- जिला बार एसोसिएशन ने दूसरा सेमिनार आयोजित कर अधिवक्ताओं को दी नए कानूनों की जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। नए कानून में इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल साक्ष्यों पर जोर दिया गया है। वहीं पुलिस की शक्तियां भी बढ़ाई गई हैं। नए कानून से लोगों को निर्धारित समय में न्याय मिलेगा। यह जानकारी जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बातचीत के दौरान दी। वहीं सोमवार को एसोसिएशन की ओर से एक सेमिनार का भी आयोजन किया गया। जिसमें डॉ. संजीव की ओर से अधिवक्ताओं को नए कानून के बारे में जानकारी दी गई। यह बार एसोसिएशन का दूसरा सेमिनार था ताकि वकीलों को नए कानून के बारे में पूरी जानकारी मिल सके।
नया कानून मजबूत और सख्त
जिला बार एसोसिएशन के प्रधान संदीप चौधरी ने बताया कि नया कानून पहले से मजबूत और सख्त है। अब पीड़ितों को समय पर न्याय मिलेगा क्योंकि न्याय के लिए टाइम बाउंड किया गया है। पहले कोर्ट से पीओ होने पर केस की पैरवी नहीं हो पाती थी लेकिन नए कानून में 60 दिन के बाद केस शुरू हो जाएगा। नए कानून को लेकर जिला बार एसोसिएशन वकीलों को जागरूक करने का प्रयास कर रही है। उनके द्वारा लगातार वकीलों के लिए सेमिनार कराए जा रहे हैं।
नए कानून में काफी बदलाव आए
बार एसोसिएशन के उप प्रधान वकील गोपाल सिंह चौहान ने बताया नए कानून में काफी बदलाव आए हैं। अच्छा कानून बना है। जिसमें धाराएं भी बदली गई हैं और पहले से कम धाराएं हैं। बार एसोसिएशन की लाइब्रेरी में नए कानून की किताबें आ गई हैं, जहां बैठकर वकील उन्हें पढ़ सकते हैं। नए कानून में पुलिस और अदालत की शक्तियां बढ़ी हैं। कुछ नई धाराएं भी कानून में जोड़ी गई हैं तो कुछ हटाई गई हैं तो कुछ को मर्ज किया गया है। अब नए कानून के तहत आने वाले परिणाम से पता चलेगा कि लोगों को नए कानून से कितना फायदा हुआ है।
आईपीसी की 377 धारा को हटा दिया है
बार एसोसिएशन के महासचिव वकील विकास संधू ने कहा कि पुराने कानून में इलेक्ट्रॉनिक्स व डिजिटल साक्ष्य को अदालत में पेश करने के लिए 65बी सर्टिफिकेट देना होता था। जिसे बंद कर दिया है। वहीं आईपीसी की 377 धारा को हटा दिया है। जिसमें प्रकृति के कानून के खिलाफ यौन गतिविधियों को अपराधी बनाती है। अब नए कानून में आईपीसी की धारा 376 की जगह 64 बीएनएस ने ले ली है। अब 64 बीएनएस में ही 377 धारा को मर्ज कर दिया है।
सीजेएम को मिली एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने की शक्ति
बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव वकील अमरजीत धानियां ने बताया कि नए कानून के तहत अब जिले में जिला न्यायवादी के साथ डिप्टी निदेशक व असिस्टेंट जिला न्यायवादी भी नियुक्त होंगे। इसके साथ ही नए कानून में सीजेएम को अब एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने की पावर मिल चुकी है। पहले सीजेएम को दस हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने की पावर थी।
ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं एफआईआर
बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष वकील मनोज गांधी ने बताया कि नए कानून के तहत अब पीड़ित ऑनलाइन पुलिस को शिकायत दे सकता है। पुलिस भी पीड़ित के बयान कागज के साथ वीडियो बनाकर भी दर्ज करेगी। इसके साथ ही मामले की जांच के दौरान भी सभी साक्ष्य की वीडियो बनाई जाएगी। वहीं नाबालिग और सीनियर सिटीजन के बयान पुलिस उनके सुविधा अनुसार ही दर्ज करेगी। यानी वह पुलिस थाना में नहीं आ सकते तो उनके घर जाकर बयान दर्ज करने होंगे।