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Karnal News: रीजनेबल चार्जेज के नाम पर कटौती गलत

Thu, 29 Jan 2026 02:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह पॉलिसी धारक की इलाज राशि से की गई कटौती को ब्याज सहित वापस करे। आयोग ने कंपनी के इस व्यवहार को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना है। आयोग ने तर्क दिया कि रीजनेबल चार्जेज के नाम पर कटौती करना गलत है। आयोग ब्याज सहित राशि देने के आदेश दिए।
क्लब लेन करनाल निवासी संध्या गोयल ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से पिछले 10 वर्षों से मेडिक्लेम पॉलिसी ली थी। मई, 2022 में, पेट में दर्द और अन्य बीमारी के कारण उन्हें करनाल के निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया। वहां उनका गर्भाशय का ऑपरेशन हुआ। इस इलाज पर कुल 65 हजार 375 का खर्च आया। उन्होंने बीमा कंपनी के पास क्लेम फाइल किया, तो कंपनी ने उन्हें केवल 43 हजार 895 का भुगतान किया। शेष 21 हजार 480 रुपये काट लिए। इसके बाद उपभोक्ता ने आयोग के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करवाई।
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बीमा कंपनी और उनके टीपीए ने दलील दी कि पॉलिसी की शर्तों के अनुसार, वे केवल उचित और प्रथागत शुल्क (रिजनेबल एंड कस्टमरी चार्जेज) देने के लिए बाध्य हैं। उन्होंने दावा किया कि करनाल के अन्य अस्पतालों में इस सर्जरी का पैकेज कम है, इसलिए उन्होंने उसी आधार पर कटौती की है।
कटौती कानूनन मान्य नहीं
दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह की अगुवाई वाली पीठ ने बीमा कंपनी के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि दूसरे अस्पतालों के पैकेज रेट के आधार पर किसी और अस्पताल के बिल में कटौती करना केवल धारणाओं पर आधारित है और कानूनन मान्य नहीं है। आयोग ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बीमा कंपनियां प्रीमियम लेने में तो बहुत उत्सुक रहती हैं, लेकिन जब क्लेम देना होता है तो बारीक शर्तों का सहारा लेकर बचने की कोशिश करती हैं।
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नौ फीसदी ब्याज देना होगा
आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिए कि इलाज की शेष राशि 21 हजार 480 रुपये नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ दें। इसके अलावा उपभोक्ता को हुई मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 15 हजार रुपये और कानून खर्च के तौर पर उपभोक्ता को 11 हजार रुपये देने का आदेश दिया। आयोग ने कंपनी को इन आदेशों की 45 दिनों के भीतर पालन करने के आदेश दिए।
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