- परिजनों ने सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर लघु सचिवालय के बाहर जलाया पुतला
- सात माह पहले अमृतधारा अस्पताल में हुई थी ज्योति की मौत, इलाज में लापरवाही का है आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। डेंगू के उपचार के दौरान अमृतधारा अस्पताल में भर्ती आईबी अफसर ज्योति की मौत को करीब सात माह बीत चुके हैं, लेकिन उसके परिजन कार्रवाई के लिए अब भी पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के चक्कर काट रहे हैं। परिजनों ने रविवार को विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर लघु सचिवालय के बाहर अस्पताल के मालिक और सीएमओ का पुतला जलाया।
उन्होंने अस्पताल प्रबंधक और चिकित्सकों पर बेटी की हत्या और सीएमओ पर मिलीभगत का आरोप लगाया। वहीं, मजिस्ट्रेट को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। इस मामले में अस्पताल के संचालक डॉ. ध्रुव गुप्ता ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
सेक्टर- 9 निवासी पिता कर्मबीर का आरोप है कि उसकी बेटी ज्योति को 22 अक्तूबर को बुखार आया था। उसके ससुर सेवानिवृत्त डिप्टी सीएमओ गजे सिंह और पति अमनदीप ने ज्योति को अमृतधारा अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां पर चिकित्सकों ने डेंगू बताते हुए ज्योति को आईसीयू में भर्ती कर लिया था। पिता कर्मवीर का आरोप है कि आईसीयू में बीएएमएस डॉक्टरों को उपचार की जिम्मेदारी सौंपी गई, जबकि मुख्य चिकित्सक बेटी को देखने तक नहीं आए।
उनका कहना है कि जिस महिला एमडी डॉक्टर की देखरेख में उपचार चल रहा था, वह मरीज को छोड़कर विदेश चली गई। अस्पताल में बेटी को खून की उल्टियां हुई मगर उसे ठीक से उपचार नहीं मिला। पिता का कहना है कि बेटी का अल्ट्रासाउंड तक नहीं कराया गया और उपचार के दौरान बरती गई लापरवाही के चलते ज्योति की मौत हुई है।
मौके पर रविदास सभा, डाॅ. भीमराव आंबेडकर सभा, एक्स सर्विसमैन एसोसिएशन, भीम आर्मी, पिछड़ा व अति पिछड़ा वर्ग सभा लाडवा, सेवा संस्था आदि ने सहयोग किया। प्रदर्शनकारियों में कृष्ण कुटेल, रोहित जोशी, दया प्रकाश, दौलत सिंह, एडवोकेट मुनीस सागर, मानसिंह, चरण सिंह, कृष्ण फौजी, नरेंद्र शर्मा, धर्मसिंह सैनी, वंशिका, ऊषा आदि मौजूद रहे।