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24 घंटे बाद भी मंगलौरा चौकी पुलिस ने नहीं की कार्रवाई तो एसपी ने लिया संज्ञान

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करनाल/मधुबन। मेरठ रोड पर नगला चौक के समीप सचदेवा फायर वर्क्स पटाखा फैक्टरी में हुए धमाके के 24 घंटे बीतने के बाद भी पुलिस द्वारा मामले में कार्रवाई नहीं की गई। मंगलौरा चौकी पुलिस परिजनों व पीड़ित की शिकायत आने का इंतजार कर रही है। हद तो यह है कि पुलिस को अभी तक यह भी नहीं मालूम कि फैक्टरी का संचालक कौन है। ऐसे में मंगलौरा चौकी पुलिस की धीमी कार्रवाई को देखते हुए एसपी गंगाराम पूनिया ने मामले में संज्ञान लेकर मंगलौरा चौकी प्रभारी सतपाल को पीड़ित या उसके परिजनों के बयान लेकर कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद ही पुलिस उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पीड़ित व उसके परिजनों के बयान लेने पहुंची। एसपी ने कहा कि बुधवार सुबह तक इस मामले की पूरी जानकारी चाहिए। वहीं डीसी निशांत कुमार ने भी फैक्टरी की जांच के निर्देश दिए हैं।
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सचदेवा फायर वर्क्स पटाखा फैक्टरी में करीब 25 कर्मचारी पटाखे बनाते हैं। सोमवार को यूपी के मेरठ निवासी शाहरुख एक कमरे में बैठकर फुलझड़ी बना रहा था। इसी कमरे में बारूद भरा था। सुबह करीब 9:20 उस कमरे में जोरदार धमाका हुआ और आग लग गई। गंभीर रूप से झुलसे शाहरुख को कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में दाखिल कराया गया, वहां से उसे पीजीआई रोहतक रेफर किया गया है। बताया जा रहा है वहां से परिजन उसे मेरठ ले गए। शाहरुख की तबीयत गंभीर है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
24 घंटे तक कार्रवाई न करने पर पुलिस की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं, क्योंकि पुलिस का कहना है कि उनके पास शिकायत ही नहीं आई है, न ही पुलिस ने यह पता किया कि फैक्टरी का संचालक कौन है। पुलिस ने 24 घंटे बीतने पर भी कोई जांच नहीं की है।
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पटाखा फैक्टरी में धमाके के मामले में चौकी प्रभारी को निर्देश दिए हैं। बुधवार सुबह तक वह मामले की पूरी जांच करेंगे और यूपी में पीड़ित या उसके परिजनों के बयान लेकर उस आधार पर कार्रवाई भी की जाएगी। पुलिस बयान लेने गई है। जो कानूनी कार्रवाई बनती है वह की जाएगी।
गंगाराम पूनिया, एसपी करनाल
पटाखा फैक्टरी में धमाके के मामले में जांच कराई जाएगी कि फैक्टरी के संचालक ने एनओसी ली थी या नहीं। दमकल विभाग ने पहले ही निर्देश दिए हैं कि वह जिले में इस तरह की पटाखा फैक्टरियों की जांच करें और पता करें फायर विभाग से एनओसी ली है कि नहीं व वहां सुरक्षा के इंतजाम हैं या नहीं।
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-निशांत कुमार, डीसी, करनाल
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