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चौधर की चाहत ने भरा सरकारी खजाना, वर्षों से फंसी रकम निकली

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। गांव की चौधर की चाहत रखने वाले सभी प्रत्याशी तो चौधरी नहीं बन पाएंगे। लेकिन दो साल देरी से हो रहे पंचायती चुनाव ने सरकारी खजाने को जरूर भर दिया है। करीब सात साल से ग्रामीणों के पास फंसी रकम में से इस चुनाव ने 2.33 करोड़ रुपये तो निकलवा दिए हैं। जिसे एनओसी लेने की एवज में चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों से वसूला गया है।
जिले में पंचायती राज के विभिन्न पदों पर चुनाव लड़ने के लिए 7988 लोगों ने विभिन्न विभागों से एनओसी ली है। इसके लिए उनकी ओर से सरकारी विभागों की सालों पुराना बकाया रकम का भी भुगतान किया गया है। सरकार के खजाने में आई 2.33 करोड़ रुपये की राशि में से 62 लाख रुपये सिर्फ बिजली निगम के खजाने में आए हैं। जोकि सालों से अटके बिल के रूप में अलग-अलग डिविजन से जमा हुआ है। जबकि अन्य राशि पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त तीन बैंकों के खाते में गई है। निर्वाचन आयोग की हिदायतों के अनुसार, चुनाव लड़ने के लिए बिजली निगम, सहकारी समितियों, को-ऑपरेटिव बैंक और लैंड मॉर्गेज बैंक की एनओसी जरूरी है। इसके अलावा चूल्हा टैक्स का भी भुगतान करना जरूरी किया गया था। जिले में जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, सरपंच और पंच के कुल 4521 पदों के लिए 7734 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं।
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60 प्रतिशत प्रत्याशियों का चूल्हा टैक्स बकाया
अधिकारियों के अनुसार, चूल्हा टैक्स के रूप में ग्राम सचिव के पास एक साल की 60 रुपये की पर्ची कटती है। 60 प्रतिशत प्रत्याशियों का पिछले सात साल से चूल्हा टैक्स भी बकाया था। जिसे अब चुनाव के समय में नामांकन भरने के समय भरा गया। एक अनुमान के अनुसार, सभी नौ खंडों में 20 लाख से ज्यादा राशि चूल्हा टैक्स के रूप में जमा हुई है।
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किस पद के लिए कितने प्रत्याशी मैदान में
पद सीटें कुल प्रत्याशी पुरुष महिला
जिला परिषद 25 239 132 107
ब्लॉक समिति 200 750 409 341
सरपंच 395 1501 794 707
पंच 3901 5244 2845 2399
कुल 4521 7734 4180 3554
जिला परिषद के किस वार्ड कितने प्रत्याशी
वार्ड प्रत्याशी
01 13
02 13
03 10
04 06
05 04
06 10
07 08
08 10
09 11
10 11
11 14
12 06
13 08
14 10
15 10
16 04
17 11
18 11
19 12
20 09
21 14
22 05
23 08
24 09
25 12
कुल 239
रिकवरी के मामले में प्रदेश में करनाल तृतीय
चुनाव लड़ने के लिए 7988 एनओसी जारी हुई हैं। इनकी एवज में 2.33 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। इनमें से करीब 62 लाख रुपये बकाया बिजली बिल के रूप में आया है। एनओसी जारी करने के लिए रिकवरी के मामले में करनाल प्रदेश में तीसरे नंबर पर है।
- अनीश यादव, उपायुक्त करनाल
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