माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। अमरुत योजना के तहत 2017 में शहर की बाहरी कॉलोनियों में बेहतर सीवरेज नेटवर्क देने व घरों से निकलने वाले पानी को उपचारित कर फिर से सिंचाई योग्य बना खेती के लिए उपलब्ध कराने के लिए परियोजना शुरू की गई थी। जिसकी लागत 178 करोड़ रुपये थी, लेकिन बाद में इस परियोजना में बड़ी कटौती कर इसकी लागत को 130 करोड़ रुपये कर दिया गया। परियोजना के पूर्ण होने की अवधि आज 28 फरवरी को खत्म हो गई है, लेकिन परियोजना अभी अधूरी है।
भले ही दावा किया जा रहा हो कि 85 से 90 फीसदी कार्य पूरा कर लिया गया है लेकिन मौके पर देखकर नहीं लगता कि आगामी तीन महीने में भी यह कार्य पूरा हो पाएगा। न बाहरी कॉलोनियों का सीवरेज नेटवर्क जोड़ा गया है, न दोनों एसटीपी तैयार हो पाए हैं। इस कारण समय पर कार्य खत्म न करने पर नगर निगम ने निर्माणदायी एजेंसी टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड व खिलाड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. को नोटिस जारी कर दिया है।
निर्माणदायी संस्था के सीवरेज पाइप लाइन कार्य के इंचार्ज जयप्रकाश ने बताया कि शहर की सभी कॉलोनियों में करीब 140 किलोमीटर पाइप लाइन डालने का कार्य किया गया है, एक-दो किलोमीटर को छोड़कर शेष कार्य पूरा कर लिया है। सीवरेज का कनेक्शन करने का कार्य किया जा रहा है। जिसे शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद पाइपलाइन से कॉलोनियों का पानी एसटीपी तक पहुंचना शुरू हो जाएगा। वार्ड तीन के पार्षद प्रतिनिधि परमजीत लाठर ने भी निगमायुक्त से मिलकर परियोजना को शीघ्र पूरा करा सुचारु कराने की मांग की है।
लाखों की आबादी को मिलेगा फायदा
शहर की आबादी लगातार बढ़ रही है। बाहरी कॉलोनी जैसे फूसगढ़, विकास नगर, बसंत विहार, धौलगढ़, सैदपुरा के अलावा अन्य डैफिशिएंट कॉलोनियों में इस परियोजना से जलनिकासी के लिए सीवरेज पाइपलाइन डाली जा रही है। पाइप लाइन करीब 140 किलोमीटर डाली जानी है। वहीं इन पाइपलाइन को फूसगढ़ में बन रहे 20 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) क्षमता वाले एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) व शिव कॉलोनी में आठ एमएलडी का एसटीपी बनाया जा रहा है। परियोजना की कुल लागत 17810 लाख रुपये स्वीकृत की गई थी लेकिन समय के साथ इसे सीमित करते हुए 13010 लाख रुपये तक कर दिया है। यह परियोजना पूरी होने पर शहर की बाहरी कॉलोनियों की लाखों की आबादी को जलभराव से छुटकारा तो मिलेगा ही घरेलू पानी की निकासी की समस्या का भी समाधान हो जाएगा। एसटीपी से जो प्रतिदिन उपचारित पानी निकलेगा उसका उपयोग सिंचाई के लिए किया जाएगा। जिससे आसपास के कई गांवों के किसानों को भी लाभ मिलेगा।
कचरे से तैयार होगी जैविक खाद
घरों से जो गंदा पानी सीवरेज पाइपलाइन से होकर एसटीपी तक पहुंचेगा वहां उसमें से पहले मशीनों द्वारा प्लास्टिक आदि का कचरा अलग किया जाएगा। जो पानी में घुलनशील या अन्य कचरा रह जाएगा उसे उपचारित करते समय अलग करके खाद तैयार की जाएगी। भविष्य की आबादी को देखते हुए इसकी क्षमता को 20 एमएलडी रखी गई है लेकिन जो क्षेत्र जोड़ा जा रहा है, उसे देखकर लगता है कि इसमें रोजाना पांच या छह एमएलडी पानी ही पहुंच पाएगा जिससे रोज करीब एक ट्राली यानी करीब 50 क्विंटल जैविक खाद तैयार होगी, जिसे नगर निगम पार्कों आदि में प्रयोग कर सकता है या किसानों को बेच सकता है।
यह शहर के लिए महत्वपूर्ण योजना है। इसके पूरी होने की तिथि आज समाप्त हो गई है, निर्माणदायी एजेंसियों से जवाब मांगा गया है। शीघ्र इस मामले का संज्ञान लेकर परियोजना को पूरा कराया जाएगा ताकि इसका लाभ नगरवासियों को मिल सके।
- नरेश नरवाल, आयुक्त नगर निगम करनाल
परियोजना का लगभग 85 से 90 प्रतिशत तक का कार्य पूरा कर लिया है लेकिन कार्य पूर्ण करने की अवधि 28 फरवरी 2022 थी। अमरुत योजना के तहत परियोजना का कार्य टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड व खिलाड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. संयुक्त रूप से कर रही है, समय पर कार्य पूरा नहीं किया है, इसके लिए एजेंसियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
सतीश शर्मा, कार्यकारी अभियंता, नगर निगम करनाल
20 एमएलडी फूसगढ़ का कार्य तो लगभग पूरा हो चुका। फिनिशिंग का कार्य चल रहा है। आठ एमएलडी का कार्य भी मार्च में पूरा कर लिया जाएगा। नाले तक तो सीवरेज नेटवर्क कर दिया है लेकिन कॉलोनियों से आने वाले सीवरेज को भी शीघ्र जोड़ दिया जाएगा। कोरोना काल व भुगतान में कई बार देरी के कारण कुछ विलंब हो गया है।
परवेज आलम, परियोजना प्रबंधक टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड
फूसगढ़ वार्ड-तीन में ही आता है, एसटीपी का निर्माण पूरा होने की अवधि आज खत्म हो गई है लेकिन अभी निर्माण पूरा नहीं हो सका है। टाटा कंपनी पर पहले भी कई बार निगम ने जुर्माना लगाया है, लेकिन कंपनी बड़ी है, वह माफ करा लेती है। उपायुक्त अनीश यादव, निगमायुक्त नरेश नरवाल से मिलकर आज इसे शीघ्र पूरा करने की मांग की गई है।
- परमजीत लाठर, पार्षद प्रतिनिधि वार्ड-तीन