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जीएसटी के विरोध में कपड़ा व्यापारियों का बंद, भटकते रहे ग्राहक

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जीएसटी के विरोध में कपड़ा व्यापारियों का बंद
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करनाल। जीएसटी लागू होने को अभी 15 दिन बाकी हैं, लेकिन व्यापारी अभी से इसके विरोध में सड़कों पर उतरने लगे हैं। वीरवार को कपड़ा व्यापारियों ने विरोध जताया। कपड़े पर पहली बार जीएसटी के रूप में लागू हो रहे टैक्स के विरोध में कपड़ा व्यापारियों ने अपनी दुकानों को बंद कर प्रदर्शन किया। दोपहर बाद व्यापारियों ने लघु सचिवालय पहुंचकर डीसी को पीएम के नाम ज्ञापन सौंपकर कपड़े से जीएसटी वापस लेने की मांग की। बाजार पूरी तरह बंद होने के कारण कपड़ा खरीदने आए ग्राहक दिनभर इधर से उधर भटकते रहे। कपड़ा व्यापारियों के एक दिन बंद से ही जिले में करीब 50 लाख रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ।
व्यापारियों ने यह बंद करनाल सूट एंड साड़ी ट्रेडर्स एसोसिएशन, होलसेल क्लाथ मार्केट, हैंडलूम एसोसिएशन के बैनर तले बुलाया था। व्यापारी सुबह से ही बाजार में एकत्र होने लगे, जिन व्यापारियों ने दुकानें खोली भीं, उन्होंने भी कुछ देर बाद दुकान को बंद कर दिया। करनाल सूट एंड साड़ी ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रधान नरेंद्र बांबा ने कहा कि देश में पहली बार आम आदमी की जरूरत वाले कपड़े को टैक्स नेट में लाया गया है। हमारी चिंता 5 पर्सेंट टैक्स से ज्यादा इसके अनुपालन में होने वाली दिक्कतों और आधिकारिक शोषण को लेकर है। बड़ी कपड़ा मिलें तो यह टैक्स झेल सकती हैं, लेकिन छोटे ट्रेडर जीएसटी लगते ही प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाएंगे। इसलिए सरकार से हमारी मांग है कि सरकार जीएसटी लगाए, लेकिन यह मैन्यूफेक्चिरिंग के समय लगे, दुकानदार द्वारा ग्राहक को माल बेचते समय जीएसटी न वसूला जाए। बांबा ने कहा कि कपड़ा व्यापारियों की सबसे बड़ी चिंता जीएसटी के अनुपालन को लेकर है। जीएसटी लगने पर हर 10 दिन बाद दुकानदारों को इसका हिसाब देना होगा। कपड़ा व्यापारी इतने पढ़े-लिखे नहीं होते कि वे जीएसटी के गुणा-भाग को समझ सकें। इसके लिए उन्हें अलग से कर्मचारी रखना पड़ेगा, जो व्यापारियों के बजट से बाहर होगा। वहीं महासचिव सुनील गुप्ता ने कहा कि जीएसटी से कपड़ा व्यापारी बुरी तरह से डरे हुए हैं, उन्हें लगता है कि जीएसटी के बाद उनका व्यापार पूरी तरह से चौपट हो जाएगा। अगर सरकार ने इसे वापस न लिया तो यह बंद आंदोलन का रूप ले सकता है।
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दिनभर भटकते रहे खरीदार
कपड़ा व्यापारियों के बंद का असर बाजार पर पूरी तरह दिखा। अगर बड़े शोरूम और दो-चार दुकानों को छोड़ दिया जाए तो शहर में स्थित कपड़े की करीब 500 दुकानें वीरवार को बंद रहीं। ग्राहक दिनभर एक दुकान से दूसरी दुकान भटकते रहे। अपने बच्चों के साथ असंध से कपड़ा खरीदने आए रामफल ने कहा कि स्कूल बंद होने के कारण बच्चों के साथ घूमने का प्लान बनाया था। शुक्रवार को जाना है, इसलिए आज सभी के लिए कपड़ा खरीदने यहां आया था, लेकिन सभी दुकानें बंद होने के कारण हमारी मुसीबत बढ़ गई है। इसी तरह घरौंडा से आए शिवकुमार, राकेश, करनाल के बलविंद्र, सुषमा, रोशनी को भी बाजार बंद होने के कारण लौटना पड़ा। बाजार पूरी तरह बंद होने के कारण ग्राहकों को निराश होकर लौटना पड़ा।

कपड़ा व्यापारियों की समस्या
जीएसटी लागू होने के बाद कपड़ा व्यापारियों की एक नहीं बल्कि कई समस्याएं बढ़ जाएंगी। सबसे बड़ी समस्या कपड़ा व्यापारियों का कम पढ़ा लिखा होना है। यदि जीएसटी लागू हुआ तो रिटर्न भरने व क्रय-बिक्री का पूरा रिकार्ड बनाने के लिए एक अतिरिक्त कर्मचारी के अलावा सीए को भी हायर करना पड़ेगा, जिससे खर्च बढ़ जाएगा। दूसरी समस्या उधार में बिकने वाला कपड़ा है। कपड़ा के ज्यादातर दुकानों पर माल उधार में ही बिकता है, लेकिन उन्हें जीएसटी का भुगतान हर दिन में ही करना होगा। वहीं तीसरी समस्या कपड़ा व्यवसाय फैशन पर चलता है। फैशन कुछ दिनों बाद ही आउट ऑफ हो जाता है। इसलिए माल वापस भी करना पड़ जाता है। इससे व्यापारियों को लगता है कि कपड़े पर टैक्स का कोई सिस्टम नहीं बन पाएगा।
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जीएसटी का बढ़ सकता है विरोध
जीएसटी के विरोध में अभी तो सिर्फ कपड़ा व्यापारी ही सड़क पर उतरे हैं, लेकिन जल्द ही अन्य व्यवसायी भी इसका विरोध शुरू कर सकते हैं। अभी तक व्यापारी जीएसटी का स्वागत कर रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे इसे लागू करने की तारीख नजदीक आ रही है, बाजार में इसके विरोध का स्वर तेज होने लगा है। इलेक्ट्रानिक वस्तुओं के विक्रेता भी जल्द इसका विरोध शुरू कर सकते हैं। इलेक्ट्रानिक दुकानदारों का कहना है कि जीएसटी में सबसे ज्यादा टैक्स इलेक्ट्रानिक सामान पर ही लगाया जा रहा है। इससे ग्राहकों को जीएसटी लागू होने पर अधिक दाम चुकाना पड़ेगा और ग्राहक खरीदारी बंद कर सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो हमारा व्यापार प्रभावित होगा, इसलिए हम भी इसके विरोध का रणनीति बना रहे हैं। वहीं ऑटोमोबाइल, आनाज विक्रेता, लोहा व्यापारी भी जीएसटी के विरोध के रणनीति पर मंथन कर रहे हैं।
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