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पोर्टल का सर्वर डाउन होने से नहीं बने गेट पास, छह घंटे किसान परेशान

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नई अनाज मंडी में शनिवार की सुबह पोर्टल का सर्वर फेल होने से किसान परेशान रहे। अनाज की ट्रालियां भरकर लाए किसान गेट पास के लिए इधर-उधर भटकते रहे। छह घंटे तक ट्राली का कांटा करने और गेट पास बनाने को लेकर किसानों और कर्मचारियों में खींचतान चलती रही। इस दौरान जीटी रोड स्थित प्रवेश द्वार और बजीदा रोड स्थित प्रवेश द्वार पर ट्रैक्टर-ट्रालियों का जमावड़ा लग गया। किसानों ने कहा कि बिना गेट पास के आढ़ती की दुकान पर उनकी ढेरी की बिक्री नहीं होगी। सूचना पर पहुंचे थाना सिटी एसएचओ संदीप किसानों को शांत कराने में जुटे रहे। आखिरकार मार्केट कमेटी सचिव सुंदर सिंह कांबोज मौके पर पहुंचे और रजिस्टर में किसान का विवरण दर्ज करवाकर ट्रालियाें को मंडी में ले जाने के लिए कहा।
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सर्वर डाउन होने के कारण कर्मचारियों ने किसानों से उनका आधार कार्ड नंबर, मोबाइल फोन नंबर लेते हुए ट्राली का वजन किया और बताया कि पोर्टल पर चढ़ने के बाद उनको गेट पास के लिए सूचित कर दिया जाएगा। किसानों को चिंता रही कि बिना गेट पास उनकी धान कैसे बिकेगी। किसानों का कहना है कि अनाज मंडी में आए दिन कोई ना कोई समस्या खड़ी हो जाती है, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है। उनका कहना है कि पहले आढ़तियों और राइस मिलर्स की हड़ताल से किसान परेशान रहे, फिर मजदूरों की हड़ताल किसानों पर भारी पड़ी।
सुबह सात बजे धान की दो ट्राली लेकर मंडी आए। कांटे पर कर्मचारी ने सर्वर डाउन होने की बात कहकर आठ बजे आने की बात कही। तब भी उन्हें गेट पास नहीं दिया। बिना गेट पास धान नहीं बिकेगी इसलिए कई घंटे भटकना पड़ा।
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--- किसान रामस्वरूप, गांव कलवेहड़ी।
पोर्टल पर पंजीकरण के हिसाब से मोबाइल फोन पर मैसेज वाले किसानों को आने के लिए कहा जा रहा है। मंडी आए तो यहां पोर्टल बंद होने के कारण धान की ट्राली कई घंटे गेट पर खड़ी करनी पड़ी। कर्मचारियों के पास दूसरा विकल्प नहीं था। परेशानी किसानों को हुई।
--- किसान कुलदीप सिंह, पक्का खेड़ा।
मंडी में समय से धान की खरीद शुरू नहीं हुई। ऊपर से कभी लेबर की समस्या तो कभी पोर्टल की समस्या से किसानों का नुकसान हो रहा है। फसल कटाई का काम तेज है। यदि पांच-छह घंटे मंडी में गेट पर ही जाया जाएंगे तो काम कैसे निपटाएंगे।
--- किसान रक्षपाल।
किसान को बेवजह परेशान किया जा रहा है। जब पोर्टल काम नहीं करता तो रजिस्टर का विकल्प साथ होना चाहिये। पहले से व्यवस्थाएं क्यों नहीं की जाती। मैसेज आने पर ट्राली मंडी में लाए तो यहां पोर्टल काम नहीं कर रहा होता।
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--- किसान अमरनाथ।
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