लाओस के कृषिमंत्री ने सब्जी उत्कृष्टता केंद्र में पोली हाउस तकनीक के बारे में ली जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
घरौंडा। (करनाल)
इंडो-इजराइल के सहयोग से स्थापित सब्जी उत्कृष्टता केंद्र (सीईवी) में शनिवार को दक्षिण पूर्व एशिया में स्थित देश लाओस के कृषिमंत्री ने सब्जी उत्कृष्टता केंद्र का दौरा किया। कृषिमंत्री डॉ. लिइने थीकीओ और डेलिगेट्स ने केंद्र का भ्रमण करने के बाद कहा कि सीईवी अपने नाम के अनुरूप बेहतर है और हम भी इसकी तकनीकों को अपने देश के किसानों तक पहुंचाने के लिए कार्य करेंगे।
शनिवार को सब्जी उत्कृष्टता केंद्र पहुंचे प्रतिनिधिमंडल का केंद्र में पहुंचने पर बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ. बिल्लु यादव, प्रोजेक्ट ऑफिसर आरएस पूनिया, विशेषज्ञ कृष्ण कुमार सोलंकी ने स्वागत किया। इसके बाद सहायक परियोजना अधिकारी कृष्ण कुमार ने कृषिमंत्री और दल के सदस्यों को कांफ्रेंस हॉल में पीपीटी के माध्यम से केंद्र की गतिविधियों और किसानों को पोली हाउस तकनीकों से होने वाले फायदों के बारे में विस्तृत जानकारी। इसके बाद कृषिमंत्री ने हाईटेक ग्रीन हाउस में तैयार बिना मिट्टी की पौध का अवलोकन किया और मिश्रण से तैयार होने वाली पौध के बारे में जानकारी हासिल की। साथ ही एनवीपीएच पोली हाउस में लगी विभिन्न रंगों की शिमला मिर्च, बिना बीज के खीरे तथा वॉक इन टनल में लगी स्ट्रॉबेरी, टमाटर और चेरी टमाटर की फसलों के बारे में जाना।
कृषिमंत्री डॉ. लिइने थीकीओ ने हाइड्रोपोनिक्स हाउस की पाइपों में पानी से तैयार लेटुश की फसल में भी काफी उत्सुकता दिखाई और जानकारी हासिल की। डीडीएच डॉ. बिल्लु यादव ने कृषि मंत्री को बताया कि सीईवी की तकनीकों से किसानों को काफी फायदा हुआ है। पहले किसान ओपन में खेती करता था, लेकिन फसल पर मौसम की मार से उसे नुकसान झेलना पड़ता था। लेकिन पोली हाउस तकनीक ने न सिर्फ किसानों की फसलों को सुरक्षित किया है, बल्कि 10 माह तक फसल लेने में भी सक्षम बनाया है।
इंडो-लाओस का हो समझौता
वहीं पत्रकारों से बातचीत में लाओस के कृषिमंत्री डॉ. लिईने थीकाओ ने कहा कि सेंटर ऑफ एक्सिलेंस ने अपने नाम को सार्थक किया है। जिस प्रकार की एडवांस तकनीक का प्रयोग सेंटर पर किया जा रहा है, वह बहुत ही काबिल-ए-तारीफ है। इस तकनीक की वजह से किसान किसी भी मौसम में सब्जी की पैदावार कर सकते है। लाओस के किसानों को पोली हाउस तकनीक का फायदा मिल सके, इसके लिए भारत सरकार से बातचीत की जाएगी, ताकि समझौते के तहत इस प्रकार के सेंटर लाओस में स्थापित किए जा सके।