संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जवाहर पार्क स्थित बाबा शाह कमाल दयाल की दरगाह पर 28 से 30 मार्च तक तीन दिवसीय वार्षिक उर्स मेले का शुभारंभ हो गया है। मेले में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जो दरगाह पर चादर चढ़ाते हैं।
बाबा शाह कमाल की दरगाह हिंदू-मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल मानी जाती है। यहां सभी धर्मों के लोग एक साथ श्रद्धा के साथ माथा टेकते हैं। विशेष बात यह है कि दरगाह पर पूजा-अर्चना का कार्य वर्षों से हिंदू पुजारी ही करते आ रहे हैं। वर्तमान में बाबा रजनीश शाह दरगाह की देखरेख कर रहे हैं, जबकि उनसे पहले रोशन लाल गुप्ता और बाबा कुलवंत शाह इस परंपरा को निभाते रहे।
उर्स मेले को लेकर दरगाह परिसर और आसपास के क्षेत्र को रंग-बिरंगी लाइटों व फूलों से आकर्षक रूप से सजाया गया है। मेले के दौरान तीनों दिन भंडारे का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे। वहीं, रात्रि के समय मशहूर कव्वाल बाबा की शान में कव्वालियां पेश करेंगे, जो देर रात तक चलेंगी। परंपरा के अनुसार मेले की शुरुआत 28 मार्च की शाम चादर चढ़ाने की रस्म के साथ होती है।
सबसे पहली चादर बाबा शीतलपुरी के डेरे से लाई जाती है, जिसके बाद अन्य श्रद्धालु चादर चढ़ाते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आपसी भाईचारे का प्रतीक मानी जाती है। इतिहास के अनुसार बाबा शाह कमाल करीब 400 वर्ष पहले बगदाद से कैथल आए थे और यहीं बस गए। उनकी शिक्षाएं मानवता, सेवा और भाईचारे पर आधारित थीं, जिनका प्रभाव आज भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
उर्स मेले को लेकर प्रशासन और सेवादारों ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। तीन दिन तक चलने वाले इस मेले में भक्ति, संगीत और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिलेगा, जो जिले की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करता है।
जवाहर पार्क स्थित बाबा शाह कमाल दयाल की दरगाह के बाहर लगी रंगीन लाइटें।
जवाहर पार्क स्थित बाबा शाह कमाल दयाल की दरगाह के बाहर लगी रंगीन लाइटें।