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सम्मान: राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए पांच शिक्षा रत्न चयनित, बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए किया काम

Sun, 05 Sep 2021 03:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, करनाल (हरियाणा)

सार

करनाल में एक स्कूल ऐसा भी है, जहां पांच साल पहले अपने बच्चों को कोई पढ़ाना तो दूर देखना भी पसंद नहीं करता था। आज अब इंद्री खंड के नन्हेड़ा गांव की राजकीय प्राथमिक पाठशाला की स्थिति ऐसी है कि छुट्टी के बाद भी बच्चे घर नहीं जाते और दिन ढलने पर गांव के लोग भी यही पहुंचकर अपनी शाम को खुशनुमा बनाते हैं। पाठशाला को जनवरी 2017 में जिले की नंबर-1 पाठशाला का खिताब भी मिल चुका है।
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करनाल में आयोजित समारोह में मौजूद लोग। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शिक्षक दिवस पर राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित पांच शिक्षा रत्नों को अमर उजाला ने भी सम्मानित किया। करीब पांच साल के लंबे इंतजार के बाद जिले की झोली में इस बार ये पुरस्कार आ रहे हैं।

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सियाराम शास्त्री, टीजीटी संस्कृत, राजकीय माध्यमिक विद्यालय घीसरपुरी
उपलब्धि : सन 2000 में नियमित संस्कृत शिक्षक के रूप में नियुक्ति हुई। कई सालों से स्काउट एंड गाइड, कानूनी साक्षरता, सांस्कृतिक गतिविधियां, भाखड़ा बांध मैनेजमेंट बोर्ड और रेडक्रास के जिला समन्वयक हैं। जिले का नाम प्रदेश स्तर पर चमकाया। अब इनका लक्ष्य ड्राप आउट बच्चों को स्कूल लाने के लिए कार्य करना है।


अनिल कुमार, जेबीटी, राजकीय उच्च विद्यालय अर्बन अस्टेट सेक्टर-13
उपलब्धि : सन 2000 में नियुक्ति हुई। 2013 से करनाल से कार्यरत हैं। प्राइमरी खेलों में तीन साल तक इनकी टीमें प्रदेश में प्रथम रही। सर्व शिक्षा अभियान के टीचर लर्निंग मैटिरियल प्रतियोगिता में भी तीन साल पुरस्कार जीते। 2017 से स्काउट में कब बुलबुल के जिला संगठन आयुक्त हैं। 2018 में स्तरीय गवर्नर अवार्ड मिला।
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गायित्री देवी, टीजीटी संस्कृत, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल तरावड़ी
उपलब्धि : 2005 से तरावड़ी के स्कूल में कार्यरत हैं। 2015 तक 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों को पढ़ाने का मौका भी मिला। हर बार परीक्षा परिणाम शानदार रहा। गीता जयंती और प्रदेश स्तरीय कानूनी साक्षरता पर आने वाले कार्यक्रम में इनकी टीमों ने पुरस्कार जीते हैं।

नरेंद्र मान, जेबीटी, राजकीय प्राथमिक स्कूल टपराना
उपलब्धि : 2000 में नियुक्ति हुई, खेलों में हर साल जिला टीम लेकर प्रदेश में गए हैं और पुरस्कार भी जीते। 2017 तक करनाल के मॉडल टाउन स्कूल कार्यरत थे, उस समय सुंदरता में स्कूल प्रथम आया था। 2018में उसके बाद टपराना स्कूल आ गए, फिर ये स्कूल भी स्वच्छता में प्रथम आया।

डॉ. राधेश्याम, हिंदी टीचर, राजकीय उच्च विद्यालय नगला मेघा
उपलब्धि : इन्होंने ग्राम पंचायत और स्टाफ के साथ मिलकर स्कूल को सुंदर बनाया। पहले स्कूल बदहाल था। बच्चों को लॉकडाउन में भी अतिरिक्त कक्षाएं लेकर पढ़ाया। पीएचडी होने के नाते अब तक तीन किताबें भी लिख चुके हैं। इनमें से दो किताबें लघु कथाएं और एक बच्चों की कहानियों पर आधारित है।

एक प्रयास बना बुनियाद बदलाव का...

