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विद्यार्थियों के भविष्य पर इंग्लिश की तलवार

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मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल निसिंग में गरीब तबके के बच्चों को दाखिला देने से इसलिए मना कर दिया गया क्योंकि वे अंग्रेजी भाषा में कमजोर थे। अब अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि सरकारी स्कूल में दाखिला न होने पर बच्चाें को कहां पढ़ाएं, क्योंकि वह बच्चों को निजी स्कूलों में नहीं पढ़ा सकते।
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इंदिरा आवास कॉलोनी में रह रहे आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि कॉलोनी के करीब 30-40 बच्चे हैं, जिन्होंने छठी कक्षा में दाखिला लेना है, लेकिन जब सरकारी स्कूल में दाखिला करवाने गए तो प्रबंधन ने कहा कि बच्चों की अंग्रेजी कमजोर है। हिंदी मीडियम में दाखिले के लिए उन्हें कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।
बेटी का पहली कक्षा में दाखिला करवाना था, पर बोले कि टेस्ट होगा। अब बेटी कभी स्कूल ही नहीं गई तो टेस्ट कैसे देगी।
- परमल
जब बच्चे पढ़ाई में कमजोर हैं तो उन्हें पांचवीं कक्षा में पास क्यों किया। उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। वह अब उन्हें कहां पढ़ाएं।
- किशनी देवी
दाखिले के लिए गए थे, लेकिन बच्चे की इंग्लिश कमजोर होने की बात कह कर दस्तावेज वापस कर दिए गए। सरकार संज्ञान ले।
- सतीश
मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन सरकारी में भी दाखिला देने से मना कर दिया है।
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- सुल्तान
वर्जन
बच्चों को दाखिले के लिए मनाही नहीं है। उनकी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए अलग से कक्षाएं भी लगाई जाएंगी। हालांकि हिंदी मीडियम में दाखिले के लिए फिलहाल विभाग की ओर से कोई पत्र नहीं मिला है।
- ज्योत्सना मिश्रा, प्रधानाचार्य, मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल निसिंग
वर्जन
विद्यार्थियों को दाखिले के लिए मना नहीं किया जा सकता। नजदीक में कोई अन्य राजकीय स्कूल नहीं है तो यहां हिंदी माध्यम के लिए सेक्शन बनाया जा सकता है। मामले को लेकर स्कूल मुखिया से बात की जाएगी। बच्चों की पढ़ाई को बाधित नहीं होने दिया जाएगा।
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रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, करनाल
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