माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। रिश्वत प्रकरण में आरोपी नगर निगम के एसई दीपक किग्गर को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से पांच दिन का पुलिस रिमांड लिया गया है। पूछताछ में कई राज खुलने की संभावना है। पुलिस रिश्वत में लिए गए रुपये और वीडियो बनाने वाले कैमरे की बरामदगी करने का प्रयास करेगी। वहीं, मामले में और कौन-कौन संलिप्त है, किन लोगों से रुपये लिए जाते थे और किन्हें दिए जाते थे, इसका भी खुलासा करने का प्रयास किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि जिन लोगों के नाम सामने आएंगे, उन्हें भी जांच में शामिल किया जाएगा।
वीरवार को 14 मार्च से फरार चल रहे आरोपी एसई को सीआईए-2 की टीम ने फरीदाबाद स्थित उसकी बहन के आवास से गिरफ्तार किया था। शुक्रवार को अदालत में पेश किया गया। जहां से सात दिन का रिमांड मांगा गया था। कोर्ट में करीब 20 मिनट तक कार्रवाई चली।
सूत्रों के अनुसार, पांच दिन के रिमांड के दौरान जांच के लिए आरोपी एसई को पुलिस दिल्ली, फरीदाबाद और गुजरात के अहमदाबाद ले जाने की तैयारी में है ताकि रुपयों की बरामदगी के अलावा किन लोगों के इस मामले से तार जुड़े हैं, उन तक भी पहुंचा जा सके। सूत्रों के अनुसार, पुलिस की ओर से आरोपी एसई से कुल नौ लाख रुपये रिकवर किए जाने हैं। इसमें सात लाख अलग और दो लाख रुपये अलग जगह होने की बात कही जा रही है। हालांकि पुलिस की ओर से इस बारे में कोई पुष्टि नहीं की गई। 14 मार्च को इसी मामले में संलिप्त एसई के पीए को गिरफ्तार किया था, जिसे एक दिन के रिमांड के बाद 17 मार्च को न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।
अधिकारी का पीए से लेनदेन करना गलत नहीं...
आरोपी एसई के वकील नरेंद्र सिंह चीमा के अनुसार उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि इस मामले में कोई शिकायतकर्ता ही नहीं है। पुलिस कह रही है कि रकम बरामद करनी है लेकिन रकम देने वाला ही कोई नहीं है तो रिकवरी किस बात की होगी। वहीं, पुलिस का तर्क है कि उन्होंने आरोपी एसई को गुजरात लेकर जाना है। एडीसी की जांच में भी यह सामने आया है कि कोई अधिकारी अपने पीए के साथ पैसों का लेनदेन करता है तो यह मिस कंडक्ट की डैफिनेशन के अंदर भी नहीं आता है। जो जांच एडीसी को सौंपी गई थी, वह मिस कंडक्ट ऑफ दी म्युनिसिपल ऑफिशियल के लिए हुई थी लेकिन उनकी जांच में यह मिस कंडक्ट भी नहीं बनता।
एसई की गिरफ्तारी नहीं हुई, खुद सरेंडर किया
वकील नरेंद्र सिंह चीमा का कहना है कि आरोपी एसई की गिरफ्तारी नहीं हुई है बल्कि उन्होंने खुद सरेंडर किया है। पांच दिन का पुलिस रिमांड मिला है। पुलिस ने एफआईआर भी जल्दबाजी में दर्ज की है। पुलिस को पहले सबूत एकत्रित करने चाहिए थे लेकिन यहां कोई सबूत नहीं है। सबूत बनाए जा रहे हैं।
यह है मामला
नगर निगम के एसई ने दो लोगों पर ब्लैकमेल करने के आरोप लगाए थे। इस संदर्भ में उन्होंने पुलिस में शिकायत भी दी थी। पुलिस ने उन दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो पता चला कि आरोपी एसई के ही कार्यालय में कार्यरत था और उसने हिडेन कैमरे से करीब 32 वीडियो बनाई थी, जिसमें एसई दीपक किग्गर और उसका पीए विकास रुपयों का लेन-देन करते नजर आ रहे हैं। मामले में एसई दीपक किग्गर को उस दौरान सस्पेंड कर दिया था और 29 दिसंबर 2021 को तत्कालीन डीसी निशांत कुमार ने इस मामले की जांच एडीसी योगेश कुमार को सौंपी थी। करीब ढाई महीने जांच के बाद एडीसी योगेश की जांच रिपोर्ट पर नगर निगम के एसई दीपक किग्गर और पीए विकास शर्मा के खिलाफ सिविल लाइन थाने में 14 मार्च को मामला दर्ज किया गया था। मामले की जांच डीएसपी मुख्यालय मुकेश कुमार कर रहे हैं।
वर्जन-
एडीसी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आरोपी एसई और उनके पीए के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया। आरोपी पीए को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। एसई का पांच दिन का रिमांड हासिल किया है। रिमांड के दौरान लिए गए रुपयों का रिकॉर्ड और संलिप्त अन्य लोगों की पड़ताल की जाएगी। जो भी मामले में संलिप्त पाए जाएंगे सभी को जांच में शामिल करेंगे।
मुकेश कुमार, डीएसपी मुख्यालय