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सहकारी समितियां बंद, आज से प्रदेश भर में ठप होगी ऋण वसूली

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। बिना किसी आदेश के जिला केंद्रीय सरकारी बैंक (डीसीसीबी), करनाल जिले की सहकारी समितियों के सदस्यों के खातों को अपने अधीन लेने लगी हैं, जिससे भड़के सहकारी समिति कर्मचारी पिछले कई दिनों से डीसीसीबी कार्यालय परिसर पर धरना दे रहे हैं। जिले की सभी 90 सहकारी समितियों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर कर्मचारियों ने रिकवरी को ठप कर दिया है। हर रोज करीब 20 करोड़ की रिकवरी का नुकसान हो रहा है। बृहस्पतिवार को यहां पैक्स कर्मचारी महासंघ की प्रदेशस्तरीय कमेटी की बैठक की गई, जिसमें तय किया गया कि कर्मचारी 10 जून से पूरे प्रदेश की सभी सहकारी समितियों में ऋण की रिकवरी को ठप कर देंगे। इसके लिए सुबह ही रजिस्ट्रार को नोटिस दे दिया जाएगा।
प्राइमरी एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव सोसाइटी (पैक्स) कर्मचारी महासंघ के कर्मचारी पिछले चार दिन से माल रोड स्थित जिला केंद्रीय सहकारी बैंक परिसर में धरने पर बैठे हैं, लेकिन अभी तक किसी सक्षम अधिकारी ने कर्मचारियों से बात नहीं की है। बृहस्पतिवार को धरना स्थल पर ही राज्य कार्यकारिणी की बैठक की गई। जिसमें प्रदेश भर की समितियों ने करनाल शाखा के समर्थन में 10 जून से पूरे प्रदेश में सभी सहकारी समितियों की ऋण वसूली ठप करने का निर्णय लिया है। जिला प्रधान जसबीर सिंह ने अध्यक्षता करते बताया कि पानीपत, यमुनानगर, सोनीपत, कुरुक्षेत्र, अंबाला व पंचकूला के कर्मचारियों व सर्व कर्मचारी संघ ने धरने को अपना समर्थन दिया है। पैक्स कर्मचारियों ने 30 मई से कर्जा वसूली बंद कर रखी है। तीन जून से कर्मचारी अनिश्चितकालीन धरने पर हैं। अब संघ ने रजिस्ट्रार सहकारी समितियां पंचकूला हरियाणा को उनके कार्यालय के सामने अनिश्चिकालीन धरने का नोटिस दे दिया है। इसमें वरिष्ठ उपप्रधान सुभाष नांदल, रविंद्र जवारा सोनीपत, दविंद्र राणा, कृष्ण शर्मा, सुलतान सिंह पानीपत, अनूप सिंह सोनीपत, पवन कुमार, कर्मवीर यमुनानगर, सुशील कुमार, शीशपाल, सुरेंद्र राणा, प्रदीप, रणजीत सिंह, रिषीपाल, दलेल सिंह, संदीप, बलबीर, बीर सिंह, गुरजंट सिंह, सूरजभान, प्रवीन, सुनील, गुलाब शर्मा, सुशील कुमार, सुभाष रतक, मलकीत सिंह व पलविंद्र सिंह मौजूद रहे।
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ऑनलाइन किए जाए पैक्स
राज्य प्रधान कुलदीप सिंह राणा ने कहा कि पैक्सों का डाटा बैंक को किसी भी सूरत में नहीं देने दिया जाएगा। कर्मचारियों के हितों को देखते हुए पैक्सों को ऑनलाइन किया जाए। मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी देने की तारीख में बदलाव किया जाए तथा पूर्व आरसीएस जगदीप सिंह की रिपोर्ट लागू की जाए। 10 जून से प्रदेशभर में सहकारी ऋण वसूली ठप रहेगी। प्रदेश भर की सहकारी समितियों को भी बंद कर दिया जाएगा। सहकारी समितियों को हर छमाही का डेढ़ लाख रुपये ब्याज रहित ऋण प्रदान करती है, उनकी समय पर वसूली करनी होती है, लेकिन डीसीसीबी समितियों के खातों पर कब्जा करके समिति कर्मियों को बेरोजगार करना चाहती है। महासंघ ऐसा नहीं होने देगा।
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