करनाल। राष्ट्रपति के करनाल दौरे के दौरान नौ मिनट का वह समय बहुत यादगार रहा, जो उन्होंने गिर गाय की क्लोन बछड़ी गंगा के साथ गुजारा। गंगा से मिलने के बाद राष्ट्रपति बहुत उत्साहित दिखीं। उन्होंने क्लोन तकनीक के बारे में जानकारी हासिल कर इसके परिणामस्वरूप गंगा को देखकर हैरानी व्यक्त की।
गंगा से मिलने के बाद उनके मुखारविंद से यह शब्द निकले ‘ कमाल है क्लोन तकनीक, गंगा बेहद सुंदर व प्यारी गाय है...। वह हैरत भरी नजरों से देखतीं हुईं तेज कदमों से उसके पास जाकर दोनों हाथों से उसे दुलारने लगीं। इस दौरान राष्ट्रपति ने वैज्ञानिकों की मौके पर ही जमकर तारीफ की और बोलीं, बहुत अच्छा काम किया और आगे बेहतर करो।
दरअसल, जब दीक्षांत समारोह में आने का अनुरोध राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार किया तो उनके कार्यक्रम में गिर गाय के क्लोन गंगा को देखने का कोई जिक्र नहीं किया गया था। बताते हैं कि इसके बाद विचार किया गया कि राष्ट्रपति का आना एक बड़ी उपलब्धि है, ऐसे में संस्थान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शुमार दुनिया के पहले गिर गाय व देश के पहले गाय के क्लोन से राष्ट्रपति को जरूर रूबरू होनी चाहिए।
नतीजतन एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने अलग से राष्ट्रपति को क्लोन के बारे में बताते हुए उनसे गंगा को देखने का अनुरोध किया। जिसके बाद राष्ट्रपति ने क्लोन को देखने की इच्छा व्यक्त कर दी। इसके लिए तैयारियां शुरू हुईं तो कार्यक्रम स्थल डी. सुंदरेशन ऑडिटोरिटम के बाहर लॉन में ही क्लोन को दिखाने की व्यवस्था की गई।
जैसे ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ऑडिटोरियम की ओर आईं तो निदेशक डॉ.धीर सिंह ने लॉन की ओर इशारा किया। दूर से ही राष्ट्रपति की नजर क्लोन पर पड़ी तो वह गंगा को देखकर बहुत खुश और उत्साहित दिखीं। राष्ट्रपति ने वहां मौजूद वैज्ञानिकों से गिर गाय की क्लोन बछड़ी का नाम पूछा। बताने पर गंगा नाम सुनते ही राष्ट्रपति बोलीं-बहुत प्यारा नाम है।
और अधिक बेहतर कार्य करने की प्रेरणा
क्लोन टीम के इंचार्ज डॉ. नरेश सेलोकर ने राष्ट्रपति को क्लोन की पूरी प्रक्रिया समझाई। उसकी खूबियां और नाम रखे जाने के बारे में निदेशक डॉ. धीर सिंह ने बताया। उन्होंने ये भी बताया कि एनडीआरआई ने अब तक 25 क्लोन तैयार किए हैं, जिनमें से 13 जीवित हैं। लेकिन गाय का ये पहला क्लोन ही है, जो पूरी तरह स्वस्थ है। गिर देशी और जलवायु अनुकूल गाय है, जो सर्वाधिक दूध देने वाली नस्लों में शामिल है। राष्ट्रपति ने वैज्ञानिकों की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए और अधिक बेहतर कार्य करने को प्रेरित किया।