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कैसे मिलेगी बच्चों को सुविधाएं, 37 केंद्रों पर आंगनबाड़ी वर्कर और 66 केंद्रों पर हेल्पर नहीं

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सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले-वे स्कूल में परिवर्तित करने का प्रयास कर रही है लेकिन वर्तमान में आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन करना ही मुश्किल हो रहा है। हालात यह हैं कि जिले में 37 केंद्रों पर आंगनबाड़ी वर्कर और 66 केंद्रों पर आंगनबाड़ी हेल्पर के पद खाली हैं। ऐसे में बच्चों को प्ले-वे स्कूल के तहत नई व्यवस्था में सुविधाएं मिलना तो दूर वर्तमान सुविधाएं भी पूरी नहीं मिल पा रही हैं।
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आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में कुल 1479 केंद्र हैं। जहां सभी आयु वर्ग के 115489 बच्चे पंजीकृत हैं यानी 80 बच्चों पर केवल एक आंगनबाड़ी वर्कर कार्यरत हैं। ऐसे में सभी केंद्रों पर बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिलना मुश्किल है और सरकार की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। तीन से छह आयु वर्ग में 60866 बच्चे हैं, जो नियमित केंद्र पर भी आते हैं। इससे छोटे आयु के बच्चों का राशन वर्कर और हेल्पर घर पर पहुंचाती हैं। कोरोना के कारण अभी आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के लिए तो बंद हैं, लेकिन वर्कर और हेल्पर अपने कार्य के लिए नियमित आ रही हैं।
छोटे 34 केंद्रों पर हेल्पर का पद ही नहीं
जिले में कुल 1479 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें से 1442 केंद्रों पर ही आंगनबाड़ी वर्कर कार्यरत हैं। जबकि हेल्पर की बात करें तो 34 छोटे केंद्रों पर हेल्पर का पद ही स्वीकृत नहीं है, यहां केवल वर्कर ही सभी कार्य करती हैं। ऐसे में कुल 1445 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 1379 में ही हेल्पर है, जबकि केंद्रों पर पद खाली है।
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कई बार उठा चुके भर्ती की मांग, मुश्किल से चल रहा काम
आंगनबाड़ी वर्कर यूनियन की जिला प्रधान रूपा राणा का कहना है कि कई बार वे सरकार को आंगनबाड़ी वर्करों और हेल्परों की भर्ती के लिए पत्र भी लिख चुकी हैं। जिला अधिकारियों से भी साक्षात्कार कराकर भर्ती करने की मांग उठाई जा चुकी है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई, ऐसे में काम करना मुश्किल हो रहा। यदि सरकार अभी भी उनकी मांगों पर अनदेखी करती है, तो सड़कों पर उतर प्रदर्शन करना उनकी मजबूरी होगी।
एक कर्मचारी वाले केंद्रों पर लटकते हैं ताले
ऐसे केंद्रों की संख्या भी काफी है, जहां वर्कर या हेल्पर में से एक की ही नियुक्ति है। आंगनबाड़ी वर्करों का कहना है कि ऐसे केंद्रों का संचालन करना काफी मुश्किल हो जाता है, क्योंकि यदि उन्हें कार्यालय के काम से या व्यक्तिगत काम से भी बाहर जाना पड़े, तो केंद्र पर ताला ही लटकता है। अभी तो कोरोना के कारण बच्चे भी नहीं आ रहे हैं, तो ऐसा चल जाता है। लेकिन भविष्य में काफी दिक्कत भरा होगा।
जिले में 37 केंद्रों पर आंगनबाड़ी वर्कर और 66 केंद्रों पर हेल्पर नहीं है। ऐसे में यहां का संचालन करने के लिए कुछ वर्करों को अतिरिक्त चार्ज भी दिया गया है। वे दो केंद्रों का संचालन करती हैं। नई नियुक्ति करना सरकार के हाथ में हैं। योग्यता के आधार पर हेल्पर को वर्कर के पद पर प्रमोट भी किया जाता है। -राजबाला, डीपीओ, महिला एवं बाल विकास विभाग
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