67: सराफा बाजार में खरिदारी करती महिलाएं। फाइल फोटो
करनाल। कोरोना महामारी के दो सालों के बाद अक्षय तृतीया पर सराफा बाजार गुलजार दिखा। सोने पर महंगाई के बावजूद जिले में करीब 55 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। जिससे अब सराफा कारोबारियों को शादियों के सीजन में भी अच्छे कारोबार की उम्मीदें बढ़ी हैं। इस बार बाजारों में हीरे की भी जमकर खरीदारी हुई। इसका मुख्य कारण आभूषण के तौर पर सोने व हीरे के भावों में कम अंतर रहा।
पिछले दो सालों से सराफा बाजार सर्वाधिक प्रभावित रहा। हालांकि सराफा बाजार तो पिछले साल भी सजे थे लेकिन महामारी के प्रकोप को देखते हुए ग्राहकों ने अपेक्षाकृत बाजारों का रुख नहीं किया था। इस बार अक्षय तृतीया के दिन मंगलवार को आभूषणों का भाव यानी 22 कैरेट का भाव 47700 के करीब रहा। जो कोरोना से पूर्व के भावों से अधिक है, लेकिन इस बार अक्षय तृतीया पर ग्राहकों में खरीदारी को लेकर उत्साह दिखा। सराफा कारोबारी पंकज गोयल ने बताया कि सराफा कारोबारियों को अक्षय तृतीया का इंतजार रहता है। शहर में 52 प्रमुख सराफा शोरूम व दुकानें हैं, इसके अलावा छोटी छोटी कई दुकानें हैं। जिले भर में करीब एक हजार से अधिक दुकानें हैं। शहरी सराफा कारोबारियों का पांच से आठ करोड़ रुपये को लगाकर पूरे जिले में कराब 55 करोड़ रुपये का एक दिवसीय कारोबार होने का अनुमान है।
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शादियों की सीजन चल रहा है, सराफा बाजार गुलजार हैं लेकिन इस बार अक्षय तृतीया पर उम्मीद से भी करीब 20 फीसदी अधिक कारोबार हुआ है। ग्राहक इस बार दीर्घकालिक निवेश को लेकर भी काफी सजग दिख रहे हैं। यही कारण है कि वो सोने के साथ साथ हीरे के आभूषणों की ओर से भी आकर्षित हो रहे हैं। हीरे के आभूषण ग्राहकों की पहली पसंद रही, इसकी एक वजह ये भी है कि सोने पर महंगाई है, उस हिसाब से हीरा खरीदने में भाव में अधिक अंतर नहीं है। इसलिए सोने की बजाय हीरे की ओर आकर्षित रहे। दीर्घकालिक निवेश की दृष्टि से भी ये काफी बेहतर है।
विकास बंसल, ओपीएस ज्वैल्स नेहरू पैलेस करनाल। (फोटो-1005)
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