कानों से सुनी एक छोटी सी घटना भी समाज में बदलाव की बुनियाद बन सकती है। कब, कैसे, क्या हो जाए? ये सब बातें फिर पलक झपकने सी लगती है। घर से शुरू हुए एक अनजाने प्रयास कब किसी के जीवन में बदलाव ला दे, इसका कुछ पता नहीं चलता। एक प्रयास से किसी के जीवन के में बदलाव लाने में जुटी तीन शख्सियतों को भी अमर उजाला ने सम्मानित किया।
डेंटिस्ट बेटी कीर्ति गुप्ता
नौकर की बेटी को पढ़ाने के बाद डेंटिस्ट कीर्ति गुप्ता ने जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को अक्षर ज्ञान देना शुरू कर दिया। सात बच्चों से शुरू हुई पुकार वक्त की.. संस्था की कक्षा में आज 130 से ज्यादा बच्चे निशुल्क पढ़ाई करते हैं। 7 फरवरी 2014 से चल रही संस्था की शिक्षा क्लास में 75 टीचर निशुल्क सहयोग कर रहे हैं और अब तक 62 बच्चों का सीबीएसई स्कूलों में दाखिला कराया जा चुका है।
निफा की केयर क्लास के लिए चेयरमैन प्रीतपाल सिंह पन्नू
शिक्षा की अलख जगाने के लिए निफा 10 सालों से स्लम एरिया में एजूकेशन केयर क्लास चला रही है। अब तक सैकड़ों बच्चे अक्षर ज्ञान लेकर स्कूल तक पहुंचे हैं। सेक्टर-32 की झुग्गियों में लगने वाली इस कक्षा में पढ़ाई के साथ साथ बच्चों को अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं।
तन्नू नंदा, आर्ट टीचर
निर्मल कुटिया में जरूरतमंद बच्चों के लिए लगने वाली निशुल्क कक्षाओं में कई सालों से शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रही हैं। इसके अलावा पिछले दो साल से बाल भवन करनाल की ओर से होने वाली विभिन्न गतिविधियों में निर्णायक मंडल में भी शामिल हैं। पहले लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, विवेकानंद सीनियर सेकेंडरी स्कूल और विभिन्न संस्थाओं से बेस्ट टीचर अवार्ड भी प्राप्त कर चुकी हैं।
मेहनत कर हटाया बदहाली का दाग, अब स्कूल है मॉडर्न..
जिले में एक स्कूल ऐसा भी है, जहां पांच साल पहले अपने बच्चों को कोई पढ़ाना तो दूर देखना भी पसंद नहीं करता था। आज उस स्कूल की स्थिति ऐसी है कि छुट्टी के बाद भी बच्चे घर नहीं जाते और दिन ढलने पर गांव के लोग भी यही पहुंचकर अपनी शाम को खुशनुमा बनाते हैं। बात हो रही है इंद्री खंड के नन्हेड़ा गांव की राजकीय प्राथमिक पाठशाला की, जिसे जनवरी 2017 में जिले की नंबर-1 पाठशाला का खिताब भी मिल चुका है। इसके पीछे तीन शिक्षक इंचार्ज महेंद्र कुमार, उधम सिंह और सुनील की कड़ी मेहनत है। जिन्होंने ना केवल स्कूल के रंग रूप को बदला, बल्कि किचन और टॉयलेट को अपने वेतन से मॉडर्न बनाया। वहीं कक्षा में विद्यार्थियों को घर जैसा माहौल और सुविधाएं दी। इसके अलावा खाली मैदान को सुंदर पार्क में तब्दील करते हुए यहां झूले और ओपन एयर जिम भी लगा डाला।
समय के साथ साथ राजकीय स्कूलों का स्तर भी बढ़ा है। पिछले तीन सालों में शिक्षा स्तर के साथ साथ छात्रों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। दो स्कूलों ने इस मामले में अलग अलग ढंग से रिकार्ड बनाया है। जिन्हें अमर उजाला की ओर से सम्मानित किया गया।
- राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल मॉडल टाउन में जिले में सर्वाधिक 397 नए विद्यार्थियों ने इस साल दाखिला लिया है। इसी साल स्कूल को मॉडल संस्कृति का दर्जा भी मिला है। प्रिंसिपल सुनील ने सम्मान हासिल किया।
- राजकीय प्राथमिक पाठशाला भूसली ने छात्र संख्या बढ़ाने में अलग ही रिकॉर्ड बनाया। पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी स्कूल ने एक ही बार में 115 प्रतिशत तक छात्र संख्या में बढ़ोतरी की हो, पिछले साल इस स्कूल की छात्र संख्या 43 थी, अब बढ़कर 111 हो गई। मुख्य अध्यापक राजेश कुमार को सम्मानित किया गया।