हरियाणा सहकारिता विभाग की ओर से संचालित एकीकृत सहकारी विकास परियोजना (आईसीडीपी) में 100 करोड़ रुपये के घोटाले में करनाल एसीबी ने महिला समेत चार आरोपी अधिकारियों को शनिवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। इनमें दो करनाल, एक पानीपत और एक निलंबित महिला अधिकारी शामिल हैं। एसीबी ने एक दिन के रिमांड के दौरान करनाल के डिप्टी रजिस्ट्रार से कुछ सामान रिकवर किया है।
करनाल एंटी करप्शन ब्यूरो के इंस्पेक्टर सचिन ने बताया कि इस मामले की शिकायत गुरुग्राम एसीबी से की गई थी। उन्होंने जांच की तो घोटाला पूरे प्रदेश के एकीकृत सहकारी विकास परियोजना (आईसीडीपी) में पाया गया।
उनकी प्राथमिक जांच में सामने आया कि आरोपी अधिकारियों ने काम शुरू होने से पहले ही ठेकेदार को भुगतान कर दिया। उन्होंने 31 दिसंबर को केस दर्ज करने के बाद सबसे पहले पानीपत के सहायक रजिस्ट्रार रामकुमार को गिरफ्तार किया।
रामकुमार से पूछताछ के बाद करनाल के उप-रजिस्ट्रार रोहित गुप्ता, करनाल के ही ऑडिट अधिकारी बलविंद्र को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में पहले से ही निलंबित चल रही सहायक रजिस्ट्रार अन्नु कौशिक को काबू किया गया। सभी को तीन दिन के रिमांड पर लिया। रिमांड के दौरान सभी से इस घोटाले में शामिल अन्य अधिकारियों के संबंध में पूछताछ की गई।
करनाल के उप-रजिस्ट्रार से सामान बरामद
एसीबी करनाल के इंस्पेक्टर सचिन ने बताया कि घोटाले में गिरफ्तार करनाल के उप-रजिस्ट्रार रोहित गुप्ता को किसी ने लग्जरी एलईडी भेंट की है। इसके अलावा उप-रजिस्ट्रार ने अपने मकान पर सोलर सिस्टम लगाया हुआ है। इसका कुछ भुगतान डिप्टी रजिस्ट्रार ने कर दिया और बाकी किसी अन्य से कराया गया। दोनों सामान जब्त कर लिए गए हैं। इसके अलावा आरोपियों ने घोटाले की राशि से प्लाॅट और मकान खरीदे हैं। जिसकी जांच चल रही है।