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मुख्यमंत्री आवास पर आंगनबाड़ी वर्कर्स ने किया प्रदर्शन

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। 22 दिन बाद फिर आंगनबाड़ी वर्कर्स अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास पहुंचीं। करीब सवा घंटे तक प्रेम नगर स्थित मुख्यमंत्री आवास पर उन्होंने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया और मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि संजय बठला को सौंपा। उन्होंने सरकार से जल्द बातचीत करा मांगों का समाधान निकलवाने की मांग की है।
मंगलवार सुबह प्रेम नगर में ही आंगनबाड़ी वर्कर्स एकत्रित हुई।, प्रदर्शन की अध्यक्षता जिला प्रधान रूपा राणा और संचालन उपप्रधान मंजू बवेजा ने किया। अखिल भारतीय किसान सभा के राज्य प्रधान फूल सिह शयोकंद भी धरने पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकार ने आंगनबाड़ी वर्कर्स के साथ वादाखिलाफी की है। आंदोलन करते हुए दो माह से ज्यादा समय बीत चुका है लेकिन अभी तक किसी ने सुध नहीं ली। अब 14 फरवरी से करनाल में राज्य स्तरीय महापड़ाव डाला जाएगा। जब तक सरकार लंबित मांगों को लागू नहीं करती, तब तक सभी जिलों की आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स करनाल में ही दिन रात का महापड़ाव डालेंगी।
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प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की घोषणाओं को लागू करवाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रही आंगनबाड़ी वर्करों को बर्खास्त करने व झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। वे सरकार की घोषणाओं को लागू कराने के लिए ही संघर्षरत हैं। सीटू जिला प्रधान सतपाल सैनी और सचिव जगपाल राणा ने कहा कि आठ दिसंबर से हड़ताल चल रही है। प्रधानमंत्री ने सितंबर 2018 में वर्कर्स के मानदेय में 1500 रुपये और हेल्पर के मानदेय में 750 रुपये बढ़ोतरी की घोषणा की थी। इसी तरह मुख्यमंत्री ने मार्च 2018 में विधानसभा में वर्कर्स को कुशल व हेल्पर्स को अकुशल कर्मचारी का दर्जा और मानदेय में महंगाई भत्ते से जोड़ने की घोषणा की थी लेकिन अभी तक ये घोषणाएं लागू नहीं हुई। इस अवसर पर जोगा सिंह, कुलदीप राणा, पिंकी, सविता, पूनम और कविता मौजूद रहे। ब्यूरो
सरकार की अनदेखी के कारण ही आंगनबाड़ी वर्कर्स आज सड़क पर हैं। जल्द मांगों का समाधान होना चाहिए। - राजबाला
हड़ताल को दो माह से ज्यादा समय हो चुका है लेकिन सरकार अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ रही है। - सुमन
पुरानी घोषणाओं को ही लागू करना हमारे आंदोलन का उद्देश्य है। सरकार हमारा हक हमें क्यों नहीं दे रही - मीना
जितना वेतन सरकार हमें दे रही है, इतने में घर का गुजारा नहीं चलता। यहां बजट के अभाव में केंद्र भी चलाना पड़ता है। - राजरानी
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