परिजनों ने अमेरिका से शव को वतन लाने के लिए सरकार और प्रशासन से गुहार भी लगाई। मगर कोई उम्मीद की आस नहीं दिखाई दी। उधर, परिजनों ने वीडियो कॉलिंग के जरिए परिजनों ने अपने इकलौते बेटे के अंतिम दर्शन किए। घर पर दो एलईडी स्क्रीन भी लगाई गई थी।
बेटे के लिए मां-बाप ने ढेरों सपने देखे थे, कि वतन आएगा तो उसका जोरशोर के साथ स्वागत करेंगे। मगर यह सभी तैयारियां इकलौते बेटे की मौत के साथ धरी रह गई। अमेरिका में 17 अक्तूबर को हुई सड़क दुर्घटना में हुई करनाल के गांव नरुखेड़ी निवासी युवक की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा है। उन्होंने पैतृक गांव बेटे के शव को लाने के लिए बहुत संघर्ष किया, मगर वह सफल नहीं हो पाए। अमेरिका के न्यू जर्सी सिटी में ही इकलौते बेटे का अंतिम संस्कार हुआ। मृतक ताउ के बेटे राजेश ने भारत को मुखआग्नी दी।
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पिछले कई दिन पहले भारत नरवाल को अमेरिका में दुघटना हो गई। अस्पताल में उसका उपचार चल रहा था, मगर उसकी मौत हो गई। जैसे ही परिवार को मौत की सूचना मिली तो परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने अमेरिका से शव को वतन लाने के लिए सरकार और प्रशासन से गुहार भी लगाई। मगर कोई उम्मीद की आस नहीं दिखाई दी। उधर, परिजनों ने वीडियो कॉलिंग के जरिए परिजनों ने अपने इकलौते बेटे के अंतिम दर्शन किए। घर पर दो एलईडी स्क्रीन भी लगाई गई थी। इस पल गांव में सभी की आंख भर आई। हर किसी आंखों से आंसू छलक रहे थे। अंतिम संस्कार के बाद अब परिजनो का सपना है कि बेटे की अस्थियों को भारत लाया जा सके। इसके लिए वह पुलिस-प्रशासन से भी मदद की गुहार लगा रहे है। ताकि अस्थियों का गंगा प्रवाह कर सके।
मंत्रोच्चारण के साथ हुआ युवक का अंतिम संस्कार
बता दें कि अमेरिका इंडिया से करीब 12 घंटे पीछे है। जब अमेरिका की न्यू जर्सी सिटी के फ्रैंकलिन मेमोरियल पार्क 1800 RT, 27 नॉर्थ बर्न्सविक N, में भारत का अंतिम संस्कार किया जा रहा था उस समय इंडिया में रात के साढ़े 9 बजे थे। भारत का अंतिम संस्कार अमेरिका में पूरे मंत्रों उच्चारण और हिन्दू धर्म के रीति रिवाज़ के अनुसार करीब डेढ़ घंटे तक किया गया।