करनाल। भारत बंद के आह्वान का परिवहन व्यवस्था पर भी असर रहा। सड़कें जाम होने से राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित नए बस अड्डे पर सोमवार को करीब 600 बसें नहीं पहुंच सकीं। रविवार को यहां 675 बसों का ठहराव हुआ था। जबकि सोमवार सुबह नौ बजे तक 62 बसें पहुंच सकी। सुबह सात से नौ बजे के बीच केवल तीन बसें पहुंच पाईं। कुछ यात्रियों ने पूरे दिन बस अड्डे पर इंतजार किया। राष्ट्रीय राजमार्ग पर यात्री पैदल भटकते रहे। उन्हें वाहन नहीं मिले। बस अड्डा प्रभारी बलविंद्र सिंह ने बताया कि चार बजे जाम खुलने के बाद यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा। जनता को जाम के बारे में पता था इसलिए यात्री बस अड्डे पर नहीं आए।
दूसरी ओर स्थानीय रोडवेज डिपो की 132 बसें दिन भर रुकी रहीं। पुराना बस अड्डे पर कर्मचारी ड्यूटी पर आए लेकिन बसें नहीं चलीं। रोडवेज को एक दिन में करीब 10 लाख का राजस्व मिलता है। जीएम रोडवेज कुलदीप सिंह ने कहा कि शाम चार बजे के बाद जिस भी काउंटर पर सवारियां मिलेंगी उस मार्ग पर बस भेजी जाएगी। रात्रि बस सेवा चलाई जाएगी।
जीटी रोड पर पैदल भटकते रहे यात्री
करनाल। बिहार के शिवहर जिला निवासी श्रमिक राजीव, रमेश पासवान व राजा राम को घीड़ गांव से पटियाला जाना था। पुराने बस अड्डे से बस नहीं मिलने पर पैदल आईटीआई चौक पहुंचे। यहां से भी पैदल अंबाला की राह पकड़ ली। राष्ट्रीय राजमार्ग पर बसें नहीं मिलीं और निजी वाहन भी बहुत कम नजर आए। हर बिंदू पर यात्री इंतजार करते दिखाई दिए।