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हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की... पर झूमे श्रद्धालु

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करनाल। ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की...’ और ‘मीठी-मीठी मेरे सांवरे की मुरली बाजे...’ भजनों पर श्रद्धालु अपने आपको नृत्य करने से नहीं रोक सके। मौका था श्रीमद्भागवत कथा का जो कर्णेश्वर महादेव मंदिर और सेक्टर 8 के श्री राम मंदिर में चल रही है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में दोनों जगह पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी तक यह कार्यक्रम चलेगा। कथा के चौथे दिन वीरवार को श्रद्धालु भक्ति रस में लीन दिखे।
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वह नैया डूब नही सकती जिसका ईश्वर रखवाला हो : मारुति नंदन
करनाल। सेक्टर 8 के श्री राम मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन मारुति नंदन शास्त्री ने कहा कि वह नैया डूब नही सकती, जिसका ईश्वर रखवाला है। उन्होंने मत्स्यावतार की कथा, सूर्यवंशी राजाओं और अबरीष का चरित्र भी सुनाया।
बताया कि वामन भगवान छोटे से बनकर राजा बली के पास गए और विराट बनकर तीन पग भूमि का दान लेकर दो पग में त्रिलोक को नाप लिया। जो छोटा रहकर खुश रहता है, वही बड़ा बनता है। राजा बली के दादा प्रहलाद आए और बोले प्रभु आपने ही सब दिया और वापस ले लिया इसमें आश्चर्य क्या है, बलि की उदारता से भगवान खुश हुए और सुतल लोक का राजा बनाया। खुद द्वारपाल बन गए। इस अवसर पर जगन बत्रा, ओम पोपली, चरणजीत अरोड़ा व मुरारी बत्रा मौजूद रहे।
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स्वयं को श्रेष्ठ मानना ही सबसे बड़ी भूल : कृष्ण महाराज
करनाल। श्री कर्णेश्वर महादेव मंदिर में कथा सुनाते हुए डॉ रमनीक कृष्ण महाराज ने बताया कि बताया कि गज को अपने बल पर बहुत अभिमान था, वह भूल गया था के इस जगत में सबसे बड़ी सत्ता परमात्मा नाम की है। भगवान ने ग्राह बनकर गज के पाव को जकड़ लिया। बहुत प्रयत्न करने पर भी जब गज अपना पाव ना मुक्त कर पाया तो अंत में गजेंद्र ने भगवान के समक्ष करुण पुकार की। भगवान गज की करुण पुकार सुनकर द्रविभूत हुए और गज को अपनी ओर खींच लिया। गज जड़ बुद्धि था और भगवान की स्तुति करना नहीं जानता था। भगवान ने ही उसे स्तुति करने के लिए वाणी दी।
मानव की स्थिति भी ऐसी ही है। अपने बल पर उसे बड़ा अहंकार है। स्वयं को श्रेष्ठ मानना ही मानव की सबसे बड़ी भूल है। परमात्मा एक पल में मानव का अभिमान तोड़ देते है। फिर इस दयनीय स्थिति में वह परमात्मा को याद करता है परंतु वह ये विचार नहीं करता अगर ये नाम हमने सुख में लिया होता तो जीवन में दुख ही क्यों आता। मौके पर संजय दीक्षित आदि मौजूद रहे।
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