फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सड़कें मॉडल बनानी तो दूर सफेद पट्टी भी नहीं लगा पाए अधिकारी

विज्ञापन
विज्ञापन
गगन तलवार
विज्ञापन

करनाल। सड़क हादसों में कमी लाने के लिए प्रदेश सरकार ने सड़कों से जुड़े सभी विभागों के अधिकारियों को खराब सड़कों की हालत सुधारने के निर्देश दिए थे। इसी सदंर्भ में करनाल में डीसी निशांत यादव ने सभी अधिकारियों को सितंबर माह में एक-एक सड़क मॉडल बनाने के निर्देश दिए थे। लेकिन दो माह से अधिक समय बीत चुका है, अधिकारी सड़कों को मॉडल बनाना तो दूर, रोड मार्किंग भी नहीं करा पाए। मानसून की बरसात के बाद से सड़कों की सफेद पट्टी गायब हैं। सबसे ज्यादा खराब हालत नेशनल हाईवे-44 और ग्रामीण मार्गों की सड़कों के हैं।
अब धुंध का सीजन भी शुरू हो चुका है। ऐसे में अधिकारियों की लापरवाही इन सड़कों से गुजरने वाले वाहन चालकों पर भारी पड़ सकती है, क्योंकि धुंध के मौसम में दिन में भी लोग दृश्यता कम होने पर सफेद पट्टी के सहारे ही वाहन चलाते हैं, ताकि वे सुरक्षित सफर कर सकें। लेकिन यहां सड़कों से सफेद पट्टी ही चार माह से गायब है। कई सड़कों पर गड्ढे भी बने हैं, इन खामियों के कारण लोग अभी भी हादसों का शिकार हो रहे हैं। जिले में विभिन्न विभागों की ओर से सात सड़कों को मॉडल रोड बनाया जाना था। जबकि सभी नगर पालिकाओं को भी अपने-अपने क्षेत्र में एक मॉडल रोड भी तैयार करनी हैं।
विज्ञापन

70 किमी का हाईवे, कई जगह हालत खराब
नेशनल हाईवे पर कुरुक्षेत्र सीमा से लेकर पानीपत तक 70 किलोमीटर में सर्विस लाइन पर कुछ जगहों को छोड़कर कहीं भी सफेद पट्टी नहीं है। इसके अलावा एलिवेटेड हाईवे पर भी कई जगहों से रोड मार्किंग गायब है। दिल्ली से अमृतसर तक जाने के लिए 24 घंटे में 80 हजार से ज्यादा वाहन इस हाईवे से गुजरते हैं। रोजाना औसतन दो हादसे होते हैं, फिर भी एनएचएआई लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंतित नहीं है।
380 में से अधिकतर ग्रामीण सड़कों से पट्टी गायब
मार्केटिंग बोर्ड के अधीन 380 ग्रामीण सड़कें हैं। अधिकतर सड़कों पर सफेद पट्टी नहीं है। यहां से करीब 50 हजार से ज्यादा वाहन रोजाना गुजरते हैं। ये सड़कें छोटे-छोटे गांवों को शहर और मुख्य सड़कों से जोड़ती हैं। बरास-निसिंग रोड, निसिंग से गोंदर रोड, बरास से सीतामाई, सांभली से करनाल-ढांड रोड, मूनक रोड, बाल-पबाना रोड, करनाल-ढांड रोड, सांभली से सिंगड़ा रोड, करनाल-कैथल रोड से कुचपुरा रोड, बड़ागांव रोड, काछवा रोड, इंद्री रोड, लाडवा रोड, गोंदर रोड, बरास से बसतली रोड और बरास से अमूपुर रोड सहित अन्य सड़कों पर पट्टी नहीं हैं।
पांच साल में 2737 हादसों में गई 1433 जान
जिले में 2017 से अब तक कुल 2737 सड़क हादसे हुए। इनमें 1433 लोगों की जान गई और 2083 लोग घायल हुए। इस वर्ष की ही बात करें तो 604 हादसों में 341 लोगों की अक्तूबर तक मौत हो चुकी है। रोड सेफ्टी विशेषज्ञों के अनुसार पिछले पांच साल में इनमें 378 मौत और 700 से ज्यादा लोग नेशनल हाईवे पर घायल हुए हैं।
इस विभाग ने यहां बनानी है मॉडल रोड
- एनएचएआई : मधुबन पुलिस कॉंप्लेक्स से लिबर्टी चौक तक।
- पीडब्ल्यूडी-1 : कैथल रोड पर चिढ़ाव मोड़ से मंजूरा तक।
- पीडब्ल्यूडी-2 : कुरलन से बाल पबाना तक।
- नगर निगम : नूर महल चौक से सेक्टर-12 मटका चौक और हरियाणा नर्सिंग होम से सांईं बाबा मंदिर तक।
- एचएसवीपी : नूरमहल से सेक्टर-32-33 डिवाइडिंग रोड फूसगढ़ तक।
- एचएसएएमबी : ओंगद से गोंदर तक।
- एचएसआईआईडीसी : एनएच-44 से सेक्टर-3 बजीदा रोड तक।
इसलिए जरूरी सफेद पट्टी
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ एडवोकेट संदीप राणा व तेजपाल का कहना है कि सड़कों पर रोड मार्किंग होना बेहद जरूरी है। धुंध के सीजन में दृश्यता शून्य हो जाती है। ऐसे में सफेद पट्टी और रिफ्लेक्टिव कैटआइज ही चालक को रास्ता दिखाने में मददगार होती हैं। उनका कहना है कि सफेद पट्टी से 10 मीटर तक का रास्ता साफ दिखाई देता है।
विज्ञापन

सड़कों पर सफेद पट्टी लगवाने के लिए सभी संबंधित विभागों को पहले ही निर्देश जारी किए जा चुके हैं। अब तक पट्टी क्यों नहीं लगी, इसको लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा।
- निशांत कुमार यादव, डीसी करनाल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें