कैथल। अल्तमश की बेटी और हिंदुस्तान की पहली जांबाज मुस्लिम शासिका रजिया बेगम सुल्ताना का मानस रोड स्थित जीर्ण-शीर्ण मकबरे को उद्यान का रूप देने का सिलसिला शुरू हो गया है। पट्टी खौत क्षेत्र की जमीन में बाइपास से मानस गांव की तरफ जाने वाले रास्ते की शुरुआत में बाईं तरफ कुछ दूर खेतों में चलने पर सामने रजिया बेगम का मकबरा जीर्ण-शीर्ण अवस्था में झाड़ियों में घिरा दिखाई देता है। इसके सामने कुछ दूरी पर एक ओर ढांचा है, जहां पर मकबरे पर आने वाले लोग इबादत करने के साथ शायद आराम फरमाते होंगे।
इन दोनों ढांचों के बीच मुख्य सड़क की तरफ एक पुराना कुंआ आज भी दिखाई देता है। इस समय इस जर्जर दिखने वाले मकबरे के ढांचे के पीछे की तरफ नीचे मिट्टी से पूरी तरह अटा पड़ा एक द्वार दिखाई देता है, जिसकी सफाई करने के बाद इसमें से किसी दूसरे भवन को जोड़ने वाला जमीन के नीचे का रास्ता निकलना संभवत: दिखाई देगा।
डीसी एनके सोलंकी ने सही रूप की पहचान की
डीसी एनके सोलंकी द्वारा सही रूप से उस जगह को पहचाना है, लेकिन इससे पूर्व यहां का दौरा करने वाले लोग अक्सर इस ढांचे के सामने पड़ी जर्जर मीनारों के बीच की जगह को ही मकबरा मान रहे थे। डीसी के अनुसार, मानस रोड से मकबरे तक जाने वाला रास्ता पक्का करने के साथ-साथ राजस्व रिकार्ड के अनुसार एक कनाल भूमि में स्थित मकबरे के ढांचे को मूल स्वरूप प्रदान किया जाएगा।
इनके चारों तरफ पौधा रोपण होगा और इसे एक उपवन के रूप में विकसित करके राहगीरों के आकर्षण का केंद्र बनाया जाना प्रस्तावित है। चूंकि मुख्य मार्ग से रजिया बेगम के मकबरे के स्थान तक पहुंचने के बीच पड़ने वाले एक किसान के खेत की भूमि है। अत: सीधे वहां तक पहुंचने के लिए इस भूमि के मालिक को इस जमीन के स्थान पर तबादले में वक्फ बोर्ड या पंचायत की जमीन दिए जाने की प्रक्रिया भी अमल में लाया जाना प्रस्तावित है।
हिंदुस्थान की पहली मुस्लिम शासक थी रजिया
डीसी सोलंकी ने बताया कि शुरुआती दौर में जिला योजना के तहत छह लाख रुपये की धनराशि से रजिया बेगम उद्यान को विकसित किया जाना है। इसके बन जाने के बाद अन्य ऐतिहासिक स्थलों के साथ-साथ सैलानी इसे देखने भी आएंगे।
गौरतलब है कि कैथल नगर से मानस तीर्थ की ओर जाने वाली सड़क पर शुरू में ही बाईं तरफ खेतों में हिंदुस्तान की पहली मुस्लिम शासिका और अल्तमश की बेटी रजिया बेगम सुल्ताना का मकबरा है।
यह मकबरा इतिहासकारों के आकर्षण का केंद्र है। इतिहास में मिले उल्लेखों के अुनसार, रजिया बेगम के पति और उस वक्त बठिंडा के गवर्नर अल्तुनिया ने सेना का गठन करके दिल्ली की ओर आक्रमण के लिए कूच की थी और दुर्भाग्य से उसे शिकस्त हुई थी। कैथल में ही रजिया, सुल्तान और दिल्ली के शासक बेहराम शाह की सेनाओं के बीच युद्ध हुआ था तथा 13 नवंबर 1240 ई. को रजिया सुल्तान व उनके पति अल्तुनिया को उसकी ही सेना ने बगावत करके इसी स्थान पर मौत के घाट उतार दिया था। परंपरा के अनुसार रजिया को इसी स्थान पर दफना दिया गया था।