि किसी महिला को पहले से ही एक या दो बेटी होती है तो परिवार के सदस्य भ्रूण जांच के लिए दलालों से संपर्क करते हैं।
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लिंगानुपात को बेहतर करने के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। आशा वर्कर्स को निर्देश दिए हैं कि वह गर्भवती महिलाओं की मॉनिटरिंग भी करती रहें। आमजन से भी अपील है कि यदि उन्हें लिंग जांच व गर्भपात के बारे में कहीं से सूचना मिले तो इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दें। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा और उसे पुरस्कार भी दिया जाएगा।
डॉ. शीनू चौधरी, डिप्टी सीएमओ करनाल
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