करनाल में मानसून से पहले दो दिनों में रुक रुक कर हुई 8.4 एमएम बारिश ने ही प्रशासन के इंतजामों की पोल खोल दी है। प्रशासन ने पिछले साल में बिगड़े हालातों से भी कोई सबक नहीं लिया है। हालांकि मार्च में हुई निगम के हाउस की बैठक में मानसून की तैयारियों को लेकर शहर के नालों व सीवरेज की सफाई व्यवस्था को प्रमुख एजेंडों में रखा था, लेकिन निगम प्रशासन अभी तक मानसून की तैयारियों को लेकर तैयार किए गए प्लान को धरातल पर लागू नहीं कर सका है। मौसम विभाग पहले ही इस बार बारिश के सारे रिकॉर्ड तोड़ने की भविष्य वाणी कर चुका है। इसके बाद भी प्रशासन शहर में सफाई व्यवस्था के अलावा यमुना के तटों को मजबूत करने की दिशा में भी कोई कदम नहीं उठाया है। ऐसे में पिछले दो दिनों से हो रही बारिश ने ही यमुना के तटवर्ती गांवों में की परेशानियां बढ़ा दी हैं। हालांकि इस बारिश से अभी तक युमना के जलस्तर में ज्यादा इजाफा नहीं हुआ है। यदि समय रहते सुरक्षा व सफाई व्यवस्था के इंतजाम नहीं किए गए तो मानसून के सीजन में शहर का डूबना तय है।
शहर में रविवार देर रात से शुरू हुई बूंदाबांदी का सिलसिला मंगलवार को सुबह तक जारी रहा। इन दो दिनों में जिले में 8.4 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई है। जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.4 एमएम अधिक है। इस बारिश ने प्रशासन के मानसून में पानी की निकासी के इंतजामों की पोल खोल दी है। बारिश की वजह से शहर के निचले क्षेत्रों सड़कों पर जलभराव की समस्या रही है। इसका प्रमुख कारण नगर निगम व हुडा एरिया के नालों व सीवरेज की समय पर सफाई न होना रहा है। बारिश की वजह से शहर के कमेटी चौक, हांसी चौक, रेलवे रोड, सेक्टर-13, 14, 12, 6, 7 सहित अनेक कॉलोनियों में पानी जमा रहा। परेशान होकर लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों को कोसा और सफाई न करने के आरोप लगाए। यदि समय रहते नालों की सफाई होती तो पानी निकासी की समस्या सामने नहीं आती।
यमुना के तटवर्ती इलाकों के प्रशासन ने नहीं ली सुध
प्रशासन ने यमुना के तटवर्ती बाढ़ संभावित इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अभी कोई तैयारी नहीं की है। वहीं मौसम विभाग की माने तो इस बार जून के दूसरे सप्ताह में ही प्री मानसून में अच्छी बारिश होने की संभावना है, लेकिन प्रशासन द्वारा यमुना तटों की मजबूती को लेकर अभी कोई भी तैयारियां नहीं की गई हैं। यदि हालात यही रहे तो इस बार मानसून के सीजन में जिले के बाढ़ की चपेट में आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन की लापरवाही से यमुना तट के नजदीक बसे गांव जमुखाला, मुस्तफाबाद, लालूपुरा, जड़ौली, टापू, मोदीपुर, नबीपुर, बजीदपुर, नली खुर्द, खराजपुर, डबकोली, चोरपुरा आदि गांव के लोगों की रातों की नींद उड़ गई है। वर्ष 2014 में बजीदपुर गांव के पास बांध टूटने से दर्जनों गांव की फसल तबाह हो गई थी। कई गांवों का एक दूसरे संपर्क टूट गया था। लेकिन प्रशासन उन हालातों से अभी कोई सबक नहीं लिया है।
नालों में बह गया करोड़ों लीटर पानी
शहर में बरसात पानी के संरक्षण के लिए लाखों रुपये की लागत से विभिन्न कार्यालयों व हुडा क्षेत्र की पार्कों व सड़कों किनारे बने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम ठप्प होने की वजह से करोड़ों लीटर बरसाती पानी गदें नालों व सीवरेज लाइनों में बह गया, लेकिन प्रशासन को इससे जरा भी तकलीफ नहीं हुई है। अब हुडा व निगम अधिकारी मानसून सीजन से पहले शहर के नालों व सीवरेज की सफाई करवाने के दावे कर रहे हैं। लेकिन इन दावों में सच्चाई कितनी है, उसकी एक झलक इस बारिश में दिखाई दी है।
ठंडे मौसम का लिया आनंद
बारिश के बाद ठंडी हवा चली और मौसम ठंडा रहा। लोगों ने ठंडे मौसम का आनंद उठाया। परिवार के साथ पार्कों में टहलते रहे। सड़कों पर दिनभर चहल पहल रही। 42 डिग्री तापमान से शनिवार को 35 डिग्री पर आ गया है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान कम होने से मौसम ठंडा रहा। मौसम विशेषज्ञों ने आगामी 24 घंटो में मौसम साफ होने की संभावना जताई है।
हवा की स्पीड देखकर घबराए लोग
50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से आए तूफान को देखकर लोग घबरा गए। लोगों ने दुकानों के शटर डाउन कर दिए और मकानों के दरवाजे बंद करके अंदर ही दुबके रहे। मार्केट में आ रहे लोगों ने तूफान के दौरान दुकानों में जाकर बचाव किया। कमेटी चौक के पास दर्जनों मकानों के बोर्ड सड़कों पर आकर गिरे। इसके अलावा सड़कों पर पेड़ो की टहनियां गिरने से भी वाहन चालकों को आने जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ा। बारिश से पहले धूल भरी आंधी ने लोगों को परेशान किया, लेकिन बारिश के बाद मौसम में घुली ठंडक ने लोगों केा राहत दी।
बिजली रही दिनभर गुल
सुबह से मौसम खराब होने की वजह से दिनभर बिजली व्यवस्था ठप रही। साढ़े चार बजे के बाद कहीं-कहीं पर बिजली सप्लाई शुरू हो पाई। बिजली न आने के कारण मार्केट में जेनरेटरों की आवाज रही और इनवर्टर जवाब दे गए। घरों में पानी सप्लाई रुक गई। इससे लोग खूब परेशान हुए। बिजली आने के दो घंटे के बाद पानी की सप्लाई लोगों तक पहुंची। शहर के ज्यादातर इलाकों में छह से सात घंटे तक बिजली गायब रही।