डिपो पर पहुंचने वाले गेहूं रास्ते में हो रहे गायब
अमर उजाला ब्यूरो
घरौंड़ा। सार्वजनिक खाद्य वितरण प्रणाली(पीडीएस) के तहत गरीब परिवारों को मिलने वाला जुलाई माह का राशन सरकारी गोदामों से डिपो होल्डरों तक पहुंचना शुरू हो चुका है। जिसके साथ शुरू हो गया है गेहूं के वजन को लेकर विवाद। डिपो होल्डर ने आरोप लगाए हैं कि पिछले माह जो गेहूं उनको मिला था, उसका वजन एक से डेढ़ क्विंटल तक कम पाया गया था। ऐसे में इस बार गेहूं लेने के लिए क्षेत्र के कई डिपो होल्डर अपने गेहूं का वजन करवाने के लिए धर्म कांटे पर पहुंच रहे हैं।
खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से भेजे जा रहे गेहूं के वजन को लेकर डिपो होल्डरों का ठेकेदारों पर से भरोसा उठ गया है। अपने डिपो पर गेहूं रिसीव करने से पहले डिपो संचालक धर्म कांटे पर पहुंचकर अपने गेहूं को चेक कर रहे है। हैरानी की बात यह है कि दोनों पक्षों के वजन चेक करने पर अलग-अलग वजन सामने आ रहा है। जिससे विभागीय अधिकारियों व ठेकेदार की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है। उठान से लेकर डिपो होल्डर तक पहुंचनें में ही कई क्विंटल गेहूं का अंतर आ जाता है। शनिवार को अराइपुरा रोड स्थित कृष्णा धर्म कांटे पर राशन की गेहूं का वजन करवाने के लिए डिपो होल्डर एकत्रित हुए। जहां पर शहर के दो डिपो होल्डरों का माल आया था। विभाग द्वारा गेहूं के कट्टों समेत कैंटर का वजन 19 क्विंटल, 920 किलोग्राम दिखाया गया था, लेकिन डिपो होल्डर ने जब माल कम होने की आशंका जता कर दूसरे धर्म कांटे पर कैंटर को ले जाने के लिए कहा तो वहां पर मौजूद ठेकेदारों ने गेहूं से भरा एक कट्टा ओर उस कैंटर में डाल दिया। जिससे यह स्पष्ट था कि केंटर में 45 से 50 किलो कम तोला गया था। इसके बाद उक्त डिपो होल्डर ने अन्य धर्म कांटे पर वजन करवाया तो वहां कैंटर का वजन 19 क्विंटल, 965 किलोग्राम मिला। इसपर डिपो होल्डरों ने रोष जताते हुए कहा कि उनको पिछले माह भी राशन एक से डेढ क्विंटल तक कम मिला था। जिससे उनको संदेह हुआ और वे अबकी बार मौके पर ही केंटर का वजन करवाने के लिए पहुंच गए और वजन में गड़बड़ी भी उजागर हो गई।
डिपो होल्डरों द्वारा वजन को लेकर किसी प्रकार की कोई शिकायत नही मिली है। यदि वजन को लेकर डिपो होल्डरों को कोई दिक्कत है तो वे लिखित शिकायत विभाग को करें। जिसकी निष्पक्ष जांच की जाएगी। यदि किसी प्रकार की कोई कोताही बरती जा रही है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।- अनिल कुमार, डीएफएससी, करनाल।