स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू न करने में भाजपा बेनकाब : रतनमान
अमर उजाला ब्यूरो
निसिंग।
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने ‘शहादत किसान दिवस’ पर आयोजित किसान पंचायत में संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा सरकार वादे के मुताबिक स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने में पूर्ण रूप से विफल साबित हो रही है। जिसका खामियाजा सरकार को आने वाले चुनाव में भुगतना पडे़गा। प्रदेश में वीर किसानों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। बल्कि किसानों की मांगों को लेकर साल 2018 को किसान क्रांति वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर कर आंदोलन किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अब किसान चुप बैठने वाला नहीं है। आरपार की लड़ाई लड़ने के लिए हजारों किसान पांच जनवरी को नारनौंद में आयोजित किसान महापंचायत में संकल्प ले चुके हैं।
रविवार को माता सुंदरी खालसा गर्ल्स कॉलेज के पास करीब 25 साल पूर्व पुलिस की गोलीबारी में मारे गए किसानों को लेकर शहादत दिवस मनाया गया। प्रदेशभर के सैकड़ों किसानों ने पहुंचकर किसान लखपत और मामचंद के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। किसान नेता रतनमान ने कहा कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू न किया जाना भाजपा सरकार की सबसे बड़ी नाकामयाबी है। 60 साल के बाद किसान को पांच लाख रुपये बतौर पेंशन देने, पांच लाख रुपये मेडिक्लेम देने तथा किसान मजदूर को संपूर्ण कर्ज मुक्त होने तक किसान आंदोलन जारी रहेगा। किसान नेताओं ने एक स्वर में कहा कि सभी दलों की सरकार किसान यूनियन को खत्म करने का प्रयास करती है। लेकिन ऐसी सरकारों के ऐसे मंसूबे कभी पूरे नहीं हो पाएंगे। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि यूनियन के संगठन को मजबूत बनाने के लिए अधिक से अधिक किसानों को जोड़ा जाए, ताकी सभी किसान संगठित होकर सरकार के खिलाफ हकों की लड़ाई लड़ सके। इस मौके पर कुलदीप सिंह बब्बर, यशपाल राणा औंगद, सुखा सिंह लागर, सुरेंद्र सागवान, महताब कादियान, अजीत सिंह हाबड़ी, मांगा सिंह लागर, मलूक सिंह चीमा, माइचंद, बलवान सिंह पाई, कबुल सिंह, राजेंद्र आर्य दादूपुर, महिंद्र सिंह बदोरत्ता, दलबीर सिंह, पाला राम कैथल, सुरेंद्र सांगवान, प्रेमचंद शाहपुर, बाबू राम सहित अन्य किसान नेताओं ने भी महापंचायत को संबोधित किया।