मानसून में बरसात के बाद सब्जियों पर महंगाई की मार पड़ी है। इस कारण लोगों का फिर से रसोई का बजट बिगड़ने लगा है। बरसात होने के लोकल सब्जियों की आवक कम हो गई हैं, जिस कारण सब्जियां दोगुनी महंगी हो गई है।
सब्जियों में आलू 20, मटर 120, शिमला मिर्च 30 रुपये और टमाटर का भी दाम 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। जिससे गृहिणियों का रसोई का बजट बिगड़ रहा है। सब्जी मंडी के दुकानदारों के अनुसार बरसात के मौसम में लोकल सब्जियों की आवक कम होने के कारण महंगाई बढऩे का कारण है। जैसे ही लोकल सब्जियों में आवक तेज होगी तो सब्जियों में दाम भी कम हो जाएंगे। बारिश का सबसे ज्यादा असर टमाटर पर देखने को मिल रहा है। टमाटर बरसात से पहले तक 30 रुपये किलो था, जो अब 50 रुपये पहुंच गया है। बरसात के कारण बेल वाली सब्जियां अधिक महंगी हुई हैं।
सब्जी विक्रेता विक्की ने बताया कि लोकल सब्जियों की आवक न होने के कारण दाम अधिक होने की समस्या सामने आ रही है। यदि अपने शहर और आस-पास के गांवों से सब्जियों की सप्लाई सही ढंग से शुरू हो जाएगी यह समस्या खत्म हो जाएगी।
सब्जी उत्पादक राजेश रहेजा ने बताया कि बरसात के कारण सब्जियां खराब हो गई थीं। सप्ताह पहले हुई बरसात के कारण फसल की बिजाई भी लेट हो गई है। इस कारण लोकल सब्जियां मंडी में नहीं है। मंडी में बाहर से सब्जियां आ रही हैं, जो महंगी हैं। करीब दो महीने बाद ही लोकल सब्जियां मंडी में पहुंच पाएंगी। जिसके बाद सब्जी सस्ती होगी और आमजन का राहत मिलेगी।
गृहिणी राखी गोयल ने बताया कि सब्जियों में एकदम से महंगाई की मार पड़ने से रसोई में सब्जी बनाने के लिए अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है। टमाटर, गोभी के महंगा होने के कारण अब सब्जी में इसे डालना बहुत कम कर दिया है। सरकार को चाहिए कि वह सब्जी के दामों में कमी लाएं।
गृहिणी उर्मिला ने बताया कि सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। प्रतिदिन महंगाई बढ़ती ही जा रही है। गैस सिलिंडर 900 रुपये के पास पहुंच गया है। जहां पहले रसोई में महीने का 3 से 4 हजार खर्चा था, वहीं अब 8-9 हजार लगने लग गए है। महंगाई सीधे तौर पर दोगुना बढ़ गई है। सरकार को सब्जियों व गैस सिलिंडर के दाम कम करने चाहिए।