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जीएसटी इंपैक्ट- सूरत से नहीं आ रहा कपड़ा, कपड़ा बाजार को 1

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जीएसटी इफैक्ट: सूरत से नहीं आ रहा कपड़ा, 18 दिन में 9 करोड़ का झटका
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू हुए आज पूरे 18 दिन हो गए, लेकिन बाजारों में अब तक ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। सबसे ज्यादा बुरा असर कपड़ा बाजार पर है, एक जुलाई से ही शहर के सभी कपड़ा बाजार सूने पड़े हैं। कपड़ों की बिक्री में करीब 80 फीसदी तक गिरावट आई है। इसका सबसे बड़ा कारण है जीएसटी के विरोध में कपड़ा व्यवसाय का हब गुजरात के सूरत में विरोध प्रदर्शन शुरू होना। इसी कारण यहां से आने वाला माल पूरी तरह से बंद हो गया है। नया माल न आने के कारण ग्राहक भी बाजार से गायब हो गए हैं। इससे सीएम सिटी के कपड़ा बाजार में मौजूद दुकानों की चमक गायब हो गई है। दुकानदार मजबूरन पुराना माल बेच कर काम चला रहे हैं।
विदित हो कि कपड़े पर पहली बार 5 फीसटी टैक्स के रूप में जीएसटी लगा है, जिसके कारण जीएसटी का सबसे ज्यादा विरोध कपड़ा व्यापारी कर रहे हैं। जीएसटी के विरोध में जहां प्रदेश के कपड़े व्यापारियों ने कई बार अपनी दुकानें बंद कर प्रदर्शन किया, वहीं कपड़ा व्यवसाय का हब गुजरात के सूरत और अहमदाबाद में व्यापारी कई दिनों से अपनी दुकानों को िबंद कर सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हैं। जिससे यहां से आने वाला माल पूरी तरह बंद हो गया है। इसका असर दिल्ली और अमृतसर के मार्केट पर भी पड़ा है और यहां के माल भी आने बंद हो गए हैं।
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सूरत से लेकर अमृतसर तक दौड़ लगा रहे व्यापारी, नहीं मिल रहा माल
कपड़ा बाजार पर मंदी का असर जीएसटी लागू होने के पहले ही दिखने लगा था। बाजारों में नया माल आना 25 जून से ही पूरी तरह बंद हो गया था। कुछ व्यापारियों ने जीएसटी के डर से नया माल नहीं मंगवाया तो कुछ ने हिसाब-किताब से बचने के लिए। जब जीएसटी लागू हो गया, तो कुछ दिन बाद कपड़े के थोक व्यापारी कपड़ा लेने के लिए सूरत, अहमदाबाद, अमृतसर के चक्कर लगाने लगे। लेकिन अब इन्हें कहीं पर भी माल नहीं मिल रहा। कपड़ा व्यवसायी नीरज ने बताया कि इस समय कहीं पर भी कपड़ा नहीं है। देश के सभी प्रमुख बाजारों में कपड़े को लेकर मारामारी है। दिल्ली के बाजार में कुछ माल मिल रहा है, लेकिन वह पुराना स्टॉक है। उसे वही व्यापारी ले रहे हैं, जिनकी दुकान पूरी तरह खाली हो गई है।
बाजार को प्रतिदिन 50 लाख का घाटा
सीएम सिटी के कपड़े के होलसेल और रिटेल मार्केट में करीब 500 दुकानें हैं, जहां पर प्रतिदिन करीब 60 लाख रुपए का कारोबार होता। जीएसटी लागू होने के बाद एक जुलाई से यह लगभग पूरी तरह ठप्प हो गया है। इसके कारण बाजार को प्रतिदिन करीब 50 लाख रुपए का घाटा हो रहा है। एक जुलाई से लेकर अब तक कपड़ा बाजार को करीब 9 करोड़ रुपए का झटका लग चुका है। दुकानदारों का कहना है कि जीएसटी लागू होने से पहले ही सूरत और अहमदाबाद से आने वाले सूट सलवार, पार्टी वियर ड्रेस, कढ़ाई से लबालब सूट, डेलीवेज कुर्ते व अनस्टिच कपड़ा पूरी तरह से बंद हो गया है। पहले जहां दुकानों पर ग्राहकों का तातां लगा रहता था, वहीं अब दिन में एक-दो ग्राहक ही आता है। वह भी माला पसंद न होने पर लौट जाता है। जीएसटी के कारण दुकानदारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
व्यापारियों को नहीं दिख रहा कोई रास्ता
जीएसटी के बाद मंदी के मार झेल रहे कपड़ा व्यापारियों को कोई रास्ता नहीं दिखा दे रहा है। व्यापारी सुरेंद्र पसीजा ने कहा कि एक तरफ हम जीएसटी लागू होने के बाद वैसे भी परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ नया माल न आने से दुकानदारी पूरी तरह बंद हो गई है। हम जिस तरह सुबह खाली हाथ आते हैं, वैसे ही शाम को लौटना भी पड़ता है। जीएसटी के कारण लगे इस आर्थिक मंदी से निकलने का कोई रास्ता नहीं दिखाई दे रहा है। साथ ही सरकार भी कुछ करने की जगह हाथ पर हाथ धरे बैठी है। अगर यही हाल रहा तो जुलाई अंत तक सभी दुकानों में ताला लग जाएगा।
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सरकार 5 की जगह 10 फीसदी टैक्स लगाए, लेकिन व्यवस्था सही करे
थोक कपड़ा मार्केट के प्रधान योगेश भुगड़ा ने कहा कि हम पहले भी कह चुके हैं कि व्यापारी टैक्स के खिलाफ नहीं है। सरकार चाहे तो 5 की जगह 10 फीसदी टैक्स लगाए, लेकिन टैक्स लगाने की व्यवस्था सही करे। हमारी सरकार से पहले ही मांग थी कि दुकानदारों से जीएसटी लेने की जगह सीधे कपड़ा बनाने वाली फैक्ट्रीयों से टैक्स लिया जाए। हम जीएसटी देने को तैयार हैं।
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