संवाद न्यूज एजेंसी
निसिंग। हरियाणा सरकार ने सर्व सम्मति से चुनाव करने वाली पंचायतों, सरपंच, पंच, जिला व ब्लॉक समिति पार्षद पदों के लिए प्रोत्साहन राशि की घोषणा कर रखी है, लेकिन जिले में ऐसी ग्राम पंचायतें भी हैं जो भाईचारा कायम करने के लिए पंचायतें करके रणनीति बनाने में जुटे हैं। एक ऐसी ही पंचायत है जुंडला। जहां रविवार को सभी 36 बिरादरियों की पंचायत बुलाकर पंचायत के विभिन्न पदों पर आम सहमति बनाने का प्रयास किया गया। इसके बाद सरपंच से लेकर पंच तक शिक्षित और निष्ठावान लोगों को चुनने का निर्णय लिया गया है। पहली पंचायत में एक 11 सदस्यीय कोर कमेटी गठित की गई। इसके साथ ही आठ संभावित दावेदारों की सूची तैयार करके कमेटी को सौंपी गई। दूसरी पंचायत आयोजित करके इन्हीं आठ दावेदारों में किसी एक के नाम पर सर्वसम्मति से मुहर लगाने का प्रयास किया जाएगा। समिति को 21 पंचों की सूची सौंपी गई है।
जिले के चिड़ाव खंड की जुंडला ग्राम पंचायत के प्रजापति पंचायत भवन में सर्वजातीय पंचायत बुलाई गई। जिसमें सभी 36 बिरादरी के लोगों के शामिल होने का दावा किया गया। मुद्दा एक ही था, ग्राम पंचायत चुनाव में प्रत्याशियों का सर्व सम्मति से चयन। जुंडला ग्राम पंचायत का सरपंच पद इस बार अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित है। हालांकि चुनाव लड़ाने वाले तो अधिकांश पुरुष ही हैं, फर्क इतना है कि अब वह स्वयं चुनावी अखाड़े में न उतर कर अपनी पत्नी या अपने परिवार की महिलाओं को चुनाव लड़ाने के लिए आगे आ रहे हैं। इस पंचायत में कई दावेदारों ने सहभागिता की। पंचायत में मजबूती के साथ बारी-बारी से अपनी दावेदारी भी पेश की। हालांकि बुजुर्गों व यहां के गणमान्य लोगों ने सर्वसम्मति से इस बात पर बल दिया कि जो भी उम्मीदवार दावेदारी करे, वह शिक्षित, ईमानदार, कर्मठ और ऐसा होना चाहिए जो पंचायत को पर्याप्त समय दे सके। उसकी सियासी पहुंच भी होनी चाहिए। जो अपनी सूझबूझ से जुंडला गांव का कायाकल्प कर सके। जुंडला गांव को कौशल गांव की श्रेणी में ला सके।
इसके बाद दावेदारों से नाम मांगे गए। इनमें सरपंच पद के लिए कुल आठ दावेदारों ने अपने नाम दिए। पंचों के लिए 21 नाम सामने आए। इन नामों पर सर्वसम्मति बनाने के लिए गांव के गणमान्य लोगों की 11 सदस्यीय समिति गठित की गई। लोगों से विचार विमर्श करके ये समिति आम सहमति बनाएगी और अगली पंचायत में उन नामों का एलान किया जाएगा। आम सहमति बनती है तो यहां सरपंच या पंचों का चुनाव नहीं होगा, सर्व सम्मति से ही पंचायत अपना जनप्रतिनिधि चुन लेंगी। लेकिन ये समय ही बताएगा कि सर्व सम्मति बनती है या नहीं।
वक्ताओं ने कहा कि सरपंच बनना बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि सरपंच के कंधों पर एक परिवार के साथ-साथ, पूरा गांव भी उनका परिवार बन जाता है। जिनकी सुख-दुख की हर जिम्मेदारी सरपंच के कंधों पर आ पड़ती है। क्षेत्र में ऐसे बहुत से उदाहरण हैं, जिन्होंने अपने जीवन की शुरुआत सरपंच बनने से की जोकि बाद में विधायक बनने के पश्चात मंत्री पद पर आसीन हैं।
वक्ताओं ने कहा कि देश और गांव के प्रति गहरी निष्ठा होना बहुत जरूरी है। जब हम सर्वसम्मति से निर्णय करने में सक्षम हैं तो आखिर क्यों ऐसा काम किया जाए, जिसमें आपसी भेदभाव हो और रंजिश जन्म ले। उन्होंने एक दोहा सुनाकर उसका भावार्थ भी समझाया।
चिड़ाव खंड के 22 गांव
औंगद, बड़ौता, बहलोलपुर, चिढ़ाव, घोघड़ीपुर, कतलाहेड़ी, पिंगली, जरीफाबाद, डबरी, बजीदा रोडान, बीड माजरा, हेमदा, खेड़ी नरू, बुडनपुर विरान, बालू, अलीपुर वीरान, हाथलाना, मंजूरा, शाहपुर, दादूपुर रोडन, जुंडला, सिरसी खंड में यह 22 गांव आते हैं।