ट्यूबवेल कनेक्शन व ट्रांसफार्मर के नाम पर लुट रहे किसान, देख रही सरकार
विनीत पांडेय
करनाल। अन्नदाता किसान खेतों में दिन रात मेहनत कर अधिकारी से लेकर नेता तक का पेट भरते हैं, लेकिन यही अन्नदाता बिजली निगम के दफ्तर में पैर रखते ही चौतरफा लूट के शिकार हो जाते हैं। ट्यूबवेल कनेक्शन हो या फिर नया ट्रांसफार्मर, इनको हर उस जरूरत के नाम पर लूटा जाता है, जिसकी इन्हें जरूरत होती है। नया ट्यूबवेल कनेक्शन लेने के लिए सीएम सिटी में चार साल की लंबी वेटिंग चल रही है, मजबूरन किसान लाखों रुपए खर्च कर तत्काल स्कीम के तहत कनेक्शन ले रहे। लेकिन कनेक्शन मिलने के बाद भी इनकी मुश्किलें कम नहीं होती। खेतों में ट्रांसफार्मर लगते ही चोर उसपर धावा बोल देते हैं। सीएम सिटी में सिर्फ मई माह में ही 200 ट्रांसफार्मर चोरी हुए। कनेक्शन और ट्रांसफार्मर के फेर में उलझे किसान कंगाल आज होते जा रहे हैं, लेकिन इनकी समस्या सुनने वाला कोई नहीं है।
आज के समय में किसानों की सबसे बड़ी समस्या बिजली निगम के दफ्तर हैं। यहां नया बिजली कनेक्शन लेने से लेकर बिल सही कराने ट्रांसफार्मर लगने और खराब लाइन की मरम्मत कराने जैसे हर छोटे-बड़े कार्य के लिए पैसे देने पड़ते हैं। इसका ताजा उदाहरण है शामगढ़ का वह किसान, जो निगम अधिकारियों द्वारा पैसे मांगने व सुनवाई न होने से परेशान होकर सचिवालय के सामने ट्रांसफार्मर में आग लगा दी थी। निगम अधिकारियों द्वारा सिर्फ इसी किसान का शोषण नहीं किया गया, यह शोषण हर उस किसान के साथ होता हैजो निगम के दरवाजे पर पहुंचता है। अगर आपके जेब में पैसे हैं तो आपका काम तत्काल हो जाएगा, अगर पैसे नहीं तो महीनों तक दफ्तर के धक्के खाते रहो। इस समय किसानों के लिए ट्यूबवेल कनेक्शन सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुए है। लाख प्रयास के बावजूद भी किसानों को ट्यूबवेल कनेक्शन उपलब्ध नहीं हो पा रहा। सीएम सिटी में इस समय ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए लंबी वेटिंग है।
-----------------------
बॉक्स
चार साल से 160 आवेदन वेटिंग में-
ट्र्यूबवेल कनेक्शन के लिए वर्ष 2013 में आवेदन करने वाले 160 किसान अभी भी कनेक्शन मिलने का इंतजार कर रहे हैं। बिना बिजली के इन किसानों के ट्यूबवेल बंद पड़े हैं और बिना पानी के फसलें चौपट हो रही है, लेकिन लाख गुहार लगाने के बाद भी अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। तरावड़ी के किसान विजय ने बताया कि उसने मार्च 2013 में नए कनेक्शन के लिए 40 हजार रुपए जमा कराए थे। नियमों को पूरा करने के लिए पहले से ट्यूबवेल का बोर भी करा लिया था, लेकिन आज तक कनेक्शन नहीं मिला। इसी तरह असंध के मनप्रीत ने कहा कि कनेक्शन के लिए निगम का चक्कर लगाते-लगाते अब थक चुका हूं। मुझे मालूम है कि बिना अतिरिक्त पैसे दिए कनेक्शन नहीं मिल पाएगा।
-----------------------
बॉक्स
तत्काल स्कीम में लाखों रुपए देकर मिल रहा कनेक्शन-
जहां नार्मल अप्लाई में कनेक्शन की लंबी वेटिंग है, वहीं निगम के तत्काल स्कीम में कोई भी किसान लाखों रुपए खर्च कर कनेक्शन ले सकता है। इस स्कीम के तहत किसान को ट्रांसफार्मर के साथ खंभे, तार व लाइन खींचने के दौरान आने वाले पूरे खर्च को वहन करना होगा, जो डेढ़ से दो लाख के बीच बैठता है। आम किसान इतना पैसा नहीं खर्च कर सकता, इसलिए वह निगम अधिकारियों के धक्के खाने पर मजबूर है।
-----------------------------
बॉक्स
किसानों के ट्रांसफार्मर पर चोरों की नजर-
किसान सिर्फ निगम में ही शोषण का शिकार नहीं हो रहे, बल्कि चोरों के भी ये आसान शिकार बन रहे हैं। इस समय खेतों से दनादन ट्रांसफार्मर चोरी हो रहे हैं। मई माह में ही जिले के विभिन्न इलाकों से 200 ट्रांसफार्मर चोरी हो गए। वहीं 20 जून तक ट्रांसफार्मर चोरी की संख्या 160 पहुंच गई है। अपनी गाढ़ी कमाई से ट्रांसफार्मर खरीदकर लाने वाले किसान चोरी होने के बाद फिर से निगम व पुलिस के धक्के खाने पर मजबूर हो जाते हैं। किसान नेता राजेंद्र आर्य दादूपुर ने बताया कि ट्रांसफार्मर चोरी होने पर कई दिनों तक एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस के धक्के खाने पड़ते हैं। किसी तरह ले-देकर अगर एफआईआर दर्ज भी हो जाता है, तब भी किसान को नया ट्रांसफार्मर मिलने में महीनों लग जाते हैं। निगम ट्रांसफार्मर का 20 फीसदी शुल्क जो वसूलता है, वह अलग।
किसानों को होने दी जाएगी कोई परेशानी-
ट्यूबेवल कनेक्शन के लिए 2013 तक डिमांड नोटिस जारी कर दिए गए हैं। ट्रांसफार्मर लेने में अगर किसानों को किसी तरह की परेशानी होती है, तो वे एसडीओ, एक्सईएन के अलावा सीधे मुझसे शिकायत कर सकते हैं। नियमानुसार 48 घंटे के अंदर किसानों को ट्रांसफार्मर उपलब्ध करा दिया जाएगा।-एके रहेजा, एसई, करनाल।
वर्जन
जब किसान से पैसे मौके पर ही लेते हैं, तो बाजार की तरह मौके पर ही ट्रांसफार्मर व कनेक्शन दिया जाना चाहिए। यह सरासर किसानों के साथ ठगी है। प्रदेश सरकार व बिजली निगम किसानों को लूटने का काम कर रही हैं, लेकिन इसको लेकर किसी भी सरकार ने कदम नहीं उठाये।
-रत्न मान, प्रदेशाध्यक्ष, भाकियू।