संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने क्रेडिट कार्ड बिल के भुगतान के मुद्दे पर बैंक के खिलाफ दायर एक शिकायत को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि किसी ग्राहक ने अपने खाते में ऑटो डेबिट की सुविधा ली है तो खाते में पर्याप्त बैलेंस बनाए रखना बैंक की नहीं बल्कि स्वयं ग्राहक की जिम्मेदारी है।
अगोंध गांव निवासी रोबिन कुमार ने एचडीएफसी बैंक (निसिंग शाखा) के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार उनके पास बैंक का क्रेडिट कार्ड था जिसमें उनके बचत खाते से ऑटो डेबिट (स्वचालित भुगतान) की सुविधा सक्रिय थी। आरोप था कि 14 नवंबर, 2025 को उन्हें बैंक से 70 हजार 923 बकाया होने का संदेश मिला। उनका दावा था कि उनके खाते में हमेशा पर्याप्त राशि रहती थी, फिर भी बैंक ने जानबूझकर पूरे बिल के बजाय केवल न्यूनतम देय राशि (मिनिमम डयू) काटी जिससे उन पर भारी ब्याज लगा। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यदि खाते में पैसे कम थे तो बैंक को उन्हें सूचित करना चाहिए था।
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह, सदस्य नीरू अग्रवाल और सर्वजीत कौर की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने अपना बचत खाता विवरण (स्टेटमेट) पेश नहीं किया, जिससे साबित हो सके कि भुगतान की तारीख पर उनके खाते में पर्याप्त रुपये थे। इस दस्तावेज के बिना शिकायतकर्ता के दावों को विश्वसनीय नहीं माना गया।
तथ्यों की कमी
आयोग ने शिकायतकर्ता के उस तर्क को खारिज कर दिया कि खाते में कम बैलेंस होने पर बैंक को सूचना देनी चाहिए थी। आयोग ने कहा कि ऑटो डेबिट सुविधा का लाभ उठाने वाले खाताधारक का यह कर्तव्य है कि वह भुगतान के लिए पर्याप्त राशि सुनिश्चित करे। आयोग ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह शिकायत केवल बैंक को परेशान करने और पैसे ऐंठने के उद्देश्य से दायर की गई थी। शिकायत में तथ्यों और गुणों की कमी के कारण आयोग ने इस शिकायत को प्रारंभिक स्तर (इन लिमाइन) पर ही खारिज कर दिया।