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काला की काली करतूतों पर सकते में ग्रामीण

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कैथल। गांव खरकां से जिस युवक बलविंद्र उर्फ काला के घर से डीआरआई ने हेरोइन की इतनी बड़ी खेप बरामद की है, वह गांव में इतना साधारण बनकर रहता था कि उस पर किसी को थोड़ा सा भी शक नहीं हुआ। गांव वालों को काला की करतूतें पता चलने पर भी विश्वास नहीं हुआ। मगर खुलासे के बाद अब ग्रामीण सकते में हैं। सरपंच ने भी पहले काला का नाम सुनकर यह विश्वास नहीं किया था लेकिन जब उसने बरामद माल देखा तो उसकी भी आंखें फटी रह गई थी।
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बलविंद्र ऊर्फ काला सात से आठ साल तक युगांडा में रहकर लौटा था। गांव वालों के मुताबिक, पांच-छह साल से वह गांव में ही पशुओं की खरीद-फरोख्त का काम करता था। इस समय उसके पास एक भैंस है। उसी की देखरेख में पूरा दिन लगा रहता था। सोमवार तक आस-पड़ोस के लोगों ने उसे देखा था। उसके पड़ोस में रहने वाले युवक ने बताया कि मंगलवार को दिनभर बलविंद्र उर्फ काला उसे नहीं दिखा। रात को उसके घर पर छापा पड़ने की सूचना मिली। इसके बाद से उसका कोई अता-पता नहीं है।
बताया जा रहा है कि केंद्रीय खुफिया एजेंसी डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस की टीम के पास इतनी पुख्ता सूचना थी कि सदस्यों ने उसी पेटी को खंगाला, जिसमें हेरोइन के पैकेट रखे हुए थे। साथ ही उसी पेटी से टीम ने नकदी बरामद की। बताया जा रहा है कि रात को दस बजे जब टीम ने गांव के सरपंच को युवक का नाम लेकर बुलाया तो उसने भी पहले एक बार कह दिया था कि वह युवक ऐसा नहीं कर सकता। बाद में जब घर आए सरपंच के सामने बरामद सामान आया तो उसे और काला के परिजनों तक को विश्वास नहीं हुआ, वह ऐसा कर सकता है।
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गांव के एक अन्य युवक ने भी काला को शरीफ बताया। उन्होंने कहा कि वह पूरी शराफत से रहता था। उसका घर भी काफी साधारण है। उसके पिता की मौत हो चुकी है। उसका भाई बिजली निगम में एएसए के पद पर कार्यरत है। पूरा परिवार बेहद ही साधारण ढंग से जीवन का गुजारा कर रहा है।
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