- आईसीएसई टॉपर्स का यू-ट्यूब भी बना सहारा, अल सुबह पढ़ाई और नियमित रिवीजन से पाया मुकाम
गगन तलवार
करनाल। आईसीएसई के परीक्षा परिणाम में जिले का नाम रोशन करने वाले होनहार विद्यार्थियों ने सेल्फ स्टडी के बल पर सफलता के झंडे गाड़े हैं। कक्षा 10वीं और 12वीं में पहले दो स्थानों पर कब्जा जमाने वाले चारों विद्यार्थियों में से किसी ने कोचिंग सेंटर या ट्यूशन का रुख नहीं किया। स्कूल में जो शिक्षकों ने पढ़ाया, घर आकर उसकी नियमित रिवीजन करते हुए उन्होंने यह मुकाम पाया है।
अमर उजाला से बातचीत में मेधावी विद्यार्थियों ने बताया कि सेल्फ स्टडी के दौरान यू-ट्यूब पर पाठ्यक्रम से जुड़े वीडियो व स्कूल के शिक्षकों का मार्गदर्शन ही उन्होंने लिया। परीक्षा के दिनों में रात को जल्द सोना और सुबह चार बजे उठकर पढ़ाई करके पाठ्यक्रम को पूरा किया। अब किसी का विदेश में पढ़ाई करने का तो किसी का एमएनसी यानी मल्टी नेशनल कंपनी का सीईओ बनने का सपना है। इसके अलावा कुछ विद्यार्थियों ने न्यायाधीश, इंजीनियर, वकालत या एआई के क्षेत्र में कॅरिअर बनाने की तैयारी भी शुरू कर दी है।
कक्षा : 12वीं
अंक : 97 प्रतिशत
स्थान : प्रथम
एएसआई के बेटे ने किया टॉप, ऑस्ट्रेलिया से करेंगे वकालत
मूल रूप से यमुनानगर एवं करनाल की पुलिस लाइन निवासी गुरसेवक ने कक्षा 12वीं में 97 प्रतिशत अंक से टॉप किया है। करनाल पुलिस में एएसआई बिंदर सिंह के बेटे की न्यायिक सेवा में जाने की इच्छा है। इसके लिए वे ऑस्ट्रेलिया से आगे की पढ़ाई करेंगे। उनकी दो बहनें कनाडा से पढ़ाई कर रही हैं। छात्र ने बताया कि उसने कोई ट्यूशन नहीं ली। घर पर ही पढ़ाई की। पाठ्यक्रम में शिक्षकों और यू-ट्यूब की मदद ली। पढ़ाई के लिए कोई तय समय नहीं था। परीक्षाओं के दिनों में रोजाना सुबह चार बजे उठकर रिवीजन की। गुरुसेवक के पॉलिटिकल साइंस में 99 और अर्थशास्त्र में 98 अंक हैं।
कक्षा : 12वीं नॉन मेडिकल
अंक : 96 प्रतिशत
स्थान : द्वितीय
गूगल के सीईओ की तरह देश की पहचान बनने का सपना
वसंत विहार निवासी कनिका का गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई की तरह किसी एमएनसी कंपनी का सीईओ बनकर देश की पहचान बनने का सपना है। दिल्ली की कंस्ट्रक्शन कंपनी में नौकरी करने वाले पिता दर्शन सिंह और गृहिणी मां कलावती की इस बेटी ने 96 प्रतिशत अंक से कक्षा 12वीं नॉन मेडिकल की परीक्षा पास की है। कंप्यूटर साइंस और एआई में बीटेक करने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। छात्रा ने बताया कि शिक्षकों ने जो स्कूल में पढ़ाया केवल उसे ही घर आकर रिवाइज किया। कोई ट्यूशन नहीं ली। रोजाना रात को जल्दी सोए और सुबह साढ़े पांच बजे उठकर दो घंटे रिविजन की। छात्रा के फिजिकल एजूकेशन में 98 और अंग्रेजी 97 अंक हैं
कक्षा : 10वीं
अंक : 95.2 प्रतिशत
स्थान : प्रथम
दादी और चाचा-चाची ने पढ़ने के लिए किया प्रेरित
शेरगढ़ टापू गांव की रहने वाली जेनिफर के माता-पिता अमेरिका में हैं और वहां स्टोर पर नौकरी करते हैं। छात्रा गांव में अपनी दादी और चाचा-चाची सहित संयुक्त परिवार में रहती हैं। उन्होंने बताया कि परिवार ने उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। 95.2 प्रतिशत अंक से कक्षा दसवीं में टॉप करने वाली बेटी का इंजीनियर बनने का सपना है। चचेरे भाई-बहनों में अब तक सबसे ज्यादा अंक इसी बेटी ने लिए हैं। विदेश में रह रही मां रीना, पिता वीरेंद्र और किसान चाचा उनके रोल मॉडल हैं। जेनिफर ने भी कोई ट्यूशन नहीं लगाया। रोजाना सुबह छह बजे उठकर पढ़ाई की और सफलता पाई। छात्रा के फिजिकल एजूकशन में 100 और हिंदी में 99 अंक है। अब 11वीं कक्षा में नॉन मेडिकल में दाखिला लिया है।
कक्षा : 10वीं
अंक : 95 प्रतिशत
स्थान : द्वितीय
वकील पिता से प्रेरित होकर जज बनने का सपना
आरकेपुरम निवासी वर्णिका के पिता विजय कांबोज एडवोकेट हैं। उनकी मेहनत और प्रेरणा से बेटी ने जज बनने का सपना देखा है। इसे पूरा करने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है। कक्षा 10वीं में 95 प्रतिशत अंक से द्वितीय रही इस बेटी का नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी बैंगलोर में दाखिला लेने के लिए कक्षा 11वीं में ही तैयारी शुरू कर दी है। छात्रा के हिंदी में 100 अंक हैं। कानूनी दांवपेंच की जानकारी घर पर पिता से मिलती है। वर्णिका ने भी कोई ट्यूशन नहीं ली। ऑनलाइन किताबें मंगवाई और सैंपल पेपर हल करके परीक्षा पास की है। रोजाना सुबह चार बजे उठकर रिविजन की।