माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल ने देश के किसानों के लिए गेहूं की तीन नई किस्में तैयार की हैं, जो उत्पादन के साथ गुणवत्ता में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएंगी। इन तीनों किस्मों को 22 सितंबर को केंद्रीय किस्म विमोचन समिति के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद ये किस्में किसानों के लिए उपलब्ध होंगी। यह जानकारी बुधवार को भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) के निदेशक डा. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने दी।
निदेशक डा. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष 16 अक्तूबर को प्रधानमंत्री मोदी ने अधिक पोषण वाली किस्मों के आधार पर पांच गेहूं की किस्मों सहित जिन 17 नई किस्मों को जारी किया था, उनमें आईआईडब्ल्यूबीआर करनाल द्वारा तैयार की गई किस्म डीबीडब्ल्यू 303 भी शामिल थी। इस किस्म को जनवरी 2021 को जारी किया गया था। अब यह किस्म देश में दूसरे पायदान पर है। खास बात यह भी है कि जो किस्म देश में पहले पायदान पर है, वह भी करनाल अनुसंधान केंद्र द्वारा तैयार गेहूं की किस्म डीबीडब्ल्यू 187 ही है।
चपाती के लिए सर्वोत्तम किस्म
निदेशक ने बताया कि अब डीबीडब्ल्यू 303 को अगेती किस्म की बिजाई के लिए हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड के तराई क्षेत्र के साथ साथ जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों के लिए भी जारी कर दिया गया है। यहां किसान इसकी बिजाई 25 अक्तूबर से कर सकते हैं। यह चपाती के लिए सर्वोत्तम किस्म है, जिसमें प्रोटीन 12 पीपीएम, जिंक 42 पीपीएम व आयरन 43 पीपीएम है। यह किस्म कुपोषण को खत्म करने में बेहद सहायक है। डीबीडब्ल्यू-303 की पैदावार 81.2 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तो डीबीडब्ल्यू-187 का उत्पादन 76.7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। पिछले छह साल से भारत में गेहूं का रिकार्ड उत्पादन हुआ है, अब गुणवत्ता की ओर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
डीबीडब्ल्यू-327, डीबीडब्ल्यू-332 व डीबीडब्ल्यू-296 हैं तीन किस्में
प्रमुख अन्वेषक (फसल सुधार) डा. ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि अब जो गेहूं की तीन नई किस्में अनुसंधान केंद्र द्वारा तैयार की गई हैं, उनमें डीबीडब्ल्यू-327, डीबीडब्ल्यू-332 व डीबीडब्ल्यू-296 शामिल हैं। इनमें 327 व 332 की अनुमानित उत्पादन क्षमता 79 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो सकती हैं। अगेती किस्मों की पंजाब आदि राज्यों में भारी मांग थी। हालांकि यह किस्में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड व जम्मू कश्मीर के लिए क्रांतिकारी साबित होगी। डीबीडब्ल्यू-296 कम पानी में पैदा होने वाली 50 से 52 क्विंटल प्रति हेक्टेयर अनुमानित पैदावार वाली किस्म है। इन्हें केंद्रीय किस्म विमोचन समिति से अनुमोदन मिलने के बाद इसी साल किसानों को उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। मैदानी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। मौके पर संस्थान के पीआरओ राजिंद्र शर्मा भी मौजूद रहे।