करनाल लोकसभा क्षेत्र में ही बाबर-लोदी, अकबर-हेमू और अब्दाली-मराठों के युद्ध का गवाह पानीपत है। सम्राट पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गोरी की जंग का मैदान तराइन भी यहां से दूर नहीं है। दानवीर कर्ण की नगरी में कई यादगार चुनावी मुकाबले हुए हैं, जिनमें बड़े-बड़े महारथियों को हार का मुंह देखना पड़ा। भाजपा की दिग्गज सुषमा स्वराज कांग्रेस के चिरंजी लाल शर्मा से लगातार तीन बार 1980, 1984 और 1989 में हारीं। पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल एक ही बार लड़े मगर जीत नहीं पाए।
चिरंजी लाल रहे सबसे लंबे समय तक सांसद
यहां मतदाताओं की पसंद पहले ब्राह्मण प्रत्याशी रहे हैं। हालांकि पिछले दो चुनाव से पंजाबी जीत रहे हैं। सबसे लंबा कार्यकाल कांग्रेस के चिरंजी लाल शर्मा का रहा। वह 1980, 1894, 1989 और 1991 में जीते। कांग्रेस के ही माधो राम शर्मा 1967 व 1971 में, अरविंद शर्मा 2004 और 2009 में जीते। अरविंद अब भाजपा में हैं। उपचुनाव मिलाकर यहां 18 चुनाव हुए हैं। इनमें 11 बार कांग्रेस जीती और 4 बार भाजपा।
मनोहर को मोदी, कांग्रेस को नाराजगी से उम्मीद
मनोहर लाल को मोदी के नाम, संगठन और खुद की सरकार के कार्यों से वोटों की आस है। पीएम मोदी, जेपी नड्डा व अमित शाह रैली कर उनके लिए वोट की अपील कर चुके हैं। वहीं, कांग्रेस को सरकार के खिलाफ नाराजगी से ताकत मिल रही है। खासकर गांवों में भाजपा नेताओं को घुसने तक नहीं दिया जा रहा और उनका खुला विरोध हो रहा है। हालांकि, समीकरणों को देखे हैं तो बुद्धिराजा पर मनोहर लाल भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। बुद्धिराजा यहां के लिए बाहरी हैं। वहीं, कांग्रेसी भितरघात कर रहे हैं। दूसरी तरफ, मनोहर लाल से नाराज लोगों को मौजूदा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी साध रहे हैं।