सावधान! भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। यदि पानी बचाने के लिए सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आनी वाली पीढ़ी को बूंद-बूंद के लिए तरसना पड़ेगा। पिछले करीब 21 वर्षों में करनाल का भूजल स्तर गिरकर करीब 12.86 मीटर यानी 38.58 फीट नीचे चला गया है। सिंचाई विभाग के भूजल सेल के आंकड़ों के अनुसार जिले की जल तालिका 2000 में 8.57 मीटर थी (यानी कि 8.57 मीटर पर पानी मिल जाता था) जोकि 2011 में घटकर 15.79 मीटर,2020 में 20.99 मीटर और वर्तमान में, वर्ष 2021 में 21.81 मीटर पर पहुंच चुका है।
विभाग अधिकारियों के अनुसार 1999 के बाद जब सबमर्सिबल ट्यूबवेल या पंप लगने शुरू हुए उसके बाद भूजल स्तर में तेजी से गिरावट आनी शुरू हुई। यदि ऐसे ही चलता रहा तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थिति भयावह हो सकती है। इंद्री ब्लॉक को छोड़कर जिले के सात ब्लॉक अति-शोषित श्रेणी में आते हैं। संवाद
अवैध रूप से चल रहे आरओ ट्रीटमेंट प्लांट
जिले में काफी संख्या में अनाधिकृत आरओ जल उपचार संयंत्र और सर्विस स्टेशन चल रहे हैं। आरओ ट्रीटमेंट वाटर प्लांट लोगों को महंगे दामों में बोतल बंद पानी की आपूर्ति करते हैं। नियम के अनुसार कोई भी व्यक्ति पानी का कॉमर्शियल इस्तेेमाल नहीं कर सकता।
प्रतिष्ठानों के पास नहीं अनुमति
बताया जाता है कि जिले में हजारों अनाधिृत बोरवेल हैं। बड़े-बड़े प्रतिष्ठानों, जिसमें प्राइवेट स्कूल, अस्पताल और होटल आदि ने भी अधिसूचित क्षेत्रों में भूजल के निष्कर्षण की अनुमति नहीं ली है।
ऐसे घटा भूजल स्तर
करनाल ब्लॉक का वाटर टेबल 2000 में 9.11 मीटर था जो कि 2021 में 18.9 मीटर नीचे चला गया। कुंजपुरा ब्लॉक में 2011 में 10.77 मीटर से 2021 में 12.51 मीटर तक पहुंच गया। इंद्री ब्लॉक में 2000 में 7.25 मीटर से 2021 में 13.74, मूनक ब्लॉक में 2011 में 14.78 से 2021 में 21.10, घरौंडा में 2000 में 10.49 मीटर से 2021 में 23.35, असंध में 2000 में 7.94 से 2021 में 27.75, नीलोखेड़ी में 2000 में 8.74 से 26.54 मीटर पहुंच चुका है। वहीं, निसिंग ब्लॉक में 2000 में 7.87 से 2021 में 28.37 मीटर तक पानी पहुंच गया है।
वर्जन- फोटो-60
प्रदेश सरकार द्वारा जल संरक्षण, प्रबंधन और रेगुलेट करने के लिए हरियाणा जल संशाधन प्राधिकरण की स्थापना की गई है। जिले में जिला प्लानिंग रिसोर्स कमेटी भी बनी है। हरियाणा जल संशाधन प्राधिकरण की चेयरपर्सन केसनी आनंद अरोड़ा व सीईओ डॉ. एसएस कादियान के मार्गदर्शन में जल बचाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। भूजल का इस्तेमाल व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता है। लोगों से अपील की गई है कि वह पानी बर्बाद न करें और भविष्य की पीढ़ी के लिए इसे बचाएं। जिन व्यावसायिक संस्थानों ने भूजल दोहन की अनुमति नहीं ली है, वे जल्द ले लें अन्यथा प्रवर्तन कमेटी कार्रवाई करेगी।
- डा. महावीर सिंह, तकनीकीअधिकारी भूमिगत जल