कानों से सुनी एक छोटी सी घटना भी समाज में बदलाव की बुनियाद बन सकती है। कब, कैसे, क्या हो जाए? ये सब बातें फिर पलक झपकने सी लगती है। घर से शुरू हुए एक अनजाने प्रयास कब किसी के जीवन में बदलाव ला दे, इसका कुछ पता नहीं चलता। एक प्रयास से किसी के जीवन के में बदलाव लाने में जुटी तीन शख्सियतों को भी अमर उजाला ने सम्मानित किया।

डेंटिस्ट बेटी कीर्ति गुप्ता
नौकर की बेटी को पढ़ाने के बाद डेंटिस्ट कीर्ति गुप्ता ने जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को अक्षर ज्ञान देना शुरू कर दिया। सात बच्चों से शुरू हुई पुकार वक्त की.. संस्था की कक्षा में आज 130 से ज्यादा बच्चे निशुल्क पढ़ाई करते हैं। 7 फरवरी 2014 से चल रही संस्था की शिक्षा क्लास में 75 टीचर निशुल्क सहयोग कर रहे हैं और अब तक 62 बच्चों का सीबीएसई स्कूलों में दाखिला कराया जा चुका है।

निफा की केयर क्लास के लिए चेयरमैन प्रीतपाल सिंह पन्नू
शिक्षा की अलख जगाने के लिए निफा 10 सालों से स्लम एरिया में एजूकेशन केयर क्लास चला रही है। अब तक सैकड़ों बच्चे अक्षर ज्ञान लेकर स्कूल तक पहुंचे हैं। सेक्टर-32 की झुग्गियों में लगने वाली इस कक्षा में पढ़ाई के साथ साथ बच्चों को अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं।

तन्नू नंदा, आर्ट टीचर
निर्मल कुटिया में जरूरतमंद बच्चों के लिए लगने वाली निशुल्क कक्षाओं में कई सालों से शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रही हैं। इसके अलावा पिछले दो साल से बाल भवन करनाल की ओर से होने वाली विभिन्न गतिविधियों में निर्णायक मंडल में भी शामिल हैं। पहले लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, विवेकानंद सीनियर सेकेंडरी स्कूल और विभिन्न संस्थाओं से बेस्ट टीचर अवार्ड भी प्राप्त कर चुकी हैं।

मेहनत कर हटाया बदहाली का दाग, अब स्कूल है मॉडर्न..
जिले में एक स्कूल ऐसा भी है, जहां पांच साल पहले अपने बच्चों को कोई पढ़ाना तो दूर देखना भी पसंद नहीं करता था। आज उस स्कूल की स्थिति ऐसी है कि छुट्टी के बाद भी बच्चे घर नहीं जाते और दिन ढलने पर गांव के लोग भी यही पहुंचकर अपनी शाम को खुशनुमा बनाते हैं। बात हो रही है इंद्री खंड के नन्हेड़ा गांव की राजकीय प्राथमिक पाठशाला की, जिसे जनवरी 2017 में जिले की नंबर-1 पाठशाला का खिताब भी मिल चुका है। इसके पीछे तीन शिक्षक इंचार्ज महेंद्र कुमार, उधम सिंह और सुनील की कड़ी मेहनत है। जिन्होंने ना केवल स्कूल के रंग रूप को बदला, बल्कि किचन और टॉयलेट को अपने वेतन से मॉडर्न बनाया। वहीं कक्षा में विद्यार्थियों को घर जैसा माहौल और सुविधाएं दी। इसके अलावा खाली मैदान को सुंदर पार्क में तब्दील करते हुए यहां झूले और ओपन एयर जिम भी लगा डाला।
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दो राजकीय स्कूलों ने नए विद्यार्थी लाने में बनाए रिकॉर्ड

समय के साथ साथ राजकीय स्कूलों का स्तर भी बढ़ा है। पिछले तीन सालों में शिक्षा स्तर के साथ साथ छात्रों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। दो स्कूलों ने इस मामले में अलग अलग ढंग से रिकार्ड बनाया है। जिन्हें अमर उजाला की ओर से सम्मानित किया गया।

- राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल मॉडल टाउन में जिले में सर्वाधिक 397 नए विद्यार्थियों ने इस साल दाखिला लिया है। इसी साल स्कूल को मॉडल संस्कृति का दर्जा भी मिला है। प्रिंसिपल सुनील ने सम्मान हासिल किया।

- राजकीय प्राथमिक पाठशाला भूसली ने छात्र संख्या बढ़ाने में अलग ही रिकॉर्ड बनाया। पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी स्कूल ने एक ही बार में 115 प्रतिशत तक छात्र संख्या में बढ़ोतरी की हो, पिछले साल इस स्कूल की छात्र संख्या 43 थी, अब बढ़कर 111 हो गई। मुख्य अध्यापक राजेश कुमार को सम्मानित किया गया।
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