मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने कहा कि हरियाणा में गन्ने का दाम पंजाब से ज्यादा है। पंजाब में चुनाव आ रहे हैं, इसलिए पंजाब में गन्ने का भाव वहां की सरकार की मजबूरी थी। इसके बावजूद अब भी वहां गन्ने का दाम हरियाणा से कम ही है। यदि पंजाब सरकार गन्ने का दाम फिर से बढ़ाती है तो मुकाबला चलेगा। हरियाणा सरकार पीछे नहीं हटेगी और पंजाब से अधिक ही दाम रखे जाएंगे। मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने सोमवार को करनाल के मेरठ रोड स्थित सहकारी चीनी मिल के पेराई सत्र के उद्घाटन समारोह में उपस्थित किसानों को यह बात कही।
मुख्यमंत्री ने जब यह बात कही तो पांडाल में उपस्थित किसानों में भी जोश भर गया। पंजाब के साथ गन्ने के दाम में मुकाबले की बात सुनकर किसान लोट-पोट हो गए और उन्होंने मुख्यमंत्री के पक्ष में जोरदार नारे लगाए तो पांडाल गूंज उठा। हरियाणा में गन्ने का भाव 362 रुपये प्रति क्विंटल है। जो देश में अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक है। कुछ समय पहले हरियाणा सरकार ने गन्ने का भाव बढ़ाया था। पंजाब में भी दाम बढ़ाए गए थे। वहीं मुख्यमंत्री ने मनोहरलाल ने फिर पंजाब सरकार पर पलटवार किया है और गन्ने के दाम के मामले में चित कर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव में जमीन की अदला-बदली करने पर सरकार ने स्टांप ड्यूटी खत्म कर दी है। यदि गांव में जमीन के टुकड़े अलग-अलग जगहों पर हैं और दो किसान रजामंदी से अपनी-अपनी जमीन की अदला-बदली करना चाहते हैं तो उनसे राजस्व नहीं लिया जाएगा।
शाहबाद के विधायक एवं हरियाणा राज्य चीनी मिल प्रसंघ के अध्यक्ष रामकरण ने मुख्यमंत्री से अपील की कि हरियाणा के किसानों का उत्तरप्रदेश की चीनी मिलों में फंसा भुगतान निकलवाया जाए। उन्होंने कहा कि काफी किसानों का पैसा यूपी की मिलों में फंसा हुआ है और उसका भुगतान नहीं हो रहा। इस पर मुख्यमंत्री ने संज्ञान लिया और भरोसा दिलाया कि भुगतान करवाने का पूरा प्रयत्न करेंगे। उन्होंने उपायुक्तों से उन किसानों की सूची तैयार करने को कहा जिनका भुगतान यूपी की मिलों में रुका हुआ है। सीएम ने कहा कि अब हरियाणा केे किसानों को यूपी में गन्ना नहीं भेजना पड़ेगा। पूरे गन्ने की यहीं पर पेराई होगी। सांसद संजय भाटिया ने भी किसानों को आश्वस्त किया कि गन्ना भुगतान की चिंता न करें। उनका भुगतान निकलवाने की पूरी कोशिश करेंगे। यूपी की मिलों के प्रबंधकों से शीघ्र बात करेंगे।