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Karnal News: घर की कलह से संकट में बचपन

Mon, 05 Jan 2026 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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मानसी मौर्य
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करनाल। बाल कल्याण समिति ने बस स्टैंड पर बच्चे को लावारिस घूमते हुए पाया था। राजस्थान से भाग कर आए बच्चे ने काउंसिलिंग में बताया कि माता-पिता रोज झगड़ा करते थे। वह परेशान रहता था। डर लगता था कि किस बात पर दोनों लड़ने लगेंगे। घर से बाहर रहने पर शांति मिलती थी। ऐसे में घर छोड़ दिया।
यह एक अकेला प्रकरण नहीं है। जिला बाल कल्याण समिति हर वर्ष 100 से अधिक बच्चों को विभिन्न स्थानों से अपने संरक्षण में लेती है। जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश ने बताया कि काउंसिलिंग में अधिकांश बच्चे माता-पिता के बीच कलह को घर से भागने का कारण बताते हैं। बीते वर्षों में घर से भागने वाले बच्चों के मामलों में इजाफा हुआ है। वर्ष 2022 में समिति ने 142 बच्चों को करनाल में विभिन्न स्थानों से संरक्षण में लिया था वहीं 2025 में 236 बच्चों को संरक्षण में लिया गया।
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समिति के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश ने बताया कि संरक्षण में लिए बच्चों से उनके घर की जानकारी लेकर माता-पिता से संपर्क किया जाता है। बच्चे के साथ माता-पिता की भी काउंसिलिंग की जाती है। संतुष्ट होने पर बच्चे को माता-पिता के साथ भेज दिया जाता है। बस स्टैंड पर मिले राजस्थान के बच्चे के माता-पिता को भी बुलाकर काउंसिलिंग की गई। इसके बाद बच्चे को उनके साथ भेज दिया गया। संवाद
सुविधाओं के साथ संवाद भी जरूरी
घर, जो सुरक्षा और अपनेपन का प्रतीक है, माता-पिता के बीच झगड़ों से बच्चों के लिए तनाव और डर की जगह बन जाता है। घर से भागे बच्चों की काउंसिलिंग में टूटते बचपन और बिखरते परिवार की ऐसी कहानियां सामने आती हैं। अध्यक्ष चंद्र प्रकाश ने बताया कि काउंसिलिंग में सामने आया कि कई बार माता-पिता सुविधाएं देकर मान लेते हैं, सब बेहतर है। ऐसा नहीं है। उन्होंने रेलवे स्टेशन पर मिली कैथल की बच्ची के बारे में बताया। काउंसिलिंग में बच्ची का कहना था कि मां और पिता दोनों काम करते हैं। एकल परिवार है। उसे कम समय देते हैं। मां से बात करने की कोशिश करो तो पिता के पास जाने के लिए कहती हैं और पापा कह देते हैं मां से बात करो। अकेली रहती थी। बाहर दोस्तों के साथ ही अच्छा लगता था। ऐसे में घर छोड़ दिया।
नशा भी है बड़ा कारण : बाल कल्याण समिति को काउंसिलिंग में एक और बड़ा कारण सामने आया। पिता का अत्यधिक नशा करना। शराब या अन्य नशे की लत न सिर्फ परिवार की आर्थिक स्थिति बिगाड़ती है बल्कि घर का माहौल भी विषाक्त बना देती है।
बदलता पारिवारिक ढांचा भी बड़ा कारण
समिति अध्यक्ष ने बताया कि आज के समय में अधिकांश माता-पिता कामकाजी हैं। संयुक्त परिवारों के टूटने से बच्चों को दादा-दादी या अन्य बुजुर्गों का सहारा भी कम मिल रहा है। पहले जहां घर में कोई न कोई ऐसा होता था जो बच्चे की बात सुन ले, अब वहां खालीपन बढ़ता जा रहा है।
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बॉक्स
वर्ष बचाए गए बच्चे परिवार को सौंपे
2022 142 133
2023 179 173
2024 189 180
2025 236 229

ये हैं घर छोड़ने के कारण
माता-पिता के बीच लगातार झगड़ा, पिता का अत्यधिक नशा
कामकाजी माता-पिता, बच्चों को समय नहीं दे पाना
एकल परिवार में भावनात्मक सपोर्ट व संवाद का अभाव
(जैसा कि जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश बताया)



माता-पिता दोनों की काउंसलिंग कर बच्चे को माता-पिता को सौंप दिया जाता है। ऐसे ही जिला बाल कल्याण समिति की ओर से हर वर्ष 100 से अधिक भागे हुए बच्चे रेस्क्यू किए जाते हैं। बच्चों के साथ संवाद की कमी और घरेलू झगड़े डाल रहे बच्चों की मानसिकता पर गहरा असर।
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