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Karnal News: क्लेम ठुकराने पर आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी पर 67 हजार जुर्माना

Mon, 15 Dec 2025 12:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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करनाल।
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जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्वास्थ्य बीमा क्लेम को खारिज करने के मामले में आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ फैसला दिया है। कंपनी को 67 हजार रुपये ग्राहक को देने होंगे।
आयोग ने कंपनी को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाया है। आयोग ने बीमा कंपनी को शिकायतकर्ता ईश्वर सिंह को उनके इलाज पर खर्च हुए 36,231 रुपये की राशि नौ प्रतिशत ब्याज के साथ देने के आदेश जारी किए हैं। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न के लिए 20 हजार रुपये और मुकदमे में खर्च राशि के 11 हजार रुपये अदा करने होंगे।
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शिकायतकर्ता दनियालपुर गांव निवासी ईश्वर सिंह ने आदित्य बिड़ला हेल्थ इंश्योरेंस से एक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदी थी। पॉलिसी 10 मई, 2023 से 9 मई, 2024 तक मान्य थी। पेट में दर्द और अन्य बीमारी के कारण हालत खराब होने पर उन्हें 29 अगस्त, 2023 को पंचकूला के निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। वहां से अस्पताल ने कैशलेस उपचार के लिए बीमा कंपनी को एक पूर्व प्राधिकरण (प्री-ऑथराइज़ेशन) अनुरोध भेजा था। बीमा कंपनी ने 30 अगस्त, 2023 को इसे ठुकरा दिया था।
इंश्योरेंस कंपनी ने तर्क दिया कि हेपेटिक हेमेंजियोमा, रीनल सिस्ट और टॉन्सिलाइटिस के लिए दो साल की प्रतीक्षा अवधि है, इसलिए कैशलेस क्लेम अस्वीकार किया जाता है। ऐसे में उपभोक्ता को अपने इलाज पर 36 हजार 231 रुपये की राशि जेब से खर्च करनी पड़ी। बीमा कंपनी ने आयोग के समक्ष अपनी दलीलों में यह कहा कि शिकायतकर्ता ने पॉलिसी के तहत सही तरीके से क्लेम दाखिल ही नहीं किया, केवल कैशलेस अनुरोध ही प्राप्त हुआ था। इस पर शिकायतकर्ता ने दावा प्रपत्र की प्रतिलिपि और अन्य आवश्यक दस्तावेज़ आयोग के सामने पेश किए। आयोग ने बीमा कंपनी के इस तर्क को खारिज कर दिया कि क्लेम दाखिल नहीं किया गया था। आयोग ने तर्क दिया कि कोई बीमित व्यक्ति क्लेम दाखिल नहीं करेगा, ऐसा विश्वास नहीं किया जा सकता है।
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झूठे आश्वासन देकर पॉलिसी, क्लेम पर बहाने : आयोगदोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने फैसला दिया कि बीमा कंपनियों का यह एक चलन बन गया है कि वे झूठे आश्वासन देकर पॉलिसी जारी करती हैं। बाद में बहाने बनाकर क्लेम को नकार देती हैं। आयोग ने कहा कि क्लेम को अस्वीकार करना मनमाना और अनुचित था। आयोग ने बीमा कंपनी को शिकायतकर्ता को इलाज पर खर्च 36 हजार 231 रुपये की राशि 30 अगस्त, 2023 से जब तक भुगतान नहीं किया जाता, तब तक नौ प्रतिशत वार्षिक दर ब्याज के साथ जारी करने के आदेश दिए। मानसिक उत्पीड़न के लिए 20 हजार रुपये और मुकदमे पर आए खर्च के रूप में 11 हजार रुपये की राशि 45 दिन के भीतर जारी करने के आदेश दिए।
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