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सावधान! घरौंडा फ्लाईओवर है सबसे खतरनाक, यहां कम करनी होगी रफ्तार

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गगन तलवार
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करनाल। तेज रफ्तार के कारण जिले में घरौंडा फ्लाईओवर सबसे ज्यादा खतरनाक है। यह खुलासा परिवहन आयुक्त की ओर से तेज रफ्तार को लेकर कराए गए सर्वे की जुलाई में आई रिपोर्ट में हुआ है। अब यहां राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर निर्धारित रफ्तार से 20 किलोमीटर प्रति घंटा की कम रफ्तार पर ही वाहन चल सकेंगे। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए प्रशासन ने सड़क सुरक्षा समिति के साथ चर्चा के बाद अब इस फ्लाईओवर पर अधिकतम 80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार तय की है। जबकि पूरे हाईवे पर 100 किलोमीटर तक प्रति घंटा की रफ्तार तय की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, घरौंडा फ्लाईओवर पर हादसे भी ज्यादा हो रहे हैं।
वहीं प्रदेश भर में हुए इस सर्वे में कुरुक्षेत्र सीमा से पानीपत सीमा तक के 60 किलोमीटर के नेशनल हाईवे-44 पर करनाल में कुल छह जगह पर वाहनों की रफ्तार सबसे तेज सामने पाई गई। अब इन सभी जगहों पर सख्ती बरतते हुए चालान किए जाएंगे। साथ ही यहां निर्धारित रफ्तार के बोर्ड भी लगाए जाएंगे। घरौंडा पुल पर अतिरिक्त तेज रफ्तार के तीन बिंदु करनाल से कुरुक्षेत्र की तरफ और दो बिंदू करनाल से पानीपत की ओर जाते हुए सामने आए हैं। पिछले सात माह में हाईवे पर इन जगहों पर कई हादसे हुए हैं।
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सर्वे में यहां सामने आई सबसे ज्यादा तेज रफ्तार-
- करनाल से कुरुक्षेत्र जाते हुए तरावड़ी क्षेत्र और नीलोखेड़ी में गांव बराना के पास
- कुरुक्षेत्र से करनाल की ओर आते हुए समानाबाहू के नजदीक और मॉडर्न डेयर शामगढ़ के पास
- करनाल से पानीपत की ओर जाते हुए कोहंड क्षेत्र।
- घरौंडा फ्लाईओवर दोनों तरफ अप एंड डाउन में।
60 प्रतिशत हादसों में तेज रफ्तार है वजह
वर्ष 2020 में प्रदेश में 20375 सड़क हादसों में 9564 मौत और 17021 लोग घायल हुए हैं। करनाल जिले में 1364 हादसों में 716 मौत और 1003 लोग घायल हुए थे। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ संदीप कुमार और तेजपाल का कहना है कि हादसों पर हुए सर्वे में 60 प्रतिशत मामलों में वजह तेज रफ्तार पाई गई। हाईवे के अलावा शहर की सड़कों पर भी तेज रफ्तार से वाहन चलने के कारण रोजाना कई हादसे होते हैं। पुलिस द्वारा दर्ज सड़क हादसे के 90 प्रतिशत मामलों में तेज रफ्तार की शिकायत आती है।
जब चालान होता है तो झगड़ते हैं लोग
- वर्ष 2020 में कुल 27602 चालान हुए। इनमें से एक हजार चालान तेज रफ्तार के हैं। सबसे ज्यादा चालान नेशनल हाईवे पर ही होते हैं। अन्य सड़कों पर इस नियम में चालान कम हैं। कई सड़कों पर तो स्पीड लिमिट के बोर्ड भी नहीं हैं। ऐसे में जब पुलिस चालान करती है तो वाहन चालक झगड़ते भी हैं। क्योंकि उन्हें तय रफ्तार सीमा की जानकारी नहीं होती।
यहां भी होते हैं ज्यादा हादसे
- मधुबन के नजदीक पक्का पुल, कर्ण लेक पुल उचाना, करनाल से इंद्री रोड पर, करनाल से मेरठ रोड, चिढ़ाव मोड़, बलड़ी बाईपास सर्विस लेन और कैथल रोड पर निसिंग के पास।
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इस साल सड़क हादसों और मौत की यह रही स्थिति-
माह दुर्घटना मौत घायल
जनवरी 63 38 37
फरवरी 48 35 22
मार्च 60 35 44
अप्रैल 63 41 36
मई 48 22 34
जून 58 28 40
जुलाई 48 26 42
कुल 388 225 255
परिवहन आयुक्त ने पूरे प्रदेश में सर्वे कराया था, करनाल में राष्ट्रीय राजमार्ग पर छह जगह ऐसी चिह्नित हुईं, जहां तेज रफ्तार में वाहन चलते हैं। अब यहां निर्धारित रफ्तार के साइन बोर्ड लगवाए जाएंगे। इसके लिए जुलाई में जारी हुई इस रिपोर्ट केआधार पर पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा गया है। यहां सख्ती बरतते हुए चालान किए जाएंगे। -निशांत कुमार यादव, उपायुक्त करनाल।
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