देश से हर साल लगभग 4.2 मिलियन टन चावल का निर्यात होता है, लेकिन पिछले दो साल से कोरोना काल के दौरान इसमें बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन इस बार दुबई के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में लगे गल्फ फूड मेले से भारत के चावल निर्यातकों को बड़ी उम्मीद जगी है। 13 से 17 फरवरी तक चले इस मेले में इस बार एक लाख टन से अधिक के सौदे हुए हैं। खास बात यह है कि इस बार सऊदी अरब के एक ही खरीदार ने 50 हजार टन का सौदा तय करके निर्यातकों के हौसलों को उड़ान दी है।
भारतीय चावल का निर्यात यूरोपीय देशों में भी करीब चार लाख टन होता है, लेकिन वहां भारतीय किसानों द्वारा धान में किए जा रहे अंधाधुंध कीटनाशकों के प्रयोग से निर्यात में करीब 60 प्रतिशत की कमी आई है। चावल निर्यातकों ने बताया कि इस निर्यात को दोबारा पटरी पर लाने और यूरोपीय देशों में भारतीय चावल की साख को दोबारा स्थापित करने के लिए किसानों को भी लगातार जागरूक किया जा रहा है। उनसे जहरीले कीटनाशकों, खरपतवार नाशकों का प्रयोग कम करने को कहा जा रहा है। चावल को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पादित करना होगा।
इस बार दुबई के गल्फ फूड मेले से भारतीय बासमती निर्यातकों को बड़ी उम्मीद है। मेले में भारतीय चावल निर्यातकों को विभिन्न देशों से करीब एक लाख टन से अधिक के ऑर्डर मिले हैं, इनमें कई बड़े सौदों की तो एडवांस बुकिंग भी हुई है। सऊदी अरब के एक ही खरीदार ने 50 हजार टन बासमती चावल का आर्डर दिया है, जिससे इस बार चावल निर्यातकों का उत्साह दोगुना हो गया है। इसका फायदा कहीं न कहीं किसानों को भी मिलेगा, क्योंकि बासमती की मांग बढ़ेगी तो उन्हें बेहतर भाव भी मिलेगा। -सतीश गोयल, उपाध्यक्ष ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्ट एसोसिएशन